महिलाएं बिहान योजना के माध्यम से आत्मनिर्भरता ओर, ऑर्गेनिक से रोजगार और पहचान को मिला नया रास्ता - CGKIRAN

महिलाएं बिहान योजना के माध्यम से आत्मनिर्भरता ओर, ऑर्गेनिक से रोजगार और पहचान को मिला नया रास्ता


छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले की लखपति दीदी समूह से जुड़ी महिलाएं अब बिहान योजना के माध्यम से आत्मनिर्भर बन रही हैं. ये महिलाएं स्वयं के दम पर घरेलू उपयोग के शुद्ध और ऑर्गेनिक उत्पाद तैयार कर रही हैं और उन्हें बाजार तक पहुंचा रही हैं. इन महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादों की प्रदर्शनी मैनपाट महोत्सव में लगाई गई है, जहां लोगों का खासा आकर्षण देखने को मिल रहा है. बिना किसी केमिकल के तैयार किए गए इन उत्पादों की शुद्धता और गुणवत्ता लोगों को खूब पसंद आ रही है, जिसके चलते बिक्री भी अच्छी हो रही है. इस पहल से न केवल महिलाओं को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं, बल्कि वे आर्थिक रूप से मजबूत होकर समाज में एक नई पहचान भी बना रही हैं. आखिर कैसे तैयार होते हैं ये ऑर्गेनिक उत्पाद और कैसे महिलाओं की जिंदगी में आ रहा है बदलाव …

स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की मेहनत रंग लाई

लखपति दीदी इल्फा खेस ने बताया कि वे एनआरएलएम विभाग से जुड़ी हैं और गांव की स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के साथ मिलकर काम करती हैं. समूह की दीदियों द्वारा गांव स्तर पर तैयार किए गए शुद्ध और पारंपरिक उत्पादों को अब मेले और शहरों तक पहुंचाया जा रहा है

ऑर्गेनिक उत्पादों की लंबी सूची, शुद्धता बनी पहचान  

इन उत्पादों में कच्ची घानी का शुद्ध सरसों तेल, जीरा फूल चावल, हल्दी, विभिन्न मसाले, उड़द दाल, हीरवा दाल और अरहर दाल शामिल हैं. इल्फा खेस ने बताया कि चावल की खेती वे स्वयं करती हैं, जबकि बाकी उत्पादों की प्रोसेसिंग और पैकेजिंग स्वयं सहायता समूह के माध्यम से ग्रुपिंग में की जाती है.

वेतन नहीं, बिजनेस मॉडल से मिल रही आमदनी

इल्फा खेस के अनुसार यह कोई वेतन आधारित काम नहीं है, बल्कि पूरी तरह बिजनेस मॉडल पर आधारित है. इससे समूह की महिलाओं को सीधी आय प्राप्त होती है और वे आत्मनिर्भर बन रही हैं. कच्ची घानी सरसों तेल की कीमत ₹230 रखी गई है, जिसे लोग खूब पसंद कर रहे हैं.

शहरों तक पहुंच रहा गांव का स्वाद

इन ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग अब गांव तक सीमित नहीं रही. इन्हें रायगढ़, बिलासपुर और रायपुर जैसे शहरों में भी बिक्री के लिए ले जाया जा रहा है. वर्तमान में यह स्टॉल मैनपाट महोत्सव में लगाया गया है, जहां लोगों का खासा रुझान देखने को मिल रहा है. वहीं संगीता भगत ने  बताया कि मैनपाट महोत्सव में स्वयं सहायता समूह की दीदियां अपने उत्पादों की बिक्री के लिए स्टॉल लगाती हैं. यहां जीरा फूल चावल, धनिया, हल्दी, गेहूं आटा, टाऊ आटा, कोदो आटा, पेहटा और सरसों तेल जैसे कई उत्पाद उपलब्ध हैं. उन्होंने स किया कि इन सभी उत्पादों में किसी भी प्रकार की रासायनिक सामग्री का उपयोग नहीं किया गया है.संगीता भगत ने कहा कि ये सभी उत्पाद पूरी तरह शुद्ध, ऑर्गेनिक और घर पर बने हुए हैं. मैनपाट महोत्सव में इन उत्पादों की बढ़ती बिक्री यह साबित करती है कि अगर अवसर और मंच मिले, तो ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भरता की मिसाल बन सकती हैं.

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