पोषक तत्वों का खजाना है प्राकृतिक 'डीलवा पुटू'
बारिश की दस्तक के साथ छत्तीसगढ़ के जंगलों से निकलने वाला प्राकृतिक मशरूम ‘पुटू’ एक बार फिर बाजारों की रौनक बन गया है. सावन शुरू होने से पहले ही इसकी जबरदस्त मांग देखने को मिल रही है. बाजार में यह करीब ₹1200 प्रति किलो की कीमत पर बिक रहा है जबकि सीमित उपलब्धता के कारण खरीदारों को इंतजार भी करना पड़ रहा है. पोषक तत्वों से भरपूर इस मौसमी मशरूम को लोग स्वाद के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी बेहद लाभकारी मानते हैं.प्राकृतिक मशरूम पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थ है. इसमें विटामिन बी, विटामिन सी और विटामिन डी भी पाया जाता है. इसके अलावा सेलेनियम, पोटेशियम, कॉपर, आयरन, प्रोटीन, डाइटरी फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स प्रचुर मात्रा में मौजूद होते हैं. नियमित और संतुलित मात्रा में मशरूम का सेवन रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, हृदय को स्वस्थ रखने, वजन नियंत्रित करने और हड्डियों को मजबूत बनाने में मददगार माना जाता है. कम कैलोरी और अधिक फाइबर होने के कारण यह लंबे समय तक पेट भरा रखने में भी सहायक होता है. विक्रेताओं का कहना है कि सावन मास शुरू होते ही इसकी मांग और कीमत दोनों बढ़ सकती हैं. वहीं खरीदारों का कहना है कि साल में कुछ ही दिनों के लिए मिलने वाला यह प्राकृतिक पुटू खाने का मौका वे किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ना चाहते.
बिलासपुर शहर में इन दिनों प्राकृतिक डीलवा पुटू कई जगहों पर बिक रहा है. जवाली पुल के पास इसकी सबसे अधिक बिक्री देखने को मिल रही है. इसके अलावा कलेक्टर ऑफिस के पास, मुंगेली नाका और शहर के अन्य प्रमुख स्थानों पर भी इसकी दुकानें सज गई हैं. सीमित समय के लिए मिलने वाले इस प्राकृतिक मशरूम को खरीदने के लिए लोग सुबह से ही पहुंच रहे हैं.
डीलवा पुटू का सालभर से इंतजार
डीलवा पुटू खरीदने पहुंचे लोगों ने कहा कि यह प्राकृतिक मशरूम बेहद पौष्टिक होता है. इसमें विटामिन, मिनरल और प्रोटीन भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. इसका स्वाद और गुणवत्ता कृत्रिम तरीके से उगाए गए मशरूम से बिल्कुल अलग होती है. आजकल हाइब्रिड मशरूम का चलन बढ़ गया है लेकिन असली प्राकृतिक पुटू की पहचान उसके स्वाद से हो जाती है. उन्होंने कहा कि यह सालभर नहीं मिलता, इसलिए लोग सावन से पहले इसके आने का बेसब्री से इंतजार करते हैं. उनका मानना है कि यह सिकल सेल के मरीजों के लिए भी लाभकारी माना जाता है.
पाली, पंडरिया और अचानकमार के जंगलों से आता है पुटू
विक्रेता दिनेश घोरे ने बताया कि पुटू पाली, पंडरिया और अचानकमार के जंगलों से लाया जाता है. फिलहाल इसकी थोक खरीद कीमत करीब ₹1000 प्रति किलो है, जिसे बाजार में ₹1200 प्रति किलो बेचा जा रहा है. उन्होंने बताया कि अभी प्रतिदिन 10 से 15 किलो पुटू ही उपलब्ध हो पा रहा है जबकि मांग 50 से 60 किलो तक रहती है. पर्याप्त मात्रा नहीं मिलने के कारण बाजार में इसकी कमी बनी हुई है लेकिन आने वाले दिनों में उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है.
बिजली कड़कने के बाद मिट्टी फोड़कर निकलता है पुटू
लोगों में यह भ्रम रहता है कि जिस दीमक के टीले (डीलवा) से पुटू निकलता है, वहां सांप रहते हैं जबकि वास्तव में वह दीमकों का बनाया हुआ आवास होता है. बारिश और तेज बिजली कड़कने के बाद मिट्टी फटती है और उसी के भीतर से प्राकृतिक रूप से पुटू बाहर निकलता है. बाजार में बेचने से पहले इसे कई बार साफ पानी से धोकर अच्छी तरह साफ किया जाता है.
