छत्तीसगढ़ का सबसे महंगा चावल 'जीराफुल' जबरदस्त खुशबू और स्वाद भी लाजवाब
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में कई प्रकार के धान की किस्में लगाई जाती हैं. उनमें से एक है जीराफुल. इस धान की खेती जैविक तरीके से की जाती है. मैनपाट जैसे शानदार जलवायु में जीराफुल की खेती बेहतर उत्पादन देती है और यह किस्म किसानों के बीच काफी लोकप्रिय है. किसान जीराफुल की खेती करके मोटी कमाई कर रहे हैं. धान की खुशबू और स्वाद के पीछे देशी खाद का अहम योगदान होता है. सरगुजा जिले के मैनपाट में उगाया जाने वाला जीराफुल धान अपनी अनोखी खुशबू और स्वाद के कारण प्रदेशभर में प्रसिद्ध है. जैविक तरीके से तैयार होने वाला यह चावल बाजार में 160 से 170 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है, जिससे किसानों को अच्छा लाभ मिल रहा है.
कृषि विशेषज्ञ संजय यादव ने बताया कि जीराफुल धान का दाना जीरे की तरह छोटा होता है, इसलिए इसका नाम जीराफुल रखा गया है. मैनपाट की ठंडी जलवायु और प्राकृतिक वातावरण इसकी खुशबू और स्वाद को अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक बेहतर बनाते हैं.
संजय यादव ने कहा कि मैनपाट की प्राकृतिक जलवायु और मौसम के कारण यहां पैदा होने वाले जीराफुल धान में विशेष खुशबू और स्वाद आता है. यही वजह है कि मैनपाट का जीराफुल चावल उपभोक्ताओं की पहली पसंद बनता जा रहा है और किसानों को भी इसका बेहतर मूल्य मिल रहा है.
संजय ने बताया कि जीराफुल धान लंबी अवधि की फसल है, जो लगभग 140 से 145 दिनों में पककर तैयार होती है. बेहतर उत्पादन के लिए ऐसे खेत का चयन करना चाहिए, जहां लंबे समय तक पानी उपलब्ध रह सके. नर्सरी तैयार होने के 20 से 25 दिन बाद पौधों की रोपाई करना सबसे उपयुक्त माना जाता है.
स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है जीराफूल चावल
बता दें कि जीराफूल चावल स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद होता है. दरअसल, ये चावल अन्य चावलों की तुलना में जल्दी और आसानी से पचता है. इसलिए इस चावल की डिमांड ना सिर्फ भारत में है, बल्कि विदेशों से भी इसकी मांग की जाती है.
जैविक खेती से बढ़ती है गुणवत्ता और मुनाफा
कृषि विशेषज्ञ के अनुसार, खेत में ढैंचा, सनई और मूंग जैसी हरी खाद का उपयोग करने के बाद रोपाई करनी चाहिए. साथ ही गोबर की खाद और वर्मी कम्पोस्ट का प्रयोग करने से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और चावल की गुणवत्ता भी बेहतर होती है.
