रोशनी से पानी और सिंचाई तक :सौर ऊर्जा से बदली गांवों की दिनचर्या, अब रात भी आसान और खेत भी सिंचित - CGKIRAN

रोशनी से पानी और सिंचाई तक :सौर ऊर्जा से बदली गांवों की दिनचर्या, अब रात भी आसान और खेत भी सिंचित


मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सुशासन की पहल से रोशनी, पेयजल और सिंचाई जैसी सुविधाएं.  कभी शाम ढलते ही अंधेरे में सिमट जाने वाले सुकमा के कई गांवों में अब सौर ऊर्जा की रोशनी से रात की दिनचर्या भी आसान हो रही है। क्रेडा जिला कार्यालय ने सुशासन तिहार में मिली शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए खराब सोलर हाईमास्ट संयंत्रों की एलईडी लाइट और बैटरियां बदलकर उन्हें फिर से रोशन किया। इसका असर सीधे ग्रामीण जीवन पर दिखाई दे रहा हैकृअब ग्रामीण शाम के बाद भी जरूरी कामों के लिए आसानी से घर से निकल पा रहे हैं, बच्चों को खेलने और पढ़ने के लिए बेहतर माहौल मिल रहा है तथा महिलाओं, बुजुर्गों और राहगीरों के लिए गांव के चौक-चौराहों से गुजरना अधिक सुविधाजनक हुआ है। रोशनी के कारण सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए भी सार्वजनिक स्थानों का उपयोग बढ़ा है। ग्रामीणों ने इस बदलाव को अपने रोजमर्रा के जीवन में आई महत्वपूर्ण सुविधा बताया है।

नियद नेल्लानार योजना के जरिए सौर ऊर्जा दूरस्थ गांवों में विकास की रोजमर्रा की जरूरत पूरी करने का माध्यम बन रही है। सिलगेर, सालातोंग, टेकलगुडियम, पूवर्ती, बगडेगुड़ा, सुरपनगुड़ा, दुलेड़, मोरपल्ली, मंडीमरका, बेदरे, केरलापेन्दा और तोकनपल्ली सहित विभिन्न ग्रामों एवं नगरीय निकाय क्षेत्रों में 71 सोलर हाईमास्ट संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं, जबकि 8 संयंत्रों की स्थापना प्रगतिरत है। इनसे मिलने वाली रोशनी का लाभ केवल सड़क और चौक तक सीमित नहीं है। रात में बाजार या जरूरी काम से लौटने वाले ग्रामीणों, सार्वजनिक स्थलों पर आने-जाने वाले लोगों और सामुदायिक कार्यक्रमों में शामिल होने वाले परिवारों के लिए यह रोशनी प्रत्यक्ष सुविधा बन गई है। बच्चों और युवाओं को शाम के बाद भी गांव में सुरक्षित माहौल में समय बिताने का अवसर मिल रहा है।

सौर पम्पों ने पानी के लिए होने वाली रोजमर्रा की मेहनत को भी कम करने में मदद की है। जल जीवन मिशन के तहत जिले के विभिन्न गांवों में 672 सोलर पम्प स्थापित किए गए हैं। जिन परिवारों को पहले पेयजल के लिए नदी, झिरिया या कुओं तक जाना पड़ता था, उनके लिए अब गांव में ही सौर ऊर्जा से संचालित पम्प के माध्यम से पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था हुई है। इससे पानी लाने में लगने वाले समय और श्रम की बचत, महिलाओं एवं बच्चों को होने वाली अतिरिक्त मेहनत में कमी तथा दैनिक घरेलू कामों के लिए समय की उपलब्धता जैसी सुविधाएं मिली हैं। दूसरी ओर, सौर सुजला योजना के तहत पिछले आठ वर्षों में 4,300 सोलर पम्प किसानों के खेतों तक पहुंचे हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में मिले 200 पम्पों का लक्ष्य भी पूरा किया गया है। सिंचाई के लिए पानी मिलने से किसानों को खेती के काम को समय पर करने और कृषि गतिविधियों को जारी रखने में सहूलियत मिल रही है।

सुकमा में सौर ऊर्जा अब सिर्फ बिजली का विकल्प नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन को आसान बनाने वाली सुविधा बन रही है। कोन्टा विकासखंड के जगरगुंडा में सोलर स्ट्रीट लाइट स्थापित की गई है, जबकि पोलमपल्ली, चिंतागुफा, चिंतलनार और भेज्जी में 4.8 किलोवाट क्षमता के सोलर स्ट्रीट लाइट संयंत्रों की स्थापना स्वीकृत है। नगरीय निकाय क्षेत्रों में खराब स्ट्रीट लाइटों का सुधार भी जारी है। एक ओर गांव की गलियां और चौक रात मं  रोशन हो रहे हैं, दूसरी ओर घरों तक पानी और खेतों तक सिंचाई पहुंच रही है। यानी सौर ऊर्जा ने ग्रामीणों के लिए समय बचाने, श्रम कम करने, रात की गतिविधियों को आसान बनाने और खेती को सहारा देने वाली सुविधाओं का विस्तार किया है। दूरस्थ अंचलों में हो रहा यह बदलाव लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में सुविधा और आत्मनिर्भरता को नई मजबूती दे रहा है।

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