कृषक उन्नति योजना से धान के बदले कपास की खेती को मिला प्रोत्साहन - CGKIRAN

कृषक उन्नति योजना से धान के बदले कपास की खेती को मिला प्रोत्साहन


छत्तीसगढ़ शासन की महती कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत किसानों को धान के बदले अन्य चिन्हित फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। खरीफ वर्ष 2026 में धान के स्थान पर मक्का, कोदो, कुटकी, रागी, कपास, गन्ना सहित दलहन एवं तिलहन फसलों की खेती करने वाले पात्र किसानों को शासन द्वारा 15,000 रूपए प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जा रही है।

कृषि विभाग के मैदानी अधिकारियों द्वारा किसानों के बीच योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करते हुए उन्हें धान के स्थान पर लाभकारी वैकल्पिक फसलों की खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसी पहल का एक अनुकरणीय उदाहरण विकासखंड बिल्हा के ग्राम किरारी गोढ़ी में देखने को मिला, जहां कृषक श्री सुरेश सराफ के 27 एकड़ के प्रक्षेत्र में लगभग 15 एकड़ क्षेत्र में कपास की फसल लगाई गई है।

 कपास की फसल लेने वाले कृषक श्री जगदीप जी ने बताया कि कपास की फसल लगाए हुए लगभग एक माह हो चुका है तथा फसल की स्थिति अच्छी है। उन्होंने बताया कि धान की अपेक्षा कपास की फसल से अधिक आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही शासन द्वारा कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत दी जाने वाली 15,000 रूपए प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि अतिरिक्त लाभ के रूप में प्राप्त होगी, जिसे उन्होंने कपास की खेती के लिए एक महत्वपूर्ण प्रोत्साहन बताया। कृषक के अनुसार कपास से प्रति एकड़ लगभग 12 से 15 क्विंटल उत्पादन प्राप्त होने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि उत्पाद की बिक्री के लिए कपास मिल संचालकों द्वारा खेत से ही उपज खरीदकर ले जाने की सुविधा उपलब्ध रहेगी। कृषक ने कपास की खेती से इस वर्ष बेहतर आमदनी होने की उम्मीद जताते हुए अन्य किसानों से भी वैकल्पिक फसलों को अपनाने की अपील की।

उप संचालक कृषि, बिलासपुर श्री एम. आर. तिग्गा द्वारा कृषक के प्रक्षेत्र का भ्रमण कर कपास की फसल का अवलोकन किया गया तथा फसल की वर्तमान स्थिति का जायजा लिया गया। उन्होंने कृषक द्वारा धान के स्थान पर कपास की खेती अपनाने की पहल की सराहना करते हुए कृषक को कृषक उन्नति योजना का लाभ लेने के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पहल क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणादायी है तथा उम्मीद जताई कि जिले के अन्य कृषक भी शासन की मंशा के अनुरूप धान के स्थान पर चिन्हित वैकल्पिक फसलों की खेती अपनाकर योजना का लाभ लेंगे।

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