अविश्वास प्रस्ताव पर विश्वास की विजय: 14 घंटे की चर्चा के बाद गिरा अविश्वास प्रस्ताव, सीएम साय बोले- जनता के विश्वास का अपमान है ये प्रस्ताव - CGKIRAN

अविश्वास प्रस्ताव पर विश्वास की विजय: 14 घंटे की चर्चा के बाद गिरा अविश्वास प्रस्ताव, सीएम साय बोले- जनता के विश्वास का अपमान है ये प्रस्ताव


छत्तीसगढ़ विधानसभा में कांग्रेस के लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर जोरदार बहस हुई। अविश्वास प्रस्ताव पर विधानसभा में 14 घंटे से ज्यादा समय तक बहस चली। इस दौरान विधानसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि आज सदन में अविश्वास प्रस्ताव पर बहस हुई, जो 14 घंटे से ज्यादा चली और इसमें 151 पन्नों में 136 आरोपों पर चर्चा हुई। छत्तीसगढ़ विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का जो रूप सामने आया, उसने न केवल राजनीतिक विश्लेषकों को चौंकाया, बल्कि राज्य की सियासत में नेतृत्व की एक नई और बेहद मजबूत परिभाषा भी लिख दी। अमूमन अपनी सादगी, सौम्यता और बेहद सरल स्वभाव के लिए पहचाने जाने वाले मुख्यमंत्री साय के इन तल्ख तेवरों ने विरोधियों को स्पष्ट संदेश दे दिया कि शालीनता उनकी कमजोरी नहीं, बल्कि उनका आभूषण है। जब बात जनता के जनादेश और  सरकार के आत्मसम्मान की आती है, तो वे फ्रंट फुट पर आकर पूरी आक्रामकता के साथ बल्लेबाजी करना भी जानते हैं। सदन में उनके इस बदले अंदाज ने सत्ता पक्ष के भीतर जहां एक नए उत्साह का संचार किया, वहीं विपक्ष को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया।

अविश्वास प्रस्ताव के गिरने के साथ पांच दिवसीय मानसून सत्र का समापन भी हो गया। सत्ता पक्ष ने किसानों, आदिवासियों, युवाओं और महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार की कथित विफलताओं को लेकर कांग्रेस के 136 सूत्री आरोपपत्र को खारिज कर दिया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय समेत कुल 17 विधायकों ने चर्चा में भाग लिया जो शुक्रवार दोपहर बाद शुरू हुई और देर रात करीब ढाई बजे समाप्त हुई।

संसदीय लोकतंत्र में अविश्वास प्रस्ताव भले ही विपक्ष का एक संवैधानिक अधिकार हो, लेकिन मुख्यमंत्री ने अपने सारगर्भित और तीखे भाषण से इसे विपक्ष की राजनीतिक हताशा और नैतिक पराजय के दस्तावेज़ में तब्दील कर दिया। उन्होंने अपने पूरे वक्तव्य में सिर्फ आरोपों के जवाब नहीं दिए, बल्कि अपनी सरकार की उपलब्धियों का ऐसा ठोस रिपोर्ट कार्ड पेश किया, जिसकी बुनियाद जनता के अटूट भरोसे पर टिकी है। मुख्यमंत्री ने बेहद चतुराई और तार्किकता के साथ इस अविश्वास प्रस्ताव को सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की तीन करोड़ जनता के फैसले का अपमान करार दिया। हालिया विधानसभा चुनाव में मिले स्पष्ट बहुमत, लोकसभा चुनाव में ग्यारह में से दस सीटों पर मिली प्रचंड जीत और नगरीय निकाय चुनावों में भाजपा के पक्ष में आए नतीजों का हवाला देकर उन्होंने विपक्ष को यह आईना दिखाया कि अविश्वास वास्तव में जनता का सरकार पर नहीं, बल्कि खुद विपक्ष पर है, जिसे जनता बार-बार नकार चुकी है।

जनकल्याणकारी योजनाओं और आंकड़ों से विपक्ष को घेरा

सीएम साय का यह आक्रामक अंदाज केवल राजनीतिक बयानों तक सीमित नहीं था, बल्कि वह जमीनी आंकड़ों और जनकल्याण की ताकतों से पूरी तरह लैस था। उन्होंने कांग्रेस को घेरते हुए बेहद सीधे और मर्मभेदी सवाल दागे। उन्होंने पूछा कि विपक्ष का यह अविश्वास आखिर किस पर है? क्या उन पच्चीस लाख किसानों पर है, जिन्हें इकतीस सौ रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी का ऐतिहासिक लाभ मिल रहा है, या उन सत्तर लाख से अधिक माताओं-बहनों पर है, जिन्हें महतारी वंदन योजना के तहत हर महीने उनके खातों में सम्मान राशि मिल रही है? लोक-कल्याणकारी योजनाओं को अपनी ढाल और प्रहार का माध्यम बनाकर मुख्यमंत्री ने यह साबित कर दिया कि वे अपनी सरकार के काम की जमीनी ताकत को बखूबी पहचानते हैं।

छत्तीसगढ़ की राजनीति में मजबूत नेतृत्व का संदेश

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश यही है कि छत्तीसगढ़ को विष्णुदेव साय के रूप में एक ऐसा परिपक्व नेतृत्व मिल चुका है, जो खामोशी से काम करना भी जानता है और वक्त आने पर विरोधियों को उनकी राजनीतिक जमीन याद दिलाना भी जानता है। पाँच वर्षों के पूर्ववर्ती शासन की कमियों और अपनी सरकार के सुशासन के अंतर को उन्होंने जिस बेबाकी से रेखांकित किया, उसने यह साफ कर दिया कि उनकी सरकार विकास के एजेंडे से पीछे हटने वाली नहीं है। विधानसभा में मुख्यमंत्री का यह बुलंद आत्मविश्वास और आक्रामक राजनीतिक तेवर छत्तीसगढ़ के भविष्य के लिए एक बेहद सकारात्मक संकेत है, जो यह भरोसा दिलाता है कि राज्य का नेतृत्व एक दृढ़ इच्छाशक्ति वाले राजनेता के हाथों में सुरक्षित है।

जनता का विश्वास खो चुकी है कांग्रेस'

उन्होंने कहा कि कांग्रेस जनता का विश्वास पहले ही खो चुकी है। जनता ने पाँच वर्षों तक उनके शासन को परखा और सत्ता से बाहर कर दिया। आज वही कांग्रेस जनता द्वारा चुनी गई सरकार पर अविश्वास जताकर अपनी राजनीतिक हताशा और नैतिक पराजय का परिचय दे रही है। उनकी सरकार का ढाई वर्षों का प्रत्येक दिन माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी को धरातल पर उतारने के लिए समर्पित रहा है। सरकार ने चुनाव के दौरान किए गए अधिकांश प्रमुख वादों को पूरा किया है और विकास तथा सुशासन को प्राथमिकता देते हुए हर वर्ग तक योजनाओं का लाभ पहुँचाया है।

गिनाई सरकार की उपलब्धियां

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने सत्ता में आते ही किसानों के हित में ऐतिहासिक निर्णय लिए। लगभग 25 लाख किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की गई। दो वर्षों के बकाया बोनस के रूप में 3716 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। सिंचाई क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जहाँ पिछली सरकार के कार्यकाल में प्रतिवर्ष औसतन लगभग 9,600 हेक्टेयर सिंचाई क्षमता बढ़ी, वहीं वर्तमान सरकार के कार्यकाल में यह बढ़कर लगभग 19,500 हेक्टेयर प्रतिवर्ष हो गई है। केवल दो वर्षों में 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक की सिंचाई परियोजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति दी गई। मनरेगा के साथ-साथ वीबी-जी रामजी योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण को नई गति मिली है। अटल पंचायत डिजिटल सुविधा केंद्रों के माध्यम से ग्रामीण नागरिकों को बैंकिंग, प्रमाण पत्र, पेंशन सहित अनेक सेवाएँ गाँव में ही उपलब्ध हो रही हैं। हस्तशिल्प और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने के लिए देश के प्रमुख हवाई अड्डों पर छत्तीसगढ़ के उत्पादों के शोरूम स्थापित किए जा रहे हैं। महिला सशक्तिकरण को सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धियों में बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि महतारी वंदन योजना के अंतर्गत अब तक 70 लाख महिलाओं को 18 हजार 800 करोड़ रुपये से अधिक की सम्मान राशि प्रदान की जा चुकी है। प्रदेश में 10 लाख 40 हजार से अधिक महिलाओं को लखपति दीदी बनाया गया है। महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन को प्रोत्साहित करने के लिए रजिस्ट्री शुल्क में 50 प्रतिशत तथा स्टाम्प शुल्क में एक प्रतिशत की छूट दी गई है, जिससे महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और स्वामित्व दोनों मजबूत हुए हैं।

आदिवासी विकास से नक्सलवाद के खात्मे तक कार्य

सीएम साय ने विधानसभा में कहा कि पिछली सरकार ने वर्षों तक आदिवासियों के नाम पर राजनीति की, लेकिन उन्हें बुनियादी सुविधाओं और विकास से वंचित रखा। उनकी सरकार ने जनजातीय अंचलों में विश्वास, विकास और सुरक्षा-तीनों को साथ लेकर काम किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि तेंदूपत्ता संग्राहकों का पारिश्रमिक 4 हजार रुपये से बढ़ाकर 5 हजार 500 रुपये प्रति मानक बोरा किया गया। पूर्व में बंद की गई चरणपादुका योजना को पुनः प्रारंभ किया गया। वनाधिकार पत्रधारकों के नामांतरण जैसी वर्षों पुरानी समस्याओं का समाधान कर जनजातीय परिवारों को राहत दी गई। दिल्ली स्थित ट्राइबल यूथ हॉस्टल में सीटों की संख्या 50 से बढ़ाकर 200 की गई, जिसका सकारात्मक परिणाम सामने आया है। हाल ही में जनजातीय वर्ग के 13 युवाओं ने संघ लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण कर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है।

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