छत्तीसगढ़ में साय सरकार के नई सुशासन का पहल 3100 रुपए का समर्थन मूल्य और डिजिटल धान खरीदी व्यवस्था - CGKIRAN

छत्तीसगढ़ में साय सरकार के नई सुशासन का पहल 3100 रुपए का समर्थन मूल्य और डिजिटल धान खरीदी व्यवस्था


छत्तीसगढ़ का किसान केवल अन्नदाता नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ की सामाजिक-आर्थिक रीढ़ भी है। धान का कटोरा के नाम से प्रसिद्ध छत्तीसगढ़ में धान, केवल उत्पादन की दृष्टि से नहीं बल्कि यहाँ के किसानों की मेहनत, परंपरा, संस्कृति और आजीविका के साथ भी गहराई से जुड़ी हुई है। जब शासन की कोई नीति किसान को केंद्र में रखकर बनती है तो उस नीति का प्रभाव केवल खेतों तक सीमित नहीं रहता बल्कि पूरे समाज और राज्य की अर्थव्यवस्था तक पहुंचता है। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी और प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान खरीदी की नीति ने कृषकों को उनकी पूरी उपज का उचित, सुरक्षित और लाभकारी मूल्य सुनिश्चित की गई। छत्तीसगढ़ की साय सरकार का यह केवल एक आर्थिक निर्णय नहीं बल्कि किसानों के श्रम के प्रति शासन की संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता का प्रतीक भी रही। छत्तीसगढ़ में साय सरकार से पहले अक्सर यह देखा जाता रहा है कि किसान अपनी फसल का उचित मूल्य पाने के लिए बिचौलियों पर निर्भर रहते थे। समर्थन मूल्य की अनिश्चितता, खरीदी में देरी और भुगतान में विलंब किसानों के लिए मानसिक तनाव और हताशा की एक बड़ी वजह हुआ करती थी। वर्ष 2025-26 की नई व्यवस्था ने किसानों की बहुत सी समस्याओं पर निर्णायक प्रहार करते हुए उसे दूर किया है। छत्तीसगढ़ का किसान  यह जान गया है कि उसे न तो अपनी फसल औने-पौने दाम पर बेचनी पड़ेगी न ही भुगतान के लिए महीनों तक दफ्तरों के चक्कर लगाने होंगे।जन-जन का यही भरोसा किसी भी नीति की सबसे बड़ी सफलता होती है। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा लागू की गई तकनीक आधारित डिजिटल धान खरीदी व्यवस्था अब केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि किसानों के भरोसे, सम्मान और आत्मविश्वास का मजबूत आधार बन गई है। इस पूरी प्रक्रिया के केंद्र में हैं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, जिनके स्पष्ट मार्गदर्शन, संवेदनशील नेतृत्व और सुशासन की सोच ने इस पूरी व्यवस्था को जमीन पर प्रभावी रूप से उतारा है। 

डिजिटल धान खरीदी से प्रदेश में खुला पारदर्शिता का नया अध्याय

छत्तीसगढ़ शासन की डिजिटल धान खरीदी व्यवस्था ने पूरी प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बना दिया। उपार्जन केंद्रों में डिजिटल कांटे से सटीक तौल, ऑनलाइन पंजीयन, रियल टाइम डेटा एंट्री और सुव्यवस्थित भुगतान प्रणाली ने हर स्तर पर पारदर्शिता सुनिश्चित की गई।नई व्यवस्था में अब छत्तीसगढ़ के कास्तकारों को नाप तौल में गड़बड़ी या रिकॉर्ड में कोई हेरफेर का डर नहीं रहा। पूरी प्रक्रिया तकनीक आधारित होने से मानवीय त्रुटियों और भ्रष्टाचार की संभावनाएँ स्वतः ही न्यूनतम हो गई हैं। राज्य के किसानों इस व्यवस्था को न केवल स्वीकार किया बल्कि उस पर गर्व और विश्वास भी दिखाया है।

सुशासन से छत्तीसगढ़ में धान खरीदी का ऐतिहासिक कीर्तिमान

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में साय सरकार ने धान खरीदी के क्षेत्र में जो कीर्तिमान स्थापित किया है वह आज पूरे देश के लिए मिसाल बना हुआ है। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में प्रदेश की साय सरकार ने 3100 रुपये प्रति क्विंटल के ऐतिहासिक समर्थन मूल्य पर 21 क्विंटल प्रति एकड़ की दर से रिकॉर्ड तोड़ धान खरीदी की है।31 जनवरी 2026 तक प्रभावी रहने वाली इस व्यवस्था से प्रदेश के 25 लाख से अधिक किसानों को सीधा लाभ मिला है।छत्तीसगढ़ में 27 लाख से अधिक किसानों का पंजीकरण हुआ है और “टोकन तुंहर हाथ” जैसी पारदर्शी डिजिटल प्रणाली से 92 प्रतिशत से अधिक धान की खरीदी पूरी की गई है। 24×7 ऑनलाइन टोकन व्यवस्था, बायोमेट्रिक सिस्टम और 2,739 उपार्जन केंद्रों के जरिए यह प्रक्रिया सुचारू रूप से संचालित हुई है।

बिचौलियों की भूमिका समाप्त कर साय सरकार ने किसानों को उनके धान का भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में त्वरित रूप से सुनिश्चित किया है। एग्रीस्टैक पोर्टल के माध्यम से किसान डेटा को मजबूत किया गया है। 160 लाख मीट्रिक टन जैसे बड़े लक्ष्य के पीछे अब तक 139 लाख मीट्रिक टन से अधिक की ऐतिहासिक खरीदी पूरी हो चुकी है। धान खरीदी की यह व्यवस्था “मोदी की गारंटी” के अनुरूप किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक निर्णायक, पारदर्शी और ऐतिहासिक कदम साबित हुआ है।

उपार्जन केंद्र की तस्वीर में नजर आई – सुविधा, सम्मान और संवेदनशीलता

इस धान उपार्जन केंद्रों की तस्वीर भी अब पूरी तरह बदली नज़र आई। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन द्वारा यह सुनिश्चित किया गया कि हर केंद्र पर कृषकों के लिए बैठने की समुचित व्यवस्था, पेयजल, छाया, शौचालय और अन्य मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध हों।भीड़-भाड़ से मुक्त, सुव्यवस्थित और अनुशासित वातावरण ने किसानों के अनुभव को सकारात्मक बनाने का काम किया। नई व्यवस्था में धान बिक्री किसानों के लिए किसी बोझ या परेशानी का कारण नहीं बल्कि सम्मानजनक और सहज प्रक्रिया बनी। किसानों ने धान ख़रीदी को उस उत्सव के रूप में देखा जहाँ उन्हें अपने श्रम का पूरा-पूरा मूल्य समय पर मिल रहा हो।

धान ख़रीदी में दिखा सीएम साय का सुशासन और संवेदनशील नेतृत्व

मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन ने यह प्रमाणित किया है कि नीति तभी सफल होती है जब वह जमीन पर दिखाई दे। नई व्यवस्था में मुख्यमंत्री का स्पष्ट निर्देश रहा कि धान खरीदी में किसी भी स्तर पर किसान को परेशानी नही होनी चाहिए जिसके परिणामस्वरूप प्रशासनिक अमले ने पूरी तत्परता और जवाबदेही के साथ काम किया। मुख्यमंत्री स्वयं लगातार व्यवस्था पर अपनी नज़र जमाए रहे,फीडबैक लेते रहे और आवश्यक सुधारों को तुरंत लागू किए जा रहे हैं। राज्य के मुखिया का यह सक्रिय नेतृत्व ही छत्तीसगढ़ की धान खरीदी व्यवस्था को देश के लिए एक मॉडल बना।

किसान सशक्तिकरण से हो रहा राज्य सशक्तिकरण

3100 रुपये का समर्थन मूल्य और डिजिटल धान ख़रीद व्यवस्था की यह नई नीति केवल किसान को ही नहीं बल्कि पूरे राज्य को आर्थिक रूप से मजबूत करने वाली साबित हो रही है। किसानों की आय बढ़ने से ग्रामीण बाजारों में क्रय शक्ति बढ़ी है, जिससे स्थानीय व्यापार, कुटीर उद्योग और सेवा क्षेत्र को भी गति मिली है। यह एक सकारात्मक चक्र है जिसमें किसान सशक्त, गाँव सशक्त और अंततः राज्य सशक्त हो रहा है।छत्तीसगढ़ में धान खरीदी केवल एक शासकीय प्रक्रिया नहीं बल्कि किसानों के लिए विश्वास और समृद्धि का उत्सव बन गया है। प्रदेश भर के धान उत्पादक किसान खुले मन से मुख्यमंत्री का आभार प्रकट कर रहे हैं। जन-जन का यही विश्वास किसी भी लोकतांत्रिक शासन की बड़ी पूँजी होती है। छत्तीसगढ़ शासन की तकनीक आधारित डिजिटल धान खरीदी व्यवस्था ने यह साबित कर दिया है कि यदि नीति में नीयत साफ हो, नेतृत्व संवेदनशील हो और प्रशासन जवाबदेह हो तो ऐसे ही बड़े परिवर्तन देखाने को मिलता है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ ने किसान हितैषी सुशासन और सु-व्यवस्था का जो उदाहरण प्रस्तुत किया है, वह आने वाले वर्षों में देशभर के लिए प्रेरणास्रोत बन रहा है। धान की इस फसल के साथ ही साथ अब छत्तीसगढ़ में भरोसे, पारदर्शिता और सम्मान की फसल भी लहलहा रही है और यह छत्तीसगढ़ की डबल इंजन सरकार के लिए एक बड़ी सफलता है।

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