केरोसिन की 'घर वापसी'! लेकिन स्टोव कहां से लाएंगे..?
अमेरिका-इजराइल और ईरान युद्ध के कारण केरोसिन तेल की फिर से घर वापसी हो रही है, स्टोव पर अब किचन शिफ्ट होने की शुरुआत होने लगी है. जानकारों का कहना है कि जो स्थिति अभी है उससे केरोसिन तेल पेट्रोमेक्स, लालटेन भी कुछ क्षेत्रों में जलते दिख सकते हैं, मगर स्टोव का जलना शुरू हो गया है, भारत में जितनी एलपीजी की खपत हर दिन होती है उतनी आवक नहीं हो पा रही है. सप्लाई चेन पर असर पड़ने की वजह से एलपीजी संकट देश में गहराता जा रहा है. सरकार विकल्प की तलाश में जुटी है, लेकिन वह प्रक्रिया भी तुरंत राहत देता नजर नहीं आ रहा है. ईरान-अमेरिका-इजराइल युद्ध अभी समाप्त होता भी नहीं दिख रहा है. ऐसे में जब युद्ध लंबा खिंचा तो क्या होगा? इसकी कल्पना ने सरकारों को दूसरे विकल्प के बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया है. केरोसिन स्टोव एक जमाने में भारतीय घरों की पहचान होता था। मिट्टी के तेल से स्टोव में खाना पकाया जाता था। अब फिर से केरोसिन स्टोव की जरूरत और याद आने लगी है। LPG रसोई गैस किल्लत के बीच सरकार ने केरोसीन (मिट्टी के तेल) की बिक्री के नियमों में ढील दी है। कोशिश है कि नागरिकों को तेजी और आसानी से केरोसीन मिल जाए, ताकि खाना पकाने में गैस की निर्भरता कम हो। लेकिन बाजार में आपको केरोसीन का स्टोव ढूंढे नहीं मिलेगा। यही हालत केरोसीन से जलने वाले लालटेन की है।
एलजीपी सिलेंडरों की किल्ल्त के बीच सरकार ने केरोसीन की बिक्री तो खोल दी है। उद्देश्य है कि लोग एलपीजी स्टोव के बदले केरोसीन स्टोव का उपयोग करेंगे। लेकिन बाजार में केरोसीन स्टोव एक तरह से गायब हैं। खास कर ग्रामीण क्षेत्रों में.लकड़ी या कोयले पर खाना बनाना मजबूरी हो सकता है लेकिन यह स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है. इसलिए लकड़ी-कोयले के मुकाबले सरकार ने धुएं से मुक्ति के लिए विकल्प के तौर पर केरोसिन की वापसी कराने की सोची है. इसके लिए सरकार की ओर से बाकायदे नोटिफिकेशन जारी किया गया है, जिसमें पीडीएस में मिलने वाला केरोसिन अब पेट्रोल पंपों पर भी आसानी से खरीदा जा सकेगा.
केरोसिन की आम लोगों तक आसान पहुंच जल्दी से इस ओर लोग स्विच हो रहे हैं. जिनके पास पुराना स्टोव है वो उसकी मरम्मत करवाकर फिर से इस्तेमाल में ला रहे हैं लेकिन जिसके पास नहीं है वह काफी परेशान है. बाजार में नए स्टोव आउट ऑफ स्टॉक हैं और जहां मिल रहे हैं वहां पर उसके दाम आसमान छू रहे हैं. कुछ साल पहले तक जो केरोसिन 400 रुपए तक आसानी से मिल जाता था वह अब 1700 रुपए से लेकर 5000 रुपए में बिक रहा है.
''2010 से पहले रसोई में स्टोव जलता था, वह दिन फिर से लौट रहे हैं. हालांकि यह कष्ट दायक है, क्योंकि इससे सेहत पर काफी बुरा प्रभाव भी पड़ता है. इसको जलाने में भी काफी समस्या होती है. हवा भरते समय टंकी फटने का डर भी होता है.
चलन से बाहर हो गया था केरोसिन स्टोव : नया स्टॉक आता है तो कीमत और भी बढ़ सकती है, लेकिन कितनी बढ़ेगी ये कहना जल्द बाजी है. दुकानदार इसलिए भी कीमत या स्टोव बेचने की बात करने से हिचकिचाते हैं क्योंकि ये चलन से बाहर हो गया था और इस के उपयोग पर एक तरह से बंदिश भी थी.
भारत सरकार ने केरोसिन तेल वितरण के नियमों में ढील दी है, ईंधन संकट से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने केरोसिन तेल की सप्लाई को लेकर 60 दिनों के लिए अनुमति दी है, केंद्र सरकार के 29 मार्च को जारी गजट नोटिफिकेशन के अनुसार पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पब्लिक डिसटीब्यूशन सिस्टम ' सरकारी राशन की दुकान ' के जरिए 60 दिनों के लिए सुपीरियर केरोसिन तेल की अस्थाई आपूर्ति की अनुमति दी है.
केरोसिन का उपयोग एक बार फिर से शुरू होने से विशेषज्ञ चिंता जाता रहे हैं, उनका कहना है कि जिस कारण इसे बाजार से हटाया गया था वह समस्या तो फिर से शुरू हो जाएगी. प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ संजय प्रसाद कहते हैं कि केरोसिन का उपयोग स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक है. ''स्टोव पर खाना बनाने से घर के अंदर वायु प्रदूषकों की उच्च सांद्रता पाई जाती है, जैसे कि कालिख, जिसे कार्बन भी कहा जाता है, कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन यौगिक, इन प्रदूषकों के लंबे समय तक संपर्क में रहने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं आती हैं. कई बार गंभीर बीमारियों की चपेट में भी लोग आते हैं. खासकर महिलाओं पर इसका असर ज्यादा गंभीर होता है, क्योंकि वही खाना बनाती हैं.''- डॉ संजय प्रसाद, चिकित्सक
डॉ प्रसाद कहते हैं कि केरोसिन तेल के स्टोव पर खाना बनाने से सांस की समस्याएं, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, निमोनिया आदि की समस्या के साथ आंखों में जलन की समस्या होती है. वो कहते हैं कि 20 साल पहले जब इस का उपयोग होता था तो ऐसे मरीज काफी संख्या में उनके पास आते थे.
केरोसिन स्टोव के फायदे
गैस पर निर्भरता कम : LPG की कमी में यह अच्छा विकल्प
सस्ता ईंधन : कई जगह गैस से सस्ता पड़ता है केरोसिन
ग्रामीण और आपातकालीन उपयोग : बिजली या गैस न होने पर भी उपयोगी
पोर्टेबल : कहीं भी ले जाया जा सकता है
केरोसिन स्टोव के नुकसान
धुआं और प्रदूषण : स्वास्थ्य के लिए हानिकारक
गंध : खाना बनाते समय तेज गंध
खतरा : आग लगने या विस्फोट का जोखिम
रख-रखाव : बार-बार सफाई और मरम्मत की जरूरत
