छत्तीसगढ़ कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर मंथन तेज.... क्या फिर भूपेश के हाथों में होगी कांग्रेस की कमान?
छत्तीसगढ़ कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। छत्तीसगढ़ कांग्रेस एक बार फिर संगठनात्मक बदलाव के दौर से गुजरती दिखाई दे रही है। आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए पार्टी आलाकमान प्रदेश संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की तैयारी में जुटा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के पद को लेकर दिल्ली से लेकर रायपुर तक चर्चाओं का बाजार गर्म है और राजनीतिक गलियारों में दो बड़े नाम सबसे अधिक चर्चा में हैं—पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज का कार्यकाल जुलाई में समाप्त होने जा रहा है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व आगामी रणनीति के तहत संगठन की कमान ऐसे नेता को सौंपना चाहता है, जो न केवल कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर सके बल्कि चुनावी तैयारियों को भी धार दे सके। माना जा रहा है कि कांग्रेस हाईकमान प्रदेश में एक मजबूत और प्रभावशाली नेतृत्व स्थापित करने के पक्ष में है।
भूपेश बघेल का नाम इसलिए प्रमुखता से लिया जा रहा है क्योंकि उनके प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए ही वर्ष 2018 में कांग्रेस ने ऐतिहासिक जीत दर्ज कर सत्ता में वापसी की थी। संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच उनकी मजबूत पकड़ आज भी मानी जाती है। दूसरी ओर टी.एस. सिंहदेव भी कांग्रेस के सबसे लोकप्रिय और स्वीकार्य नेताओं में गिने जाते हैं। सरगुजा से लेकर पूरे प्रदेश में उनकी अलग पहचान और प्रभाव है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश कांग्रेस संगठन अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखा पाया है। कार्यकारिणी के गठन में देरी, नियमित बैठकों का अभाव और सरकार के खिलाफ प्रभावी आंदोलनों की कमी जैसे मुद्दों ने संगठन को कमजोर किया है। कई पदाधिकारी भी निष्क्रिय दिखाई दिए हैं, जिसका असर जमीनी स्तर पर पार्टी की गतिविधियों पर पड़ा है।
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व को छत्तीसगढ़ संगठन की मौजूदा स्थिति की विस्तृत जानकारी दी जा चुकी है। प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट ने भी शीर्ष नेतृत्व के समक्ष संगठन की चुनौतियों और संभावनाओं पर चर्चा की है। इसी कड़ी में प्रदेश अध्यक्ष के साथ दो कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त करने का विकल्प भी विचाराधीन बताया जा रहा है, ताकि क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को संतुलित किया जा सके।
दिल्ली में हाल ही में हुई शीर्ष नेतृत्व की बैठकों में भी छत्तीसगढ़ संगठन को लेकर गंभीर मंथन हुआ है। ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि जुलाई के बाद कांग्रेस प्रदेश संगठन में व्यापक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। नया नेतृत्व मिलने के साथ ही पार्टी विधानसभा चुनावों की तैयारी को गति देने और कार्यकर्ताओं को फिर से सक्रिय करने की दिशा में आगे बढ़ेगी।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कांग्रेस एक बार फिर अनुभवी नेतृत्व पर भरोसा जताएगी, या संगठन को किसी नए चेहरे के हाथों सौंपकर नया राजनीतिक प्रयोग करेगी। आने वाले सप्ताहों में इसका जवाब सामने आ जाएगा, लेकिन इतना तय है कि छत्तीसगढ़ कांग्रेस के लिए यह बदलाव केवल पद परिवर्तन नहीं, बल्कि भविष्य की राजनीतिक दिशा तय करने वाला निर्णय साबित हो सकता है।
फैसला हाईकमान करेगा’
प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष के पद को लेकर जारी अटकलों पर विराम लगाते हुए भूपेश बघेल ने कहा कि किसे कौन सी जिम्मेदारी मिलेगी, इसका फैसला पार्टी हाईकमान करेगा। उन्होंने कहा, “मैं इन सब मामलों में अपनी बुद्धि नहीं लगाता।” प्रदेश संगठन की राजनीति से अलग भूपेश बघेल ने प्रेसवार्ता में केंद्र सरकार पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने देश के मौजूदा हालातों की तुलना अघोषित आपातकाल से करते हुए कहा कि लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश हो रही है।