बस्तर में लाल आतंक का सूर्यास्त, नक्सल मुक्त अभियान के लिए बड़ी सफलता
इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान के घने जंगलों से मंगलवार को निकल कर आ रही तस्वीर बस्तर के इतिहास का रुख बदलने वाली सिद्ध हो रही है। पश्चिम बस्तर डिवीजन का सचिव और दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (डीकेएसजेडसी) का प्रभावशाली सदस्य 25 लाख रुपये का इनामी शीर्ष माओवादी कमांडर पापाराव अब आत्मसमर्पण के लिए बाहर आ चुका है। छत्तीसगढ़ से नक्सल खात्मे की तय डेडलाइन 31 मार्च 2026 से करीब एक सप्ताह पहले खूंखार नक्सली पापाराव ने मंगलवार को पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया। उसने आधुनिक हथियार एके-47 के साथ पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया। हालांकि आधिकारिक तौर पर पुलिस ने सरेंडर की पुष्टि नहीं की है। उसके साथ डीकेएसजेडसी सदस्य डिविजनल कमेटी सदस्य (डीवीसीएम) प्रकाश माड़वी, डीवीसीएम अनिल ताती सहित 17 माओवादी भी हथियारों सहित समर्पण की राह पर हैं। इनमें सात महिला सदस्य भी शामिल हैं।
35 वर्षों का सफर और नेतृत्व का अंत
सुकमा जिले के नीलामड़गू गांव का रहने वाला पापाराव पिछले 35 वर्षों से माओवादी संगठन में सक्रिय रहा है। प्रदेश में शीर्ष नेतृत्व के लगातार खत्म होने के बाद वह इकलौता डीकेएसजेडसी स्तर का माओवादी बचा था। उसके समर्पण के साथ ही छत्तीसगढ़ में सशस्त्र माओवाद के नेतृत्व का अंत लगभग तय माना जा रहा है। मंगलवार सुबह बस्तर के यूट्यूबर पत्रकार रानू तिवारी के साथ इंद्रावती क्षेत्र से पापाराव और अन्य माओवादियों की पहली तस्वीर सामने आई।
केंद्र सरकार ने देश को नक्सल मुक्त बनाने का 31 मार्च 2026 तक लक्ष्य रखा है. पिछले दो साल में कई बड़े नक्सलियों को सुरक्षाबलों ने एनकाउंटर में ढेर भी किया है. इसके अलावा राज्य सरकारें नक्सल पुनर्वास नीति भी चला रही हैं, जिससे कि नक्सली खुद को सुरक्षाबलों के सामने समर्पण कर मुख्यधारा में लौट सकते हैं. इसका बड़ा लाभ सरकार को मिल रहा है.
सुरक्षा बलों की निगरानी में समर्पण की प्रक्रिया
रानू तिवारी ने बताया कि सभी माओवादी समर्पण के लिए निकल चुके हैं। उन्हें सुरक्षित लाने के लिए सुरक्षा बल की टीम जंगल के भीतर रवाना हो चुकी है। सूत्रों के अनुसार सभी माओवादी दोपहर तीन बजे बीजापुर जिले के कुटरू थाने में पहुंच चुके थे। उन्हें बीजापुर में सुरक्षित स्थान पर रखा गया है। बुधवार को सभी माओवादी बस्तर आइजी सुंदरराज पी. के समक्ष आत्मसमर्पण करेंगे।
अब नाम बचे हैं, असर नहीं
बस्तर में माओवादी संगठन अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। विज्जा हेमला, सोढ़ी केशा जैसे कुछ नाम जरूर शेष हैं, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार इनकी सक्रियता लगभग समाप्त हो चुकी है। अधिकांश कैडर या तो पड़ोसी राज्यों की ओर भाग चुके हैं या हथियार छोड़कर गांव लौट आए हैं।
दो साल में बिखर गया ‘रेड कमांड’
पिछले दो वर्षों में सुरक्षा बलों की सटीक रणनीति और इंटेलिजेंस के चलते माओवादी संगठन की कमर टूट चुकी है। माओवादी बसव राजू, गुडसा उसेंडी, कोसा, हिड़मा, सुधाकर और चलपति जैसे बड़े कमांडर मारे गए। वहीं, भूपति, देवजी, मल्लाजी रेड्डी, रुपेश, सोढ़ी देवा और सुजाता जैसे शीर्ष नेताओं के समर्पण के साथ 2700 से अधिक कैडर हथियार छोड़ चुके हैं। इसी अवधि में 1800 से ज्यादा माओवादी गिरफ्तार किए गए हैं।
नक्सलियों का रणनीतिकार है पापा राव
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, पापा राव को लेने के लिए पुलिस बल की टीम इंद्रावती नेशनल पार्क क्षेत्र के एक गोपनीय स्थान के लिए रवाना हो चुकी है। पापा राव लंबे समय से नक्सलियों का रणनीतिकार रहा है। वह कई बड़े नक्सली वारदात में शामिल रहा है। जिनमें कुटरू-बेदरे रोड पर हुआ आईईडी ब्लास्ट भी शामिल है। इसमें आठ जवान वीरगति को प्राप्त हुए थे। इस हमले का मास्टरमाइंड पापा राव को माना जाता है। इसके साथ ही एंबुश लगाने और फोर्स पर हमले की रणनीति बनाने में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। उसकी पत्नी उर्मिला भी पीएलजीए बटालियन की सदस्य थी, वह एक मुठभेड़ में मारी गई थी।
