गढ़फुलझर में गुरुद्वारों की तर्ज पर बनेगा भव्य गुरुधाम- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
छत्तीसगढ़ के बसना क्षेत्र का गढ़फुलझर जल्द ही देश के प्रमुख गुरुद्वारों की तर्ज पर एक भव्य गुरुधाम के रूप में विकसित होने जा रहा है. माना जाता है कि करीब 518 साल पहले यहां सिखों के प्रथम गुरु गुरु नानक देव जी के चरण पड़े थे. इस गुरुद्वारे का भूमिपूजन 15 मार्च को मुख्यमंत्री साय करेंगे. इस कार्यक्रम को लेकर क्षेत्र में उत्साह का माहौल है और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है. गुरु नानक देव जी के उपदेशों से प्रभावित होकर उस समय के आदिवासी राजा मानस राज सागर चंद भेना ने करीब 5 एकड़ जमीन गुरु नानक देव जी के नाम समर्पित कर दी थी. इस भूमि को आज भी “गुरुखाप” के नाम से जाना जाता है. अब इसी पवित्र स्थान पर एक भव्य गुरुधाम का निर्माण किया जाएगा
15 मार्च का दिन छत्तीसगढ़ के धार्मिक और सांस्कृतिक इतिहास में खास माना जा रहा है. इस दिन गुरुधाम की नींव रखी जाएगी, जो आने वाली पीढ़ियों को गुरु नानक देव जी के शांति, प्रेम और भाईचारे के संदेश की याद दिलाता रहेगा. इतिहास में दर्ज होगा यह दिन गढ़फुलझर सिर्फ सिख समाज के लिए ही नहीं, बल्कि सभी धर्मों के लोगों की आस्था का केंद्र माना जाता है. यहां अभेद किले, प्राचीन सुरंगों और रानी महल के अवशेष मौजूद हैं. इसके अलावा रनेश्वर रामचंडी मंदिर और बूढ़ादेव मंदिर भी यहां के प्रमुख धार्मिक स्थल हैं.भव्य गुरुधाम बनने के बाद गढ़फुलझर क्षेत्र एक बड़े धार्मिक और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होने की संभावना है. इससे क्षेत्र में पर्यटन बढ़ेगा और स्थानीय लोगों को भी रोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं.
