कचरे से कमाई, स्वच्छता से आत्मनिर्भरता की राह
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के सेवा और समर्पण भाव से प्रेरित जनकल्याणकारी पहलों ने स्वच्छता को जनआंदोलन के साथ आजीविका का माध्यम भी बना दिया है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत सृजित अवसरों का लाभ उठाकर बलरामपुर की श्रीमती प्रतिमा टोप्पो आज न केवल शहर को स्वच्छ रखने में योगदान दे रही हैं, बल्कि अपने परिवार की आर्थिक जरूरतें पूरी करने में भी सहभागी बनी हैं।
स्वच्छाग्रही के रूप में श्रीमती टोप्पो रिक्शे से घर-घर जाकर कचरा संग्रहण करती हैं और उसे सेग्रीगेशन शेड तक पहुँचाकर पृथक्करण करती हैं। पुनर्चक्रण योग्य सामग्री को अलग कर बेचने से उन्हें अतिरिक्त आय होती है। इस कार्य से मिलने वाले लगभग 8 हजार रुपये मासिक मानदेय और सामग्री बिक्री से होने वाली 4 से 5 हजार रुपये की आय मिलाकर वे हर माह 12 से 15 हजार रुपये तक अर्जित कर रही हैं।
पहले घर की आवश्यकताएँ पूरी करना कठिन था, पर स्वच्छता कार्य से जुड़ने के बाद अब वे राशन सहित परिवार के जरूरी खर्चों में स्वयं सहयोग कर पा रही हैं। उनके लिए यह कार्य रोजगार के साथ आत्मनिर्भरता और सम्मान का अवसर भी है। उनकी तरह अनेक महिलाएँ स्वच्छता से जुड़कर परिवार को आर्थिक मजबूती दे रही हैं।
श्रीमती प्रतिमा टोप्पो की यह कहानी दर्शाती है कि जनकल्याण के संकल्प से शुरू हुई योजनाएँ किस प्रकार अंतिम व्यक्ति तक पहुँचकर स्वच्छ शहर और सशक्त परिवार, दोनों का आधार बन रही हैं।
