लाल आतंक पर 'सुशासन' की जीत...!, नक्सल प्रभावित गांवों तक पहुंची बसें
दशकों तक नक्सलवाद और पिछड़ेपन के अंधेरे में डूबे अबूझमाड़ को अब विकास की रोशनी दिखने लगी है. छत्तीसगढ़ सरकार की योजनाओं से लोगों को काफी मदद मिल रही है। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री बस सेवा अब नारायणपुर में संचालित है. सीएम विष्णु देव साय ने कुरूसनार से 4 किमी तक ग्रामीणों के साथ यात्रा कर योजना की उपयोगिता और जनोन्मुखी सोच देखी. राज्य के दूरस्थ और सीमांत जनजातीय अंचलों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शुरू की गई मुख्यमंत्री बस सेवा अब नारायणपुर जिले में सफलतापूर्वक संचालित हो रही है. मुख्यमंत्री का बस सेवा से सफर करना इस योजना की विश्वसनीयता और जनोन्मुखी सोच को रेखांकित करता है. उन्होंने अपने सह यात्रियों से अब इस नक्सल प्रभावित इलाके में बस सेवा शुरू होने से हुए फायदों के बारे में भी ग्रामीणों से पूछा. मुख्यमंत्री का यह दौरा और बस सेवा से किया जाने वाला सफर नारायणपुर जिले में विकास, विश्वास और सुशासन की दिशा में एक सशक्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है. इस बस सेवा के शुरू होने से इन रास्तों के दर्जनों गांवों के लोगों को जिला मुख्यालय तक आने-जाने में राहत मिली है. अब ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधाएं, शैक्षणिक संस्थानों और बाजार तक आसानी से पहुंच पा रहे हैं.
नक्सल प्रभावित इलाके के सुदूर अंचल गांव में आजादी के बाद पहली बार बिजली और बस सेवा पहुंची है। गांव को विकास का एक अहम तोहफा मिला है, जिससे ग्रामीणों में हर्षोल्लास का माहौल है और उनके चेहरों पर एक नई उम्मीद की झलक दिख रही है। यह कदम गांव के लिए न केवल एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, बल्कि समग्र क्षेत्र के विकास की दिशा में भी मील का पत्थर साबित हो रहा है। वहीं, सड़कें बन जाने से भी लोगों को सुविधा हो रही है। हाल ही में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बस्तर अंचल में मोबाइल नेटवर्क से लेकर बैंकिंग सुविधाओं के विस्तार, सुशासन तिहार, संवाद से जनसमस्याओं का त्वरित समाधान, शांति और सुरक्षा के साथ समृद्धि की ओर अग्रसर बस्तर को लेकर जानकारी दी थी। इन योजनाओं से क्षेत्र का विकास हो रहा है। इसी के चलते नक्सली भी धीरे-धीरे ही सही मुख्यधारा में लौटने लगे हैं।
बस सेवा के मार्ग और लाभ
वर्तमान में नारायणपुर जिले में मुख्यमंत्री बस सेवा के अंतर्गत चार बसें संचालित की जा रही हैं, जिनमें से तीन बसें नियद नेल्ला नार मार्गों पर नियमित परिवहन सेवाएं प्रदान कर रही हैं. ये बसें उन क्षेत्रों में आवागमन की सुविधा उपलब्ध करा रही हैं, जो बीते एक दशक से माओवादी उग्रवाद के कारण सार्वजनिक परिवहन से लगभग वंचित रहे थे.
यह बस सेवा सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत संचालित की जा रही है, जिसमें संचालन की जिम्मेदारी एक निजी बस ऑपरेटर को सौंपी गई है, जबकि शासन द्वारा मार्ग निर्धारण और निगरानी की जा रही है. इस पहल का मुख्य उद्देश्य सीमांत जनजातीय समुदायों को विश्वसनीय, सुलभ और सुरक्षित परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना, सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देना तथा क्षेत्र में आवागमन और कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करना है.
नक्सलवाद पीछे छूट रहा है
बिजली और बस सेवाआने से केवल घरों में रोशनी ही नहीं, बल्कि कई दूसरे विकास कार्यों को भी गति मिलेगी। एक स्थानीय निवासी ने बताया कि नक्सलवाद बस्तर के विकास में सबसे बड़ा रोड़ा है, विशेष कर स्वास्थ्य, शिक्षा में। भाजपा सरकार आने के बाद नक्सलवाद पीछे हो गया है। गृह मंत्री अमित शाह का विजन मार्च 2026 तक नक्सलवाद को देश से खत्म करने का है। इसमें बड़ी सफलता भी मिली है।
