जनगणना2027- घर बैठे करें जनगणना, सरकारी पोर्टल पर देने होंगे 33 सवालों के जवाब - CGKIRAN

जनगणना2027- घर बैठे करें जनगणना, सरकारी पोर्टल पर देने होंगे 33 सवालों के जवाब


छत्तीसगढ़ में स्व-गणना की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और इसके लिए केवल 2 दिन शेष रह गए हैं। आधिकारिक पोर्टल https://se.census.gov.in/ पर जाकर 15 मिनट के भीतर प्रक्रिया को पूरी की जा सकती है। 30 अप्रैल के बाद घर-घर जनगणना शुरू हो जाएगी। 

डर से स्व-गणना से परहेज कर रहे लोग

प्रदेश के करीब 2.5 करोड़ ऑनलाइन उपभोक्ताओं की तुलना में यह भागीदारी काफी कम है। लोग भ्रम, डेटा चोरी, टैक्स, पुलिस या अन्य जांच में जानकारी का उपयोग होने के डर से स्व-गणना से परहेज कर रहे हैं। हालांकि अधिकारियों की तरफ से पहले ही यह स्पष्ट किया जा चुका है कि जानकारी गोपनीय रखी जाती है।

लोगों को 33 सवालों के जवाब देने हैं

स्व-गणना में परिवार की संरचना, उपलब्ध सुविधाएं और परिसंपत्तियों से जुड़े 33 सवालों के जवाब देने हैं। अधिकारियों का कहना है कि पहली बार जनगणना को डिजिटली कराया जा रहा है, जिसमें स्व-गणना भी एक विकल्प है। स्व-गणना ऐच्छिक हैं। इसके बाद कर्मचारी घर-घर जाएंगे।

किराए के मकान में निवासरत हैं तो भी विकल्प उपलब्ध

स्व-गणना प्रक्रिया पूरी करने वाले लोगों को कर्मचारियों के घर पहुंचने पर सिर्फ ऑनलाइन जानकारी भरने के बाद जनरेट हुई एसईआइडी दिखाना होगा। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी राज्य के हों, लेकिन वर्तमान में जहां निवासरत हैं, उसी के अनुसार जानकारी भरनी है। स्वयं या किराए के मकान में निवासरत हैं तो स्व-गणना में उसके भी विकल्प उपलब्ध हैं।

स्व-गणना के फायदे

- समय और संसाधनों की बचत होती है। काम तेजी से पूरा होता है।

- कर्मचारियों के घर-घर पहुंचने पर संशोधन का अवसर मिलता है।

- तीसरे व्यक्ति पर निर्भरता कम होने से गलतियों की संभावना कम होती है।

- सरकारी कर्मी के न आने का इंतजार और न कहीं जाने की जरूरत।

- दर्ज की गई जानकारी सीधे सिस्टम में, हेराफेरी या बदलाव की संभावना नहीं।

जनगणना से संबंधित किसी प्रकार की जानकारी के लिए टोल फ्री नंबर 1855 स्थापित किया गया है, जो 16 अप्रैल से शुरू है।

इन सवालों के देने हैं जवाब

1 - मकान की स्थिति: लाइन क्रमांक, भवन नंबर, जनगणना मकान नंबर, मकान के दीवार में प्रयुक्त सामग्री, फर्श में प्रयुक्त प्रमुख सामग्री, छत में प्रयुक्त सामग्री, मकान का उपयोग, मकान की स्थिति।

2 - परिवार की जानकारी: परिवार क्रमांक, परिवार में रहने वाले लोगों की संख्या, मुखिया का नाम, मुखिया का लिंग, क्या मुखिया अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति या अन्य से संबंधित है, मकान के स्वामित्व की स्थिति, परिवार के पास रहने के लिए उपलब्ध कमरों की संख्या, परिवार में रहने वाले विवाहित दंपतियों की संख्या।

3 - परिवार को उपलब्ध सुविधाएं: पेयजल का मुख्य स्रोत, प्रकाश का मुख्य स्रोत, शौचालय की सुलभता, स्नानगृह की उपलब्धता, रसोईघर और एलपीजी व पीएनजी कलेक्शन की उपलब्धता।

4 - परिवार की परिसंपत्तियां: रेडियो, टेलीविजन, इंटरनेट सुविधा, लैपटाप, टेलीफोन, साइकिल, कार, परिवार की ओर से उपभोग किए जाने वाले मुख्य अनाज, मोबाइल नंबर।

16 अप्रैल से डिजिटल मोड पर स्व-गणना और एक मई से कर्मचारी (प्रगणक) घर-घर जाकर मकानसूचीकरण का काम करेंगे। स्व-गणना ऐच्छिक है लेकिन लोगों को बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए। इससे समय की बचत होती है और तेजी से काम होता है। स्व-गणना पूरी तरह से सुरक्षित है। जानकारी का कहीं पर उपयोग नहीं होता है।

-मनोज कुमार पिंगुआ, नोडल अधिकारी, प्रदेश जनगणना

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