बीपीएल कार्डधारक लाखों परिवारों झटका, फोर्टिफाइड चावल वितरण पर पर रोक
केंद्र सरकार ने लैब रिपोर्ट के आधार पर यह निर्णय लिया हैं, क्योंकि केंद्रीय गोदामों में लंबे समय तक जमा फोर्टिफाइड चावल में आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन बी-12 जैसे पोषक तत्वों की स्थिरता बनी नहीं रहती थी। लाखों टन पोषक तत्व युक्त चावल स्टॉक में पड़ा हुआ रहता था, इससे पोषण लाभ लगातार कम हो रहा था।बस्तर जिले में 1,94,787 बीपीएल कार्डधारकों को अब फोर्टिफाइड चावल का वितरण अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। इनमें अंत्योदय ग्रामीण 46,477, निराश्रित 503, और प्राथमिकता वर्ग 1,47,807 परिवार शामिल हैं। वहीं, एपीएल 22,238 परिवार पहले ही इस योजना के दायरे से बाहर थे। इस कदम से बस्तर के लाखों लाभार्थियों की पोषण योजनाओं पर अस्थायी असर पड़ा है, जबकि सरकार अधिक टिकाऊ और प्रभावी वितरण प्रणाली विकसित करने के प्रयास कर रही है।
फोर्टिफाइड चावल के लिए सरकार की ओर से करोड़ों रुपए खर्च किए जाते थे, परंतु पोषक तत्वों के नष्ट होने से पूरा नुकसान हो रहा था। सरकार ने कहा है कि राशन वितरण जारी रहेगा, लेकिन अब सामान्य चावल उपलब्ध कराया जाएगा। छत्तीसगढ़ सरकार ने नागरिक आपूर्ति निगम, मार्कफेड और खाद्य विभाग को इस संबंध में अनुपालन करने दिशा-निर्देश जारी किया है।
प्रदेश के 2,954 मिल मालिकों ने योजना की प्रभावशीलता पर सवाल उठाया। उनका कहना है कि पिछले कई वर्षों में गुणवत्ता जांच मानकों को पूरा नहीं किया जा सका और दो साल से अधिक का फोर्टिफाइड चावल का स्टॉक जमा हो गया है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के बाहर ऐसे चावल की कोई मांग नहीं है।
मिलर्स को प्रत्येक 100 किलो चावल में 1 किलो फोर्टिफाइड चावल मिलाने की व्यवस्था थी, लेकिन 99 किलो में 1 किलो मिलाने की शिकायतें और गुणवत्ता संबंधी मामले सामने आने के बाद इस पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। ऐसे में मिलर्स के पास पहले से मौजूद पुराने स्टॉक का ही वितरण किया जाएगा।
2021 में 15 राज्यों में पायलट परियोजनाएं शुरू की गई, जिनमें लगभग आधी असफल रहीं। मार्च 2022 से शिशु देखभाल और स्कूल मील योजनाओं में फोर्टिफाइड चावल को अनिवार्य किया गया। मार्च 2023 से इसे सार्वजनिक वितरण प्रणाली में शामिल किया गया। 2024 तक योजना का लक्ष्य कमजोर महिलाओं, बच्चों और गरीबों के लिए सभी पोषण योजनाओं में विस्तार करना था।
