नक्सलवाद से आजादी के बाद बेखौफ तेंदूपत्ता का संग्रहण जारी, ग्रामीणों में बढ़ा आत्मविश्वास
मोहला-मानपुर जिला प्रदेश का बड़ा तेंदूपत्ता संग्राहक जिला है, जहां से हर साल तेंदूपत्तों की बड़ी खेप निकलती है। तेंदूपत्ता का ये सीजन इस लिहाज से भी खास है कि अब जिले से नक्सलवाद का साया खत्म हो चुका है। तेंदूपत्तों में आगजनी करने और लेवी के लिए ठेकेदारों को डराने धमकाने वाले नक्सली गर्दिश में जा चुके हैं। लिहाज़ा इस बार बेखौफ तेंदूपत्ता संग्रहण हो रहा है।
जिले के डीएफओ दिनेश पटेल के मुताबिक, राजनांदगांव यूनियन अंतर्गत मोहला मानपुर जिले में तेंदूपत्ता का संग्रहण होता है। पूरे यूनियन में 80 हजार तेंदूपत्ता मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहण का लक्ष्य है, जिसमें से 60 हजार मानक बोरा संग्रहण अकेले मोहला मानपुर जिले से होता है। उन्होंने बताया कि जिले में कुल 39 समितियां बनी हैं, जो संग्रहण करा रही है। बारिश के चलते कुछ समितियों में संग्रहण चालू नहीं हो सका है, लेकिन अब मौसम अनुकूल है जल्द शेष में भी संग्रहण चालू हो जाएगा।
डीएफओ के मुताबिक, बारिश का आंशिक प्रभाव तेंदूपत्ता पर हुआ है, जिससे कहीं-कहीं कुछ पत्ते बारिश में खराब हुए हैं। आम तौर पर तेंदूपत्ता सीजन में माओवादी सक्रिय रहते थे और पत्तों में आगजनी जैसी घटनाओं को वे अंजाम देते थे।
डी एफ ओ ने कहा कि इस बार नक्सल खौफ वाली कोई बात नहीं है और नक्सलियों द्वारा तेंदूपत्तों में आगजनी किए जाने की संभावना बिल्कुल नहीं है। लोग बेखौफ होकर तेंदूपत्ता संग्रहण करेंगे और ऐसे में इस बार अधिक से अधिक तेंदूपत्ता संग्रहण जिले में होगा।
ग्रामीणों में बढ़ा आत्मविश्वास
नक्सल प्रभाव कम होने के बाद ग्रामीणों में आत्मविश्वास बढ़ा है। तेंदूपत्ता संग्रहण से जुड़े लोगों का कहना है कि इस बार वे बिना डर के काम कर पा रहे हैं, जिससे उत्पादन और आय दोनों बढ़ने की उम्मीद है। ग्रामीणों का मानना है कि यदि इसी तरह शांति और सुरक्षा का माहौल बना रहा तो आने वाले वर्षों में जिले की आर्थिक स्थिति और मजबूत होगी।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए अहम है तेंदूपत्ता
छत्तीसगढ़ में तेंदूपत्ता केवल वन उपज नहीं बल्कि हजारों ग्रामीण परिवारों की आजीविका का प्रमुख साधन है। गर्मियों के मौसम में बड़ी संख्या में ग्रामीण जंगलों में जाकर तेंदूपत्ता संग्रहित करते हैं और इससे मिलने वाली राशि से परिवार की जरूरतें पूरी करते हैं।
