महिला समूहों ने संभाली नर्सरी की कमान, गुणवत्तापूर्ण पौधों से बढ़ी आजीविका,बन रहीआत्मनिर्भर
छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के अंतर्गत संचालित आईएफसी नर्सरी ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता का प्रभावी माध्यम बन रही है। सद्भावना महिला संकुल स्तरीय संगठन, दोनर के सहयोग से संचालित आजीविका सेवा केंद्र की नर्सरी इकाई में महिला स्व-सहायता समूहों ने पौध उत्पादन से लेकर उसकी देखरेख, वितरण और प्रबंधन तक की जिम्मेदारी संभालकर अपनी कार्यकुशलता का परिचय दिया है।
नर्सरी की पूरी गतिविधियों में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी इस पहल की सबसे बड़ी विशेषता है। समूह की महिलाएं पौध तैयार करने, बीज एवं पौध सामग्री की व्यवस्था, नियमित सिंचाई, पौधों की देखभाल, गुणवत्ता बनाए रखने और किसानों तक पौध पहुंचाने का कार्य स्वयं कर रही हैं। इस प्रक्रिया ने महिलाओं को केवल मजदूरी या रोजगार तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें स्थानीय स्तर पर उद्यमी और आजीविका संचालक बनने का अवसर दिया है।
पहले किसानों को गुणवत्तापूर्ण पौधों के लिए दूर-दराज के बाजारों पर निर्भर रहना पड़ता था। महिला समूहों द्वारा नर्सरी संचालन शुरू होने के बाद स्थानीय स्तर पर ही टमाटर, मिर्च, बैंगन, फूलगोभी, करेला, मुनगा, पपीता, कटहल और नारियल सहित विभिन्न फसलों के पौधे उपलब्ध होने लगे हैं। इससे किसानों को समय पर पौधे मिल रहे हैं और खेती में फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिल रहा है।
अब तक 38,100 गुणवत्तापूर्ण पौधों का उत्पादन एवं वितरण कर महिला समूहों ने ₹1,15,150 की आय अर्जित की है। यह उपलब्धि समूह की महिलाओं के सामूहिक प्रयास, मेहनत और बेहतर प्रबंधन का परिणाम है। आय के साथ महिलाओं में निर्णय लेने की क्षमता, जिम्मेदारी और उद्यमिता का भाव भी मजबूत हुआ है।
आईएफसी नर्सरी महिला समूहों के लिए “महिला सहभागिता से महिला उद्यमिता” का उदाहरण बन रही है। बिहान के माध्यम से मिले प्रशिक्षण, संस्थागत सहयोग और बाजार से जुड़ाव ने महिलाओं को अपने गांव में ही आजीविका का स्थायी अवसर प्रदान किया है।
कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री गजेंद्र सिंह ठाकुर तथा बिहान की टीम के मार्गदर्शन में संचालित यह पहल ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ किसानों को गुणवत्तापूर्ण पौध उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है। महिला समूहों की मेहनत से तैयार पौधे अब खेतों में हरियाली और परिवारों में खुशहाली की नई कहानी लिख रहे हैं।