आयुर्वेद के अनुसार वन तुलसी के फायदे - CGKIRAN

आयुर्वेद के अनुसार वन तुलसी के फायदे


वन तुलसी आयुर्वेद की एक महत्वपूर्ण औषधीय तुलसी है। इसे जंगली तुलसी, क्लोव तुलसी भी कहा जाता है। वन तुलसी दिखने में सामान्य तुलसी जैसी होती है, लेकिन इसकी तेज खुशबू, बड़े पत्ते और औषधीय गुण इसे अलग पहचान देते हैं. आयुर्वेद में इसका उपयोग कई स्वास्थ्य समस्याओं के लिए पारंपरिक रूप से किया जाता रहा है. हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि अनियमित पीरियड्स या किसी भी स्वास्थ्य समस्या में इसका सेवन डॉक्टर या आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह के बाद ही करना चाहिए.

वन तुलसी की पहचान तेज कपूर जैसी खुशबू, बड़े और हल्के रोएंदार पत्तों और झाड़ीदार आकार से की जा सकती है. यह सामान्य तुलसी से थोड़ी अलग होती है. इसके सफेद या हल्के पीले फूल और तीखी महक इसकी विशेष जानकारी हैं. आयुर्वेद में इसे औषधीय गुणों से भरपूर माना गया हैं.

राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया की पांच साल अनुभवी चिकित्साधिकारी डॉ. वंदना तिवारी के मुताबिक, अनियमित पीरियड्स के पीछे तनाव, हार्मोनल असंतुलन, अनियमित दिनचर्या, खराब खानपान, अत्यधिक वजन बढ़ना या घटना और कुछ चिकित्सीय स्थितियां बड़ी कारण बन सकती हैं. यदि लंबे समय तक मासिक धर्म अनियमित रहे या बार-बार मिस हो, तो केवल घरेलू उपाय नहीं, बल्कि स्त्री रोग विशेषज्ञ से तुरंत संपर्क करें.

वन तुलसी में एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-बैक्टीरियल और सूजन कम करने वाले गुण मौजूद होते हैं. पारंपरिक चिकित्सा में इसका उपयोग शरीर के संतुलन को बनाए रखने के लिए उपयोगी रहा है. कुछ स्थितियों में यह हार्मोनल संतुलन और रक्त संचार को बेहतर बनाने में सहायक साबित हो सकती है, लेकिन डॉक्टर की सलाह जरूरी है.

वन तुलसी की कुछ पत्तियां पारंपरिक रूप से सुबह खाली पेट या 8 से 10 पत्तियों को पानी में उबालकर काढ़ा तैयार कर सेवन किया जा सकता हैं. स्वाद के लिए इसमें थोड़ी मात्रा में शहद मिलाया जा सकता है. ध्यान दे, गर्भवती महिलाएं, गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीज या नियमित दवा लेने वाले इसका सेवन बगैर चिकित्सक की सलाह लिए न करें.

तुलसी का उपयोग पाचन तंत्र को बेहतर बनाने के लिए भी किया जाता है. यह गैस, अपच और कब्ज जैसी समस्याओं में राहत देने में बेहद लाभकारी और गुणकारी है. वन तुलसी शरीर की प्राकृतिक डिटॉक्स प्रक्रिया को सही करने में सहायता प्रदान करती हैं. हालांकि, इसका सेवन आयुर्वेद चिकित्सक की देखरेख में ही करना चाहिए.

यह तुलसी के पौधे से एकदम मिलता जुलता है. वन तुलसी का काढ़ा सर्दी, जुकाम, गले की खराश और कफ जैसी सामान्य समस्याओं में पारंपरिक रूप से उपयोग किया जाता रहा है. इसमें एंटीऑक्सीडेंट और पौधों से प्राप्त प्राकृतिक यौगिक पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानि इम्युनिटी पावर को मजबूत बनाते हैं.

वन तुलसी की पत्तियों का लेप जोड़ों के दर्द और हल्की सूजन में सदियों से किया जाता आ रहा है. इसकी पत्तियों से तैयार पानी से कुल्ला करने पर मुंह की दुर्गंध, मसूड़ों की सूजन और दांतों की सामान्य समस्या दूर हो जाती है. यदि दर्द या संक्रमण लंबे समय तक बना रहे, तो दंत चिकित्सक को जरूर मिलना चाहिए.

 किसी भी औषधि का सेवन बगैर चिकित्सक की सलाह लिए नहीं करना चाहिए.

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