जिला जेल सुकमा में बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने की पहल, फास्ट फूड प्रशिक्षण से बदलेगी ज़िंदगी
जिला जेल सुकमा में बंदियों के पुनर्वास और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक सराहनीय पहल की जा रही है। जेल प्रशासन द्वारा बंदियों को कौशल विकास के तहत विभिन्न प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं, ताकि वे जेल से बाहर निकलने के बाद सम्मानजनक जीवन जी सकें। इसी क्रम में रायपुर से आईं मास्टर ट्रेनर ज्योति पाल द्वारा 12 दिवसीय फास्ट फूड प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। इस प्रशिक्षण में 35 बंदी भाग ले रहे हैं। उन्हें मोमोज, छोले-भटूरे, पानी पूरी, भेल पूरी, कचौड़ी, समोसा, नूडल्स, चाउमिन, सैंडविच, बर्गर, पुलाव और बिरयानी जैसे लोकप्रिय व्यंजन बनाना सिखाया जा रहा है। प्रशिक्षण के लिए आवश्यक सामग्री जेल प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई जा रही है और बंदियों को प्रायोगिक रूप से प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
बंदियों ने जताया आभार
प्रशिक्षण ले रहे बंदियों ने इस पहल के लिए आभार व्यक्त किया। बंदी दिर्दाे महेश ने बताया कि उन्होंने फ्राइड राइस, चाइनीज पकौड़ा, गोभी चिली और मंचूरियन बनाना सीख लिया है। वहीं बंदी अशोक कुमार ने कहा कि वे मोमोज और पानी पूरी जैसे व्यंजन बनाना सीखकर भविष्य में स्वयं का रोजगार शुरू करना चाहते हैं।
जेल अधीक्षक ने बताया उद्देश्य
सहायक जेल अधीक्षक श्री राजेश बिसेन ने बताया कि बंदियों को नई दिशा देने और आत्मनिर्भर बनाने के लिए ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि बंदियों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए योग, साक्षरता अभियान और प्रेरणात्मक गतिविधियां भी संचालित की जा रही हैं।
समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की पहल
जिला जेल सुकमा की यह पहल बंदियों को न केवल रोजगार के अवसर प्रदान कर रही है, बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा में वापस लाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यह कार्यक्रम प्रशासन की सकारात्मक सोच और दूरदर्शिता का उदाहरण है।
