साय सरकार का दिल छू लेने वाला अंदाज, जब बीजापुर दौरे के दौरान सरेंडर नक्सल दंपति की दुकान पर पहुंचे.... - CGKIRAN

साय सरकार का दिल छू लेने वाला अंदाज, जब बीजापुर दौरे के दौरान सरेंडर नक्सल दंपति की दुकान पर पहुंचे....


मुख्यमंत्री सरकार का दिल छू लेने वाला अंदाज उस समय देखने को मिला जब कोण्डापल्ली की उस छोटी सी दुकान पर बिताए गए कुछ पल सुशासन तिहार के सबसे भावनात्मक क्षणों में शामिल हो गए. सीएम ने काफिला रोककर मासा और जयमोती से बात की. इस तस्वीर ने बता दिया कि अब बस्तर भय और हिंसा से निकलकर विश्वास और विकास की नई उम्मीद की ओर बढ़ रहा है.

छत्तीसगढ़ में 1 मई से सुशासन तिहार का दौर चल रहा है. सीएम विष्णुदेव साय सुशासन तिहार में विभिन्न जिलों का दौरा कर रहे हैं और पेड़ के नीचे चौपाल लगा रहे हैं. इस चौपाल में वह जनता से सीधा संवाद कर रहे हैं. सुशासन तिहार के तहत सीएम विष्णुदेव साय बीजापुर के कोंडापल्ली गांव पहुंचे. यहां वह जनचौपाल में शामिल होने जा रहे थे. इस दौरान उनका काफिला अचानाक एक छोटी सी किराना दुकान पर रुका.

सरेंडर नक्सल दंपति के दुकान पर रुके सीएम साय

मुख्यमंत्री दुकान के भीतर पहुंचे और वहां मौजूद मासा तामो एवं जयमोती से आत्मीयता से बातचीत की. उन्होंने दुकान से पानी की बोतल खरीदकर उनका हौसला बढ़ाया और कहा कि आत्मनिर्भरता ही नए जीवन की सबसे बड़ी पहचान है. बातचीत के दौरान दोनों ने अपने जीवन के संघर्ष और बदलाव की कहानी साझा की.

सरेंडर नक्सल दंपति मासा तामो और जयमोती की कहानी

मासा तामो का बचपन अभावों में बीता. पिता के निधन के बाद उन्हें शिक्षा का अवसर नहीं मिल सका और परिस्थितियों ने उन्हें वर्ष 2007 में नक्सली संगठन से जुड़ने पर मजबूर कर दिया. वहीं जयमोती की कहानी भी कुछ ऐसी ही रही-बचपन में माता-पिता का साया उठने के बाद उन्होंने भी कठिन हालातों में वही रास्ता अपनाया. संगठन में दोनों की मुलाकात हुई और वर्ष 2021 में उन्होंने विवाह कर लिया.

सरेंडर करने के बाद बदला जीवन

समय के साथ दोनों को अहसास हुआ कि हिंसा का रास्ता उनके और आने वाली पीढ़ी के लिए सही नहीं है. इसी सोच के साथ उन्होंने अक्टूबर 2025 में आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का साहसिक निर्णय लिया. बीजापुर पुनर्वास केंद्र पहुंचने के बाद उनके जीवन में एक नया अध्याय शुरू हुआ, जहां उन्हें पहली बार अक्षर ज्ञान, कौशल विकास प्रशिक्षण और विभिन्न शासकीय योजनाओं से जोड़ा गया.

प्रशासन की तरफ से जयमोती को मिली मदद

प्रशासन की मदद से उनके लिए राशन कार्ड, आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड, जाति प्रमाण पत्र और बैंक खाता जैसी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की गईं. महिला एवं बाल विकास विभाग की सक्षम योजना के तहत जयमोती को एक लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ, जिससे कोण्डापल्ली में उन्होंने अपनी छोटी-सी किराना दुकान शुरू की.

मासा और जयमोती ने सीएम साय से की बात

आज यह दुकान उनकी आजीविका का प्रमुख साधन बन चुकी है. मासा और जयमोती ने मुख्यमंत्री को बताया कि अब वे सम्मानपूर्वक जीवनयापन कर रहे हैं और अपने भविष्य को लेकर नई उम्मीदों के साथ आगे बढ़ रहे हैं. उन्होंने कहा कि कभी उन्होंने सोचा भी नहीं था कि उनका जीवन इस तरह बदल सकता है, लेकिन सरकार की पुनर्वास नीति और प्रशासन के सहयोग ने उन्हें नई पहचान दी है.

यह केवल दो लोगों की कहानी नहीं, बल्कि बदलते बस्तर की तस्वीर है. यदि अवसर, विश्वास और सहयोग मिले तो कोई भी व्यक्ति हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौट सकता है और सम्मानजनक जीवन जी सकता है- विष्णुदेव साय, सीएम, छत्तीसगढ़




Previous article
Next article

Articles Ads

Articles Ads 1

Articles Ads 2

Advertisement Ads