मानसून की चाल थमी...उमस से बेहाल छत्तीसगढ़, किसानों की बढ़ी चिंता!
छत्तीसगढ़ में मानसून के दस्तक देने से पहले मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है। एक ओर प्रदेश के कई हिस्सों में तेज गर्मी और उमस लोगों की परेशानी बढ़ा रही है, तो दूसरी तरफ कुछ जिलों में बारिश और तेज हवाओं की गतिविधियां देखने को मिल रही हैं। प्रदेश में मानसून की दस्तक को लेकर मौसम विभाग की भविष्यवाणियां लगातार बदल रही हैं। पहले मानसून के 12 जून तक पहुंचने का अनुमान जताया था, बाद में इसे बढ़ाकर 18 जून तक बताया गया, लेकिन अब ताजा मौसम बुलेटिन में मानसून आगमन की कोई निश्चित तारीख ही नहीं दी गई है। मौसम विभाग केवल इतना कह रहा है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं। ऐसे में लोगों के बीच सवाल उठने लगा है कि आखिर मानसून कहां अटक गया है।
मौसम विभाग का कहना है कि प्रदेश में फिलहाल प्री-मानसून गतिविधियां सक्रिय बनी रहेंगी। अगले दो दिनों तक भी एक-दो स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश, गरज-चमक के साथ वज्रपात और 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। ऐसे में मानसून के आगमन से पहले छत्तीसगढ़ के लोगों को गर्मी और बारिश, दोनों तरह के मौसम का सामना करना पड़ सकता है।
उमस और गर्री बरकरार
प्रदेश में उमस और गर्मी का असर लगातार बना हुआ है। बुधवार को रायपुर का अधिकतम तापमान 38.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो सामान्य से 3.2 डिग्री अधिक रहा। वहीं न्यूनतम तापमान भी सामान्य से 3.5 डिग्री ज्यादा रिकार्ड हुआ। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से पर्याप्त नमी नहीं मिलने तथा मानसूनी सिस्टम की धीमी गति के कारण छत्तीसगढ़ में मानसून की रफ्तार थम गई है। हालांकि प्रदेश के कुछ हिस्सों में प्री-मानसून गतिविधियां जारी हैं और अगले पांच दिनों तक हल्की से मध्यम बारिश, मेघगर्जन और तेज हवा चलने की संभावना बनी हुई है।
सिस्टम सक्रिय, लेकिन मानसून की चाल सुस्त
मौसम विभाग के अनुसार पंजाब से बिहार तक मौसमी द्रोणिका बनी हुई है। इसके अलावा पूर्वी उत्तर प्रदेश से तेलंगाना होते हुए दक्षिण तटीय आंध्र प्रदेश तक एक अन्य द्रोणिका सक्रिय है। पूर्वी विदर्भ और दक्षिण छत्तीसगढ़ के ऊपर ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण भी बना हुआ है। इन सिस्टमों के कारण प्रदेश में बादल, गरज-चमक और बौछारें तो हो रही हैं, लेकिन मानसून की मुख्य रेखा तेजी से आगे नहीं बढ़ पा रही है। मौसम विभाग अब सतर्क भाषा में केवल परिस्थितियां अनुकूल बता रहा है।
रायपुर समेत कई जिलों में उमस और बारिश
प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। दुर्ग जिले में सबसे अधिक 30 मिलीमीटर वर्षा हुई। जशपुरनगर, मनेन्द्रगढ़, मनोरा, केल्हारी और वाड्रफनगर में भी बारिश रिकार्ड की गई। जगदलपुर में शाम के समय आद्रता 92 प्रतिशत तक पहुंच गई, जिससे लोगों को भारी उमस का सामना करना पड़ा। रायपुर में भी दिनभर बादलों की आवाजाही और उमस बनी रही। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे के दौरान प्रदेश के एक-दो स्थानों पर 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा और वज्रपात की चेतावनी जारी की है।
किसान और आम लोग मानसून की बढ़ती देरी से परेशान
मानसून की देरी का असर अब खेती-किसानी की तैयारियों पर भी दिखने लगा है। कई जिलों में किसान बारिश का इंतजार कर रहे हैं ताकि धान की बुआई शुरू की जा सके। दूसरी ओर लगातार उमस और गर्मी से शहरों में लोगों की परेशानी बढ़ रही है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों में मानसूनी गतिविधियों में तेजी आ सकती है, लेकिन फिलहाल किसी निश्चित तारीख को लेकर स्पष्ट संकेत नहीं दिए गए हैं।
