नदी के पानी से खेती, कम लागत में डबल मुनाफा, छत्तीसगढ़ में धान की स्मार्ट खेती
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के ग्रामीण इलाके में किसान अब गर्मी के मौसम में भी धान कि बड़े पैमाने पर खेती करने लगे हैं. युवा आदिवासी किसान ने अपने 2 एकड़ खेत में फरवरी के महीने में धान का बीज बोया था. जो अब लहलहा रहा है, ऐसे में युवक पढ़ाई करने के बाद खेती में दिलचस्पी दिखाया, और फसलों को उर्वरक कि बराबर मात्रा के साथ साथ नदी से सिंचाई कर मेंटेनेंस रखा है. और कम लगात में दोगुना मुनाफा होने कि संभावना जताई जा रही है. ऐसे में युवक अब खेती से मालामाल होकर एक अलग पहचान बनाना चाहता है.
नदी के पानी से गर्मी में सिंचाई संभव
मुकेश मिंज ने बताया कि उन्होंने लगभग 1 से 2 एकड़ जमीन में धान की खेती की है. गर्मी के मौसम में पास में नदी होने के कारण उन्हें सिंचाई की सुविधा मिल जाती है. इसी वजह से उन्होंने इस सीजन में भी धान की खेती करने का निर्णय लिया. मुकेश ने कहा कि गर्मी में धान की खेती से किसानों को रोजगार मिलता है और साथ ही अच्छी आमदनी भी हो जाती है, यह खेती खाली समय को उत्पादक बनाने का अच्छा जरिया बन रही है.
खाद और तकनीक का संतुलित उपयोग
फसल की बेहतर वृद्धि के लिए उन्होंने यूरिया, डीएपी और गोबर खाद का उपयोग किया है, उनका मानना है कि सही मात्रा में खाद का उपयोग फसल की गुणवत्ता को बढ़ाता है.
गर्मी और बरसात की खेती में अंतर
मुकेश मिंज के अनुसार, बरसात के मौसम में धान की फसल प्राकृतिक पानी से हो जाती है, लेकिन गर्मी में सिंचाई के लिए नदी से नाली या नहर बनाकर पानी लाना पड़ता है, जिससे मेहनत और लागत दोनों बढ़ती हैं. मुकेश ने बताया कि 90 दिन में तैयार होने वाली धान की किस्म लगाई है, इसकी बुवाई फरवरी के अंत में की गई थी और वर्तमान में फसल लगभग डेढ़ महीने की हो चुकी है, जून के पहले सप्ताह में कटाई की संभावना है. फिलहाल फसल की स्थिति को लेकर मुकेश मिंज संतुष्ट हैं, उनका कहना है कि इस बार फसल अच्छी दिख रही है और उन्हें बेहतर पैदावार की उम्मीद है…
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