छत्तीसगढ़ में अब रेल यात्रा बदलेगी, बॉडी वॉर्न कैमरा लगाकर ड्यूटी करेंगे रेलवे टिकट काउंटर स्टाफ
रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा और टिकट जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया है. अब ट्रेनों में टिकट चेक करने वाले ट्रैवलिंग टिकट एक्जामिनर्स (TTE) को बॉडी वॉर्न कैमरे दिए जा रहे हैं. ये छोटे, पोर्टेबल कैमरे TTE की वर्दी पर लगाए जाते हैं, जो टिकट चेकिंग के दौरान हर गतिविधि को रिकॉर्ड करते हैं. छत्तीसगढ़ के रायपुर रेल मंडल में करीब 240 TTE काम करते हैं और इन्हें इन कैमरों को चलाने की विशेष ट्रेनिंग दी जा चुकी है. ट्रेनिंग में कैमरों को ऑन-ऑफ करने, रिकॉर्डिंग शुरू करने और डाटा स्टोरेज के तरीके सिखाए गए. विवाद की स्थिति में ये रिकॉर्डिंग जांच अधिकारियों के लिए महत्वपूर्ण सबूत बनती है. इससे न केवल यात्रियों की शिकायतें कम होंगी बल्कि TTE को फॉल्स आरोपों से भी सुरक्षा मिलेगी. हाल के वर्षों में टिकटलेस यात्रियों से विवाद और गलत शिकायतों के मामले बढ़े हैं, जिसके चलते रेलवे ने ये पहल की है. कैमरों में नाइट विजन फीचर है, जो कम रोशनी में भी साफ रिकॉर्डिंग करता है. बैटरी बैकअप 20 घंटे तक का है, जो लंबी शिफ्ट के लिए पर्याप्त है. ये कैमरे पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों में पहले से इस्तेमाल हो रहे हैं, लेकिन रेलवे में ये नई शुरुआत है. इस तकनीक से रेल यात्रा ज्यादा सुरक्षित और विश्वसनीय बनेगी.
इस पहल का मुख्य उद्देश्य टिकट जांच के दौरान होने वाले विवादों पर रोक लगाना है. TTE अक्सर टिकटलेस यात्रियों से बहस या हमले का शिकार होते हैं, जबकि यात्री TTE पर दुर्व्यवहार के आरोप लगाते हैं. बॉडी वॉर्न कैमरे इन दोनों पक्षों को संतुलित करते हैं. रायपुर मंडल में ट्रेनिंग के दौरान TTE को बताया गया कि कैमरे को हमेशा ऑन रखें, खासकर संदिग्ध स्थितियों में. रिकॉर्डिंग ऑटोमैटिक स्टोर होती है और टैंपर-प्रूफ है, यानी इसे डिलीट या बदलना मुश्किल है. रेलवे अधिकारियों का कहना है कि ये कैमरे न केवल विवाद सॉल्व करेंगे बल्कि TTE की परफॉर्मेंस भी इम्प्रूव करेंगे. मुंबई और वाल्टेयर डिवीजन में पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा, जहां 50 कैमरों का इस्तेमाल किया गया. छत्तीसगढ़ में इसे बड़े स्तर पर लागू किया जा रहा है. कैमरों की कीमत करीब 9 हजार रुपये प्रति पीस है, लेकिन इनके फायदे अनमोल हैं. ट्रेनिंग में वीडियो डेमो दिखाए गए, जहां TTE ने सीखा कि कैमरे को कैसे क्लिप करें और बैटरी चार्ज करें. ये तकनीक यात्रियों को भी आश्वस्त करती है कि जांच निष्पक्ष है. कुल मिलाकर, ये रेलवे की डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की दिशा में बड़ा कदम है.
बॉडी वॉर्न कैमरा एक छोटा, वियरेबल डिवाइस है जो वीडियो और ऑडियो रिकॉर्ड करता है. ये पुलिस, सुरक्षा गार्ड्स और अब TTE जैसे पेशेवरों के लिए डिजाइन किए गए हैं. कैमरा TTE की छाती या कंधे पर क्लिप होता है और फ्रंट-फेसिंग लेंस से हर चीज कैप्चर करता है. मुख्य फीचर्स में हाई-डेफिनिशन वीडियो (720p या बेहतर), नाइट विजन (कम रोशनी में रिकॉर्डिंग), और जीपीएस ट्रैकिंग शामिल हैं. बैटरी 12-20 घंटे चलती है और स्टोरेज 32GB या ज्यादा का होता है. रेलवे के कैमरों में वाटरप्रूफ और शॉकप्रूफ डिजाइन है, जो ट्रेन की हलचल में भी काम करता है. ये कैमरे रियल-टाइम स्ट्रीमिंग नहीं करते, लेकिन रिकॉर्डिंग बाद में डाउनलोड की जा सकती है. दुनिया भर में ये कैमरे पारदर्शिता बढ़ाने के लिए इस्तेमाल होते हैं,
