आंखों की रोशनी खोकर हौसले रहे बुलंद, शिवांगी ने हासिल की सूचना संचार में तकनीकी योग्यता - CGKIRAN

आंखों की रोशनी खोकर हौसले रहे बुलंद, शिवांगी ने हासिल की सूचना संचार में तकनीकी योग्यता


जिले के गेवरा बस्ती की दृष्टिबाधित दिव्यांग युवती शिवांगी आज उन लोगों के लिए प्रेरणा बन चुकी है, जो जीवन की कठिन परिस्थितियों के सामने हार मान लेते हैं। बचपन में सामान्य बच्चों की तरह पढ़ाई शुरू करने वाली शिवांगी को क्या पता था कि बढ़ती उम्र के साथ उसकी आंखों की रोशनी धीरे-धीरे हमेशा के लिए धुंधली होती चली जाएगी।कम उम्र में शुरू हुआ यह संघर्ष समय के साथ और कठिन होता गया, लेकिन शिवांगी का हौसला कभी नहीं टूटा। दसवीं की परीक्षा उसने सहयोगी लेखक की मदद से पास की, लेकिन इसके बाद आगे की राह और कठिन हो गई। परिवार की आर्थिक स्थिति उसके सपनों के सामने बड़ी बाधा बन रही थी, फिर भी उसने हार नहीं मानी।शिवांगी ने रायपुर जाकर कंप्यूटर प्रशिक्षण प्राप्त किया। वहां उसने एमएस आफिस, पावर पाइंट, एक्सेल सहित अन्य तकनीकी कार्य सीखे। साथ ही एनबीडीए साफ्टवेयर की मदद से कमांड सुनकर कंप्यूटर चलाने का प्रशिक्षण भी हासिल किया।

आंखों की रोशनी भले चली गई हो, लेकिन उसके भीतर आगे बढ़ने का उजाला लगातार मजबूत होता गया। अपनी संघर्षपूर्ण कहानी और आत्मनिर्भर बनने की इच्छा लेकर शिवांगी जनदर्शन में कलेक्टर कुणाल दुदावत के पास पहुंची। उसने स्वरोजगार शुरू करने के लिए कंप्यूटर की मांग रखी। कलेक्टर दुदावत ने उसकी लगन और आत्मविश्वास को देखते हुए तत्काल मदद का आश्वासन दिया। जल्द ही यह आश्वासन हकीकत में बदल गया और शिवांगी को कम्प्यूटर सेट प्रदान किया गया।

आज यह कंप्यूटर शिवांगी के लिए केवल एक मशीन नहीं, बल्कि नई जिंदगी की नई शुरुआत बन गया है। वह अब प्रिंटिंग से जुड़ा काम शुरू कर आत्मनिर्भर बनने की तैयारी कर रही है। शिवांगी की मां राजेश्वरी सारथी ने कहा कि वर्षों से बेटी और बेटे की बीमारी को लेकर परिवार चिंतित था, लेकिन अब उन्हें भरोसा है कि उनकी बेटी अपने पैरों पर खड़ी हो सकेगी। उन्होंने कलेक्टर का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी फरियाद सुनी गई और बेटी को नई दिशा मिली। शिवांगी ने भी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि कंप्यूटर मिलने से अब वह अपना छोटा व्यवसाय शुरू कर सकेगी।

शिवांगी की कहानी यह साबित करती है कि इंसान की आंखें भले देखना बंद कर दें, लेकिन उसका हौसला कभी अंधा नहीं होता। उसके साहस, सीखने की जिद और आत्मनिर्भर बनने की चाह हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है, जो कठिनाइयों के कारण अपने सपनों से दूर हो जाता है। इस अवसर पर समाज कल्याण विभाग के अधिकारी हरीश सक्सेना एवं मुकेश दिवाकर भी उपस्थित रहे।

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