बस्तर के डिमरापाल मेडिकल कॉलेज में दो बच्चों के आंखों का सफल ऑपरेशन,मासूमों को मिली नई रौशनी
नक्सलवाद के खात्मे के बाद बस्तर में स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत हो रही है. हाल ही में बस्तर के डिमरापाल मेडिकल कॉलेज में दो बच्चों की आंखों की रौशनी लौटाई गई. डिमरापाल अस्पताल के नेत्र विभाग ने यह ऑपरेशन किया है. दोनों बच्चों ने भयावह हादसे में आंखों की रौशनी गंवाई थी. आंखों की रौशनी गंवा चुके 2 मासूम बच्चों के आंखों में डिमरापाल के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने रौशनी लौटाई है. जटिल ऑपरेशन के बाद अब मासूम बच्चे अपनी आंखों से दुनिया को देख पा रहे हैं.
नेत्र विभागाध्यक्ष डॉ. छाया शोरी ने बताया की नानगुर ग्राम में 5 वर्षीय दिगेश साइकिल चलाने के दौरान गिर गया. गिरने से उसकी आंख में कांच का टुकड़ा चला गया. कांच से मासूम की कार्निया फट गई थी. इससे उसके आंख में खून आ गया था. जिसके बाद उनके परिजनों से बातचीत करके तत्काल प्रभाव से ऑपरेशन कक्ष में ले गए. जहां सुरक्षित ऑपरेशन करके क्षतिग्रस्त हुए कार्निया को ठीक किया. इसके बाद आंखों में बहे खून को साफ किया गया. जिससे उनके आंखों की रौशनी वापस लौटी है.
दूसरा केस 6 साल की अंजलि का है. वह तोकापाल ब्लॉक के बड़े आरापुर गांव से अस्पताल पहुंची हुई थी. खेलने के दौरान उसके आंख में लकड़ी के टुकड़े से चोट लगी थी. जिसके बाद उसे भी तत्काल ऑपरेशन कक्ष में ले जाया गया. उसके इंटीरियर चेम्बर में फंसे लकड़ी के टुकड़े को सुरक्षित बाहर निकाल दिया गया. तुरन्त ऑपरेशन करने के कारण किसी प्रकार का इंफेक्शन आंखों में नहीं हुआ. चोट लगने के 24 घण्टे के भीतर अस्पताल पहुंचने और समय पर इलाज होने से आंखों की रौशनी वापस लौटी है. देरी करने पर आंखों में इंफेक्शन फैल जाता है और आंखों में वापस रौशनी लाना काफी मुश्किल होता. इन घटनाओं के बाद अस्पताल की तरफ से निर्देश निकाला गया है कि बच्चों को खेलने के दौरान नुकीली चीजों से दूर रखा जाए.
पहले बस्तर इलाके में इस तरह के ओपरेशन नहीं होते थे. लेकिन अब मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल डिमरापाल में ऐसी सुविधाएं उपलब्ध है. इसीलिए अब बस्तर के मरीजों को इलाज के लिए बाहर अन्य प्रदेशों में जाने की आवश्यकता नहीं हैं. ऐसे मरीज समय पर अस्पताल पहुंचे और अपना इलाज कराएं
