बस्तर पंडुम-2026 : राष्ट्रपति ने किया उत्सव का शुभारंभ
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बस्तर पंडुम कार्यक्रम का शुभारंभ किया. राष्ट्रपति ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी सम्मानीय जनप्रतिनिधियों और बस्तरवासियों को धन्यवाद ज्ञापित किया. राष्ट्रपित द्रौपदी मुर्मू ने मां दंतेश्वरी का जयकारा लगाकर अपने भाषण की शुरुआत की. राष्ट्रपति ने कहा कि बस्तर पंडुम में उपस्थित होकर मुझे हार्दिक प्रसन्नता हो रही है. मुझे मां दंतेश्वरी के क्षेत्र में आने का अवसर मिला.इसे मैं अपना सौभाग्य मानती हूं. मैं यहां पर आए लोगों का स्वागत करती हूं. मुझे लगता है कि 5 हजार से ज्यादा बच्चियों ने समारोह में हमारा स्वागत किया,उनकी मैं आभारी हूं. यहां की संस्कृति की भव्यता मुझे दिखाई देती है.यहां के लोगों को मैं नमन करती हूं. मैं जब भी छत्तीसगढ़ आती हूं तो मुझे लगता है कि मैं अपने घर आई हूं. यहां से जो मुझे स्नेह मिलता है वो अनुपम हैं. ये वो धरती है जहां के वीरों ने अपने प्राण न्योछावर करके इसे बचाया है.बस्तर की देवी मां दंतेश्वरी ने इसे अपने हाथों से बनाया है.मुझे यहां का आतिथ्य,कल्चर और संस्कृति देखने को मिला. छत्तीसगढ़ भारत के मानचित्र में पिछड़ा माना जाता था.लेकिन ये स्थल संस्कृति से परिपूर्ण है.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बस्तर में दशकों तक चले नक्सलवाद का जिक्र करते हुए कहा कि हिंसा के कारण आदिवासी समाज को लंबे समय तक नुकसान उठाना पड़ा. लेकिन अब बस्तर नक्सल मुक्त होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. बड़ी संख्या में नक्सली आत्मसमर्पण कर रहे हैं और विकास का रास्ता खुल रहा है. उन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वालों का स्वागत किया और लोगों से भटकाने वाली बातों से दूर रहने की अपील की. राष्ट्रपति का यह संदेश बस्तर के सामाजिक बदलाव और लोकतांत्रिक भरोसे का मजबूत संकेत माना जा रहा है. राष्ट्रपति ने कहा कि छत्तीसगढ़ वीरों की धरती है, जहां के लोगों ने देश की रक्षा में बलिदान दिए हैं. उन्होंने बस्तर पंडुम को आयोजन नहीं, बल्कि उत्सव बताया. राष्ट्रपति ने कहा कि बस्तर की संस्कृति और सुंदरता पर्यटकों को आकर्षित करती है और यहां की प्राकृतिक संपदा अनमोल है. उन्होंने कहा कि गांव-गांव स्कूल, सड़क, बिजली और पानी की सुविधाएं पहुंच रही हैं. यह बदलाव शांति और विकास का प्रमाण है.
राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने भी दिया संबोधन
राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि बस्तर पंडुम 2026 के शुभारंभ अवसर पर यहां मौजूद होना गर्व की बात है. उन्होंने ढोकरा शिल्प को बस्तर की वैश्विक पहचान बताया. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि मां दंतेश्वरी की भूमि पर राष्ट्रपति का आगमन पूरे छत्तीसगढ़ के लिए सम्मान का क्षण है. उन्होंने कहा कि बस्तर पंडुम आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को समर्पित मंच है. इस बार 12 विधाओं में आयोजन हो रहा है और 54 हजार से अधिक पंजीयन हुए हैं.
जनजातीय संस्कृति की 12 विधाएं
संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने बताया कि बस्तर पंडुम में जनजातीय नृत्य, लोकगीत, वाद्ययंत्र, वेशभूषा, आभूषण, व्यंजन और पेय पदार्थों की 12 विधाओं में प्रस्तुति दी जा रही है. यह मंच बस्तर की सांस्कृतिक विविधता को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत कर रहा है.
राष्ट्रपति का बस्तर दौरा: स्थानीय लोगों के लिए भावनात्मक महत्व
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू स्वयं आदिवासी समाज से आती हैं. ऐसे में उनका बस्तर आना स्थानीय लोगों के लिए भावनात्मक महत्व रखता है. इसे लोग राष्ट्रपति का दौरा नहीं, बल्कि अपनी बेटी या बहन के आगमन के रूप में देख रहे हैं. यह दौरा आदिवासी महिलाओं और युवाओं के लिए प्रेरणा का संदेश देता है कि शिक्षा, संघर्ष और आत्मविश्वास से सर्वोच्च मुकाम हासिल किया जा सकता है.
