Ration Card पर बड़ी कार्रवाई:डिजिटल पोर्टल और पीएम किसान डेटा से हो रहा मिलान
जिले में राशन कार्डों (Ration Card) के नवीनीकरण और पात्रता की जांच का अभियान तेजी से चल रहा है। प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ केवल वास्तविक जरूरतमंद परिवारों तक ही पहुंचे। जिले में पांच लाख से अधिक राशन कार्ड दर्ज हैं, जिनमें से अब तक एक लाख 40 हजार से अधिक कार्डधारकों का भौतिक और तकनीकी सत्यापन किया जा चुका है।केंद्र सरकार ने सभी जिलों के संदिग्ध राशन कार्डों की एक सूची जारी की थी, जिसमें ऐसे कार्डधारियों को शामिल किया गया था जिनके नाम या पते गलत हैं, या आधार नंबर और बायोमैट्रिक्स अपडेट नहीं है। जिले में लाखो से ज्यादा राशन कार्ड होंगे निरस्त!..सदस्यों के नाम संदिग्ध सूची में हैं। इनमें से कुछ अपात्र हैं, तो कई लंबे समय से राशन नहीं ले रहे हैं। इतना ही नहीं, कई लोगों के आधार भी मैच नहीं खा रहे हैं। जिला प्रशासन की इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य उन लोगों को व्यवस्था से बाहर करना है, जो आर्थिक रूप से सक्षम होने के बावजूद गरीबों के लिए निर्धारित सरकारी राशन का लाभ ले रहे हैं। जांच अभियान के तेज होने के बाद ऐसे प्रभावशाली लोगों में हड़कंप मच गया है, जिन्होंने नियमों की अनदेखी कर राशन कार्ड बनवा रखे हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा तय मानकों के आधार पर पात्रता की समीक्षा की जा रही है।
डिजिटल डेटा से हो रही क्रॉस जांच
प्रशासन केवल भौतिक सत्यापन पर निर्भर नहीं है, बल्कि तकनीक की मदद भी ली जा रही है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लाभार्थियों का डेटा और राजस्व विभाग के भुइयां पोर्टल से जमीन का विवरण निकालकर राशन कार्ड डेटाबेस से मिलान किया जा रहा है। जैसे ही किसी कार्डधारक के पास तय सीमा से अधिक जमीन होने की पुष्टि होती है, पोर्टल पर उसका नाम स्वतः अपात्र श्रेणी में दर्ज हो जाता है। इसी तकनीक के माध्यम से सात हजार राशन कार्डों की अंतिम जांच प्रक्रिया जारी है। जिले में राशन कार्डों के सत्यापन का काम युद्धस्तर पर जारी है और अब तक 1.40 लाख कार्डों की जांच पूरी हो चुकी है। हमारा उद्देश्य अपात्रों को पहचानकर उन्हें योजना से बाहर करना है, ताकि केवल पात्र और जरूरतमंद परिवारों को ही राशन मिल सके। मानक पूरा न करने वाले कार्डधारकों के नाम तुरंत निरस्त किए जा रहे हैं।
