दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे पर्यावरण संरक्षण एवं ऊर्जा दक्षता की दिशा में अग्रणी - CGKIRAN

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे पर्यावरण संरक्षण एवं ऊर्जा दक्षता की दिशा में अग्रणी


दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने नया प्रयोग करके पर्यावरण संरक्षण के साथ ही बचत की परंपरा को शुरू किया है। जोन की 25 एलएचबी ट्रेनों में पॉवर जेनरेटर की बजाय सीधे इंजन के ओएचई से बिजली लेकर एसी कोच और लाइटें जलाकर 81 करोड़ रुपए बचा लिए। यह सब हुआ है अत्याधुनिक हेड ऑन जनरेशन (एचओजी) प्रणाली को अपनाकर। जिससे जोन ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान 65 लाख लीटर से अधिक डीजल की बचत की है। साथ ही 16,614 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी दर्ज की गई है।

ईओजी प्रणाली पर निर्भरता लगभग समाप्त

दपूमरे की 25 एलएचबी आधारित ट्रेनों में एचओजी प्रणाली से इन ट्रेनों के कोचों में प्रकाश एवं वातानुकूलन (एयर कंडीशनिंग) के लिए आवश्यक विद्युत आपूर्ति डीजल जनरेटर के स्थान पर सीधे ओवरहेड उपकरण (ओएचई) के माध्यम से इंजन से प्राप्त की जा रही है। इससे डीजल आधारित एंड ऑन जनरेशन (ईओजी) प्रणाली पर निर्भरता लगभग समाप्त हो गई है।

पहले डीजल जनरेटर सेट से मिलता थी बिजली

पहले एलएचबी ट्रेनों के दोनों सिरों पर लगे पावर कारों में स्थापित डीजल जनरेटर सेट कोचों को विद्युत आपूर्ति करते थे। एचओजी प्रणाली लागू होने के बाद यह व्यवस्था समाप्त होकर विद्युत इंजन से सीधे विद्युत आपूर्ति की जा रही है।

इन 25 ट्रेनों में एचओजी प्रणाली

बिलासपुर-चेन्नई, बिलासपुर-पुणे, बिलासपुर-एर्नाकुलम, बिलासपुर-पटना, बिलासपुर-भगत की कोठी, बिलासपुर-बीकानेर, छत्तीसगढ़ संपर्क क्रांति, दुर्ग-निज़ामुद्दीन, हमसफ़र, दुर्ग-जम्मूतवी, दुर्ग-फिरोजपुर अंत्योदय एक्सप्रेस, कोरबा-रायपुर हसदेव, दुर्ग- नौतनवा, दुर्ग-कानपुर बेतवा, दुर्ग-अजमेर, कोरबा-अमृतसर छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस, दुर्ग-जयपुर, दुर्ग-उधमपुर, दुर्ग-भोपाल अमरकंटक, रायगढ़-गोंदिया जनशताब्दी, बिलासपुर-नेताजी सुभाषचंद्र बोस इतवारी इंटरसिटी, कोरबा- नेताजी सुभाषचंद्र बोस इतवारी शिवनाथ, बिलासपुर-रीवा, बिलासपुर-इंदौर नर्मदा, दुर्ग-अम्बिकापुर शामिल हैं।

पहले कैसे होती थी बिजली आपूर्ति?

पहले एलएचबी ट्रेनों के दोनों सिरों पर लगे पावर कार में डीजल जनरेटर सेट लगाए जाते थे। यही जनरेटर पूरे रैक के एसी, लाइट और अन्य विद्युत उपकरणों को बिजली उपलब्ध कराते थे। लेकिन HOG प्रणाली लागू होने के बाद यह व्यवस्था लगभग समाप्त हो गई है। अब विद्युत इंजन से ही पूरी ट्रेन को बिजली मिल रही है, जिससे डीजल आधारित एंड ऑन जनरेशन (EOG) प्रणाली पर निर्भरता लगभग खत्म हो गई है।

क्या है हेड ऑन जनरेशन (HOG) प्रणाली?

हेड ऑन जनरेशन (HOG) एक आधुनिक तकनीक है, जिसमें ट्रेन के एसी कोचों, पंखों, लाइटों और अन्य विद्युत उपकरणों को बिजली सीधे इलेक्ट्रिक इंजन से मिलती है। यह बिजली इंजन को मिलने वाली ओवरहेड इलेक्ट्रिक लाइन (OHE) के माध्यम से उपलब्ध कराई जाती है। इस व्यवस्था में अलग से डीजल जनरेटर चलाने की आवश्यकता नहीं पड़ती, जिससे डीजल की बचत के साथ रखरखाव का खर्च भी कम हो जाता है।

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