नक्सल प्रभावित गांव में प्रशासन की नई पहल, नक्सलवाद के खात्मे के बाद पहली बार खुली राशन दुकान
छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के पोलमपल्ली गांव में अब बदलाव साफ दिखाई देने लगा है। कभी नक्सल प्रभाव के कारण बुनियादी सुविधाओं से दूर रहने वाला यह इलाका अब विकास की नई राह पर आगे बढ़ रहा है। नक्सल मुक्त होने के सिर्फ तीन महीने के भीतर यहां ग्रामीणों के लिए स्थायी राशन दुकान शुरू कर दी गई है, जिससे लोगों को बड़ी राहत मिली है। ग्रामीणों का कहना है कि राशन कार्ड मिलने के बाद उन्हें अच्छी गुणवत्ता का राशन मिल रहा है। एक स्थानीय निवासी ने बताया कि अब उन्हें घंटों लाइन में खड़े रहने की जरूरत नहीं पड़ती और समय पर अनाज आसानी से मिल जाता है। वहीं राशन दुकान के सेल्समैन ने बताया कि वह रोजाना करीब 30 से 35 राशन कार्डधारकों को राशन वितरित करते हैं।
पहले गांव में राशन वितरण पंचायत भवन या स्कूल में अस्थायी व्यवस्था के जरिए किया जाता था। ग्रामीणों को लंबी लाइन में खड़ा होना पड़ता था और कई बार असुविधाओं का सामना भी करना पड़ता था। हालांकि अब पोलमपल्ली गांव में अपनी अलग और स्थायी राशन दुकान खुल गई है, जिससे लोगों की परेशानियां काफी कम हो गई हैं।
2028 तक चलेगी योजना
सरकार ने इस योजना को 1 जनवरी 2024 से अगले पांच वर्षों यानी दिसंबर 2028 तक बढ़ा दिया है। योजना का मुख्य उद्देश्य गरीब परिवारों को आर्थिक और खाद्य सुरक्षा देना है। इसके साथ ही अब लाभार्थियों को पोषणयुक्त फोर्टिफाइड चावल भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
कहीं भी कर सकते हैं राशन कार्ड का उपयोग
यह योजना 'एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड' व्यवस्था के तहत काम करती है। इसका फायदा यह है कि लाभार्थी देश में कहीं भी अपने राशन कार्ड का उपयोग कर मुफ्त अनाज प्राप्त कर सकते हैं। पोलमपल्ली गांव में खुली नई राशन दुकान अब ग्रामीणों के लिए सिर्फ सुविधा नहीं बल्कि विकास और विश्वास की नई पहचान बन गई है।
