'जल संचय जन भागीदारी' में छत्तीसगढ़ की उपलब्धि, छत्तीसगढ़ का जल संरक्षण मॉडल देश में प्रथम
मुख्यमंत्री साय ने बताया कि छत्तीसगढ़ ने जल संरक्षण को केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित न रखकर जनअभियान बनाया है। इसमें किसानों, ग्राम पंचायतों, जल सखियों, जल मित्रों और स्थानीय समुदायों को जोड़ा गया। उन्होंने कहा कि किसान परिवार से होने के कारण वे पानी का महत्व समझते हैं। इसलिए जल संरक्षण की योजनाओं के केंद्र में किसान और गांव को रखा गया। छत्तीसगढ़ देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग चार फीसदी हिस्सा है। यह अभियान में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहा है। यह उपलब्धि जल संरक्षण के प्रति सामूहिक चेतना और जनभागीदारी को दर्शाती है। उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने वर्षा जल संचयन और भू-जल पुनर्भरण के कार्यों की जानकारी दी। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल भी सम्मेलन में उपस्थित थे। छत्तीसगढ़ ने जनभागीदारी आधारित जल संरक्षण का प्रभावी मॉडल देश के सामने प्रस्तुत किया है। जल शक्ति मंत्रालय के 'जल संचय जन भागीदारी' अभियान के तीसरे चरण में राज्य ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया। छत्तीसगढ़ के पांच जिले भी जल संरक्षण में देश के शीर्ष 10 जिलों में शामिल हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में नई दिल्ली में आयोजित शिखर सम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने यह जानकारी साझा की।
मुख्यमंत्री साय ने कोरिया जिले से शुरू हुए '5 फीसदी मॉडल' का विशेष उल्लेख किया। इस मॉडल में किसान अपनी कृषि भूमि का लगभग 5 फीसदी हिस्सा स्वेच्छा से भू-जल पुनर्भरण के लिए दे रहे हैं। इस हिस्से में जल संरचनाएं विकसित की जा रही हैं, ताकि बारिश का पानी खेत में ही एकत्र हो सके। किसान इसमें केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि सक्रिय भागीदार हैं। पंचायतें और स्थानीय समुदाय भी इसमें सहयोग कर रहे हैं। जल संरचनाओं की जियो-टैगिंग, नियमित निगरानी और प्रगति की समीक्षा भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
छत्तीसगढ़ ने 'जल संचय जन भागीदारी' अभियान के तीनों चरणों में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। पहले दो चरणों में राज्य देश में दूसरे स्थान पर रहा। तीसरे चरण JSJB 3.0 में छत्तीसगढ़ ने देश में पहला स्थान हासिल किया है। इस चरण में 79 हजार 775 जल संरचनाएं दर्ज की गईं, जिनमें से 77 हजार 719 पूरी हो चुकी हैं। कुल मिलाकर, अभियान के विभिन्न चरणों में 28 लाख से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण और पंजीयन हुआ है। इन प्रयासों से पानी की कमी वाले ब्लॉकों की संख्या 26 से घटकर 19 रह गई है। पांच गंभीर ब्लॉकों के भी सामान्य श्रेणी में आने का अनुमान है।
मुख्यमंत्री साय ने जल संरक्षण अभियान को प्रभावी बनाने के लिए कई सुझाव दिए। उन्होंने प्रत्येक राज्य को अपनी परिस्थितियों के अनुरूप अलग 'कैच द रेन' योजना तैयार करने को कहा। बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को प्रोत्साहित करने के लिए 'राज्य जल पुरस्कार' शुरू करने का सुझाव दिया। मुख्यमंत्री ने BISAG-N के माध्यम से जल संरचनाओं की मैपिंग मजबूत करने को कहा। उन्होंने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में त्रैमासिक समीक्षा का भी प्रस्ताव रखा। जल संरक्षण से भू-जल स्तर सुधरेगा, सिंचाई के लिए पानी बढ़ेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
