जी-राम-जी योजना से खिली मजदूरों के चेहरे पर मुस्कान - CGKIRAN

जी-राम-जी योजना से खिली मजदूरों के चेहरे पर मुस्कान


छत्तीसगढ़  में रोजगार गारंटी योजना के तहत काम कर रहे मजदूरों की ज़िंदगी अब बदलती हुई नजर आ रही है. भारत सरकार की विकसित भारत जी-राम-जी योजना मजदूरों के लिए राहत की नई किरण बनकर सामने आई है. छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में विकसित भारत जी-राम-जी योजना के तहत मजदूरों की ज़िंदगी में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. रोजगार के दिन 100 से बढ़ाकर 125 कर दिए गए हैं और मजदूरी का भुगतान पूरी तरह पारदर्शी हो गया है. पहले जहां मजदूरों को सीमित दिनों का रोजगार और भुगतान में देरी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता था, वहीं अब रोजगार की अवधि को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है. इतना ही नहीं, मजदूरी भुगतान की प्रक्रिया को भी पूरी तरह पारदर्शी बनाया गया है. अब मजदूरों की हाजरी सुबह-शाम ऑनलाइन माध्यम से मोबाइल ऐप के जरिए अपलोड की जा रही है, जिससे भुगतान से जुड़ी गड़बड़ियों पर रोक लगी है. मजदूरी की राशि सीधे मजदूरों के बैंक खाते में ट्रांसफर की जा रही है, जिससे उन्हें अब दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते. लोकल 18 की टीम ने जब ज़मीनी स्तर पर मजदूरों से बातचीत की, तो उन्होंने बताया कि यह योजना उनके लिए मील का पत्थर साबित हो रही है. मजदूरों का कहना है कि जो लोग अभी तक इस योजना से नहीं जुड़े हैं, वे भविष्य में पछताएंगे. समय पर भुगतान, ज्यादा काम के दिन और सीधी बैंक ट्रांसफर सुविधा से उनकी आर्थिक स्थिति में साफ सुधार देखने को मिल रहा है.

सीधे खाते में भुगतान से खत्म हुई परेशानी- पहले भुगतान को लेकर दिक्कतें होती थीं, लेकिन अब मजदूरी की राशि सीधे बैंक खाते में आ जाती है. इससे समय पर पैसा मिल रहा है और रोजमर्रा की जरूरतें आसानी से पूरी हो पा रही हैं.  जिन लोगों का नाम अभी योजना में नहीं जुड़ा है और जो बेरोजगार हैं, उनके लिए यह योजना बेहद लाभदायक है। उन्होंने कहा कि जो लोग इसका लाभ नहीं लेंगे, वे भविष्य में पछताएंगे.

सीईओ ने बताया कि कार्यों का चयन अब अधिक सुगम और उपयोगी ढंग से किया जा रहा है. जो विकास कार्य पहले मनरेगा में सीमित थे, अब उन्हें विकसित भारत योजना के माध्यम से और बेहतर तरीके से किया जा रहा है. कुबेर सिंह ने बताया कि भुगतान प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है और मजदूरी की राशि सीधे मजदूरों के बैंक खातों में भेजी जा रही है. वर्तमान में ₹261 प्रतिदिन मजदूरी दी जा रही है और हर वर्ष मार्च के बाद दरों में बढ़ोतरी की जाती है. आने वाले समय में मजदूरी और बढ़ने की उम्मीद है.

ऑफलाइन से ऑनलाइन हुई हाजिरी

मजदूर दिलीप यादव ने बताया कि पहले मजदूरों की हाजिरी ऑफलाइन होती थी और मास्टर रोल हाथ से भरा जाता था, जिससे कई बार परेशानी और गड़बड़ी होती थी. लेकिन अब ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम लागू कर दिया गया है. मजदूरों की हाजिरी मोबाइल ऐप के जरिए सुबह और शाम दर्ज की जाती है, जिससे कार्य प्रणाली में पारदर्शिता आई है.

100 से बढ़कर 125 दिन का रोजगार

मजदूर ने बताया कि पहले एक जॉब कार्डधारी को 100 दिनों का रोजगार मिलता था, लेकिन अब विकसित भारत–जी राम जी योजना के तहत इसे बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है. इससे मजदूरों को अधिक समय तक काम और आय का अवसर मिल रहा है.

मजदूरी दर में बढ़ोतरी से राहत

वर्तमान में मजदूरों को ₹261 प्रतिदिन की दर से मजदूरी दी जा रही है. दिलीप यादव ने बताया कि पहले मजदूरी कम थी, लेकिन अब हर वर्ष 1 अप्रैल से ₹10 से ₹15 तक की बढ़ोतरी की जाती है, जिससे मजदूरों को महंगाई से कुछ राहत मिलती है.



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