महिला सशक्तीकरण की मिसाल प्रधानमंत्री रोजगार सृजन से लाखों कमाती महिलाएं - CGKIRAN

महिला सशक्तीकरण की मिसाल प्रधानमंत्री रोजगार सृजन से लाखों कमाती महिलाएं


उचित मार्गदर्शन और संसाधनों की कमी के कारण अक्सर युवा वर्ग व्यवसाय की ओर कदम बढ़ाने से हिचकिचाता है, कई बार आर्थिक तंगी और निराशा भी उनके सपनों के बीच बाधा बन जाती है, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो कठिन परिस्थितियों में भी हार नहीं मानते और अपने संकल्प से सफलता की नई कहानी लिखते हैं, ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है जांजगीर-चांपा जिले के बलौदा विकासखंड के ग्राम कुरदा की रहने वाली रुकसार बानो की, जिन्होंने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) योजना का लाभ लेकर अपना मसाला उद्योग शुरू किया और आज खुद आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ अन्य महिलाओं को भी रोजगार दे रही हैं.

ग्राम कुरदा निवासी रुकसार बानो एक मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखती हैं, उन्होंने वाणिज्य विषय में स्नातकोत्तर तक की पढ़ाई की है, पढ़ाई के दौरान ही उनके मन में स्वयं का व्यवसाय शुरू करने का विचार आया, लेकिन आर्थिक संसाधनों की कमी उनके लिए बड़ी चुनौती थी, इसी दौरान उन्हें जिला खादी एवं ग्रामोद्योग केंद्र जांजगीर-चांपा के माध्यम से संचालित प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) योजना की जानकारी मिली, इस योजना के तहत स्वरोजगार शुरू करने के लिए ऋण और अनुदान की सुविधा मिलती है, रुकसार बानो ने योजना की पूरी जानकारी जुटाई और जिला खादी ग्रामोद्योग केंद्र के अधिकारियों के मार्गदर्शन में मसाला एवं फूड प्रोसेसिंग उद्योग स्थापित करने के लिए परियोजना तैयार की, करीब 10 लाख रुपए की परियोजना तैयार कर उन्होंने यूनियन बैंक, चांपा में आवेदन किया, बैंक द्वारा उनका ऋण स्वीकृत किया गया, जिसमें उन्हें 10 लाख रुपए का लोन मिला और साथ ही 3 लाख 50 हजार रुपए की सब्सिडी भी प्रदान की गई, इसके बाद उन्होंने “एमएमटी फूड्स” नाम से अपना मसाला उद्योग शुरू किया.

रुकसार बानो बताती हैं कि पहले वे एक गृहिणी थीं, लेकिन बढ़ती महंगाई के दौर में उन्होंने और उनके पति ने मिलकर व्यवसाय शुरू करने का निर्णय लिया, उनका सपना था कि वे खाद्य उद्योग के क्षेत्र में काम करें और लोगों को शुद्ध एवं प्रिजर्वेटिव फ्री मसाले उपलब्ध कराएं, उनका मानना है कि भोजन की गुणवत्ता और स्वास्थ्य के साथ कोई समझौता नहीं होना चाहिए. उन्होंने बताया कि अभी उनके व्यवसाय को शुरू हुए एक साल भी पूरा नहीं हुआ है, लेकिन धीरे-धीरे उनकी मार्केटिंग बढ़ रही है और उनके उत्पादों की मांग भी बढ़ने लगी है, उनका उद्देश्य है कि आने वाले समय में वे अपने व्यवसाय को और विस्तार दें और अधिक से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध कराएं.आज उनके इस छोटे से उद्योग में करीब 5 से 6 स्थानीय महिलाओं को प्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है, यहां काम करने वाली सुलोचनी बाई पटेल बताती हैं कि इस काम से मिलने वाली आय से उनके घर का खर्च चलाने में मदद मिलती है और बच्चों की पढ़ाई-लिखाई भी बेहतर तरीके से हो पा रही है.

जिला खादी ग्रामोद्योग केंद्र की सहायक संचालक सरिता जैथवार ने बताया कि प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत रुकसार बानो को 10 लाख रुपए का ऋण और 3 लाख 50 हजार रुपए की सब्सिडी दी गई है, उन्होंने अपने मसाला उद्योग के माध्यम से न केवल अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है, बल्कि अन्य महिलाओं को भी रोजगार देकर महिला सशक्तिकरण की एक नई मिसाल पेश की है, आज रुकसार बानो की कहानी उन महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई है, जो खुद को केवल गृहिणी तक सीमित समझती हैं, उनका मानना है कि यदि सही मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं का लाभ मिले, तो महिलाएं भी आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार और समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं.

Previous article
Next article

Articles Ads

Articles Ads 1

Articles Ads 2

Advertisement Ads