ग्रामीणों के लिए राहत और विश्वास लेकर आया सुशासन तिहार 2026ः पुवर्ती में घर-घर पहुंचीं सरकारी सेवाएं
कभी खूंखार नक्सली कमांडर हिड़मा के गांव में सरकारी अफसर जाने से डरते थे. नक्सलवाद खत्म होने के बाद यहां की फिज़ा बदल रही है. माओवाद के खत्म होने के बाद बस्तर में तेजी से विकास के काम चल रहे हैं. जिन गांवों में कभी सरकारी अफसर पैर नहीं रखते थे, वहां आज गांव के लोग सरकार की ओर से लगाए गए शिविर में शासन की योजनाओं की जानकारी लेने पहुंच रहे हैं. सोमवार को सुकमा जिले के कोंटा विकासखंड के दूरस्थ और कभी नक्सल प्रभावित रहे ग्राम पुवर्ती में आयोजित सुशासन तिहार 2026 का शिविर ग्रामीणों के लिए राहत और विश्वास लेकर आया. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में चलाए जा रहे इस अभियान के तहत प्रशासन गांव तक पहुंचकर लोगों की समस्याओं का समाधान किया जा रहा है.
सुकमा कलेक्टर अमित कुमार के दिशा निर्देशन में आयोजित शिविर में ग्रामीणों को विभिन्न शासकीय सेवाओं का लाभ तत्काल लोगों को प्रदान किया गया. शिविर के दौरान 100 से अधिक महत्वपूर्ण दस्तावेज वितरित किए गए, जिनमें आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड, नवीन खाता, बी-1, खसरा, जन्म प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र और निवास प्रमाण पत्र शामिल हैं.
शिविर में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने ग्रामीणों का निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण किया और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया. अधिकारियों ने ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा कई मामलों का मौके पर ही समाधान किया. वर्षों तक शासकीय दस्तावेजों और सेवाओं के लिए दूर-दराज के कार्यालयों के चक्कर लगाने वाले ग्रामीणों को अब गांव में ही सुविधाएं मिलने लगी हैं. इससे उनके समय और धन दोनों की बचत हो रही है. ग्रामीणों ने इस पहल के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और जिला प्रशासन के प्रति आभार जताया.
सुशासन तिहार केवल शासकीय सेवाओं तक सीमित नहीं रहा. महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा गर्भवती महिलाओं की पारंपरिक गोद भराई कार्यक्रम का आयोजन भी किया गया. इससे ग्रामीणों में अपनत्व और सहभागिता का माहौल बना. ग्रामीणों ने कहा कि पहली बार शासन उनके घर-आंगन तक पहुंचा है. दूरस्थ क्षेत्रों में आयोजित ऐसे शिविर प्रशासन और जनता के बीच विश्वास को मजबूत कर रहे हैं, तथा समावेशी विकास की नई मिसाल पेश कर रहे हैं.
