छत्तीसगढ़ में LPG गैस उपभोक्ताओं के लिए खुशखबरी..45 दिन का झंझट खत्म, अब 25 दिन में सिलेंडर बुक होगा
रायपुर समेत प्रदेशभर के ग्रामीण क्षेत्रों के गैस उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है। अब यहां के उपभोक्ता भी शहरी क्षेत्र की तरह 25 दिन में ही गैस सिलेंडर बुक करा सकेंगे। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार रायपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्र में लाखों उपभोक्ताओं का गैस कनेक्शन हैं। इसमें दो से तीन हजार सिलेंडरों की बुकिंग प्रतिदिन ग्रामीण क्षेत्रों से ही होती है। अब तक ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बुकिंग की अवधि 45 दिन निर्धारित थी, जिसे घटाकर अब 25 दिन कर दिया गया है। अमरीका-ईरान युद्ध की स्थिति के चलते गैस आपूर्ति में कमी की आशंका को देखते हुए तेल कंपनियों ने बुकिंग के नियमों में बदलाव किया था। यानी सिलेंडर लेने के 45 दिन बाद ही ग्रामीण उपभोक्ता दूसरी बुकिंग कर सकते थे। इससे बड़े परिवारों और शादी-समारोह वाले घरों में परेशानी हो रही थी।
मंत्रालय ने जारी किए निर्देश, तुरंत प्रभाव से लागू
पेट्रोलियम मंत्रालय ने तीनों प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) के प्रमुखों को आदेश जारी कर इस बदलाव को तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए हैं।
मंत्रालय के स्पष्टीकरण के अनुसार, पूर्व में मध्य पूर्व में जारी राजनीतिक और सैन्य तनाव के चलते एलपीजी आपूर्ति प्रभावित हुई थी। उस समय रसोई गैस की जमाखोरी, कालाबाजारी पर रोक लगाने और मांग-आपूर्ति में संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 45 दिनों का अस्थायी नियम लागू किया गया था। अब आपूर्ति श्रृंखला में सुधार और पुराना बैकलॉग समाप्त होने के बाद सरकार ने यह राहत देने का फैसला लिया है।
खाद्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार रायपुर शहर में प्रतिदिन एवरेज 5000-6000 गैस सिलेंडर की बुकिंग हो रही है। जबकि विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 4 हजार सिलेंडर घरों तक पहुंचाए जाते हैं। बुकिंग की अवधि घटने से अब इस आंकड़े में और इजाफा होने की उम्मीद है। एजेंसी संचालकों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों से बुकिंग की संख्या अब तेजी से बढ़ेगी।
ग्रामीण परिवारों को मिलेगी बड़ी राहत
राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर इस संबंध में जारी विभागीय पत्र साझा किया। इस निर्णय से विशेष रूप से देश के ग्रामीण अंचलों में रहने वाले करोड़ों परिवारों को फायदा पहुंचेगा, जिन्हें 45 दिनों की लंबी अवधि के कारण अक्सर रसोई गैस की कमी का सामना करना पड़ता था।