सीएम विष्णु देव साय के सख्त तेवर, बलरामपुर समीक्षा बैठक में अफसरों को अल्टीमेटम
सुशासन तिहार के दौरान बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में प्रशासनिक समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रशासनिक कामकाज में अफसरों के ढीले रवैये पर सख्ती दिखाई है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि जनता की समस्याओं के निपटारे में कोई भी कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों को आड़े हाथों लिया है। जनसमस्याओं के समाधान में लापरवाही बरतने वाले अफसरों और कर्मचारियों को दो टूक चेतावनी देते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि गैर जिम्मेदार रवैये पर अब कोई भी बख्शा नहीं जाएगा। राजस्व मामलों में अनावश्यक देरी करने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अमल में लाई जाएगी।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राजस्व विभाग आम जनता से सीधे जुड़ा है। अधिकारियों की लापरवाही शासन की छवि खराब कर रही है। उन्होंने तल्ख लहजे में कहा कि अविवादित नामांतरण-बंटवारे में देरी करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। मैदानी अमले की ढिलाई अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने विशेष शिविर लगाकर नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन जैसे जमीन के मामलों का तुरंत निपटारा करने का आदेश दिया है। साथ ही फौती-नामांतरण में लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आय, जाति और निवास प्रमाण-पत्र की प्रक्रिया में तेजी लाने के भी निर्देश दिए हैं। उन्होंने पटवारियों को मुख्यालय पर अनिवार्य रूप से रहने और जिम्मेदारी के साथ काम करने की नसीहत भी दी है।
मुख्यमंत्री साय ने योजनाओं की प्रगति के साथ-साथ अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की। बैठक के दौरान उस समय स्थिति गंभीर हो गई, जब लोक निर्माण विभाग का एक अधिकारी सड़क मरम्मत की सही जानकारी प्रस्तुत नहीं कर पाया। इस पर मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा, “मीटिंग से बाहर जाइए, अपने सचिव से बात करिए और सही जानकारी लेकर आइए।” इसके बाद बैठक कक्ष में सन्नाटा छा गया और यह स्पष्ट हो गया कि अब कार्यप्रणाली में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
हम सब सेवक कार्यालय सेवा तीर्थ
मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सभी जनता के सेवक हैं और अपने-अपने कार्यालयों को सेवा तीर्थ के रूप में देखना चाहिए, जहां आम जनता की सेवा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का विकास सबसे पहले सड़कों पर दिखाई देता है, इसलिए मानसून आने से पहले एक भी सड़क खराब नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने लोक निर्माण विभाग को निर्देश दिया कि सभी सड़कों की मरम्मत समय सीमा में पूरी की जाए, विशेष रूप से आबादी वाले क्षेत्रों की सड़कों को प्राथमिकता दी जाए।
डीएमएफ की राशि का खर्च प्रभावित गांव में ही हो
मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि कार्य में लापरवाही पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) निधि के उपयोग पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि इस निधि की अधिकतम राशि खनन प्रभावित गांवों के विकास में खर्च की जानी चाहिए। मुख्यालय के नाम पर इस राशि का उपयोग स्वीकार्य नहीं होगा।
पेजयल और धान बीज सुनिश्चित करने को कहा
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि किसी भी नागरिक को पेयजल के लिए भटकना नहीं पड़े और जहां आवश्यकता हो, वहां टैंकर के माध्यम से पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। गर्मी और बारिश के बीच संभावित मौसमी बीमारियों से निपटने के लिए अग्रिम तैयारी करने के साथ-साथ किसानों के लिए धान, बीज और खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।
समस्याओं के समाधान में देरी बर्दाश्त नहीं
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के आचरण पर जोर देते हुए कहा कि आम जनता के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाए। उनकी समस्याओं को धैर्यपूर्वक सुना जाए और समय पर समाधान सुनिश्चित किया जाए। कलेक्टरों को निर्देश दिया गया कि वे अधीनस्थ अधिकारियों के कार्यों का नियमित मूल्यांकन करें और आवश्यकता पड़ने पर कठोर कार्रवाई से भी न हिचकें। बैठक में जिले की प्रभारी मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, सांसद सरगुजा चिंतामणि महाराज, विधायक सामरी उद्देश्वरी पैकरा आदि उपस्थित थे।
सभी राजस्व अभिलेखों का होगा डिजिटलीकरण
मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि राज्य के सभी राजस्व अभिलेखों का डिजिटलीकरण किया जाएगा, जिससे नागरिकों को खसरा-नक्शा डिजिटल हस्ताक्षर के साथ घर बैठे उपलब्ध हो सकेगा। इसके साथ ही मुख्यमंत्री हेल्पलाइन सेवा भी शीघ्र प्रारंभ की जाएगी, जिसमें टोल फ्री नंबर के माध्यम से आमजन समस्याएं दर्ज करा सकेंगे। कलेक्टरों को निर्देशित किया गया कि राजस्व मामलों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करें, ताकि लोगों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
