राजस्व सेवाओं में डिजिटल क्रांति, मंत्री टंकराम वर्मा का दावा, 4808 करोड़ से ज्यादा की अनुदान मांग पारित
छत्तीसगढ़ विधानसभा में राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा के विभागों के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कुल 4 हजार 808 करोड़ 73 लाख 96 हजार रुपए की अनुदान मांगें पारित कर दी गईं. इसमें भू-राजस्व एवं जिला प्रशासन के लिए 2206 करोड़ 2 लाख 97 हजार रुपए, राजस्व विभागीय व्यय के लिए 20 करोड़ 62 लाख 64 हजार रुपए, पुनर्वास के लिए 2 करोड़ 94 लाख 50 हजार रुपए, प्राकृतिक आपदाओं एवं सूखाग्रस्त क्षेत्रों में राहत के लिए 1272 करोड़ 99 लाख 2 हजार रुपए और उच्च शिक्षा विभाग के लिए 1306 करोड़ 14 लाख 83 हजार रुपए शामिल हैं.
प्रशासनिक ढांचे का हुआ विस्तार
मंत्री ने बताया कि राज्य गठन के समय जहां 16 जिले थे, वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर 33 जिले हो चुकी है.इसके साथ ही राजस्व अनुविभाग, तहसील, राजस्व निरीक्षक मंडल और पटवारी हल्कों की संख्या भी बढ़ाई गई है, जिससे प्रशासनिक कामकाज में तेजी आई है.
ऑटो डायवर्सन और डिजिटल किसान किताब
सरकार ने भूमि उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया है।ऑटो डायवर्जन प्रणाली के तहत आवेदन के 15 दिनों के भीतर जमीन के उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी हो जाती है।इसके अलावा डिजिटल किसान किताब की सुविधा से किसानों को भूमि स्वामित्व, ऋण स्थिति और अन्य जानकारी ऑनलाइन मिल रही है, जिससे फसल ऋण लेने की प्रक्रिया भी आसान हुई है।
राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने बताया कि सरकार राजस्व सेवाओं को डिजिटल, साधारण और पारदर्शी बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि डिजिटल ऋण पुस्तिकाओं, भू अभिलेखों का डिजिटलीकरण, ऑटो डायवर्सन और लोक सेवा गारंटी जैसी व्यवस्था ने आम जनता को राहत दी है और राजस्व सेवाओं में पारदर्शिता को बढ़ावा दिया है।
मंत्री ने बताया कि राज्य गठन के समय जहां 16 जिले थे, वहीं अब यह संख्या बढक़र 33 जिलों तक पहुंच गई है, जिससे प्रशासनिक कामकाज में तेजी आई है। भूमि उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया को भी पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया गया है, जिससे 15 दिनों के भीतर जमीन के उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी हो जाती है।
आपदा प्रबंधन के लिए भी सरकार ने एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और एसडीएमएफ के लिए मजबूत वित्तीय प्रावधान किए हैं। एसडीआरएफ के लिए 588 करोड़, एनडीआरएफ के लिए 50 करोड़, एसडीएमएफ के लिए 147 करोड़। राजस्व मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार 2047 तक राज्य को विकसित राज्य बनाने के लक्ष्य के साथ कार्य कर रही है और सरकार का उद्देश्य गरीब, युवाओं, अन्नदाता और नारी को विकास का प्रमुख आधार बनाना है।
किसानों और भूमिहीनों के लिए नई योजनाएं
राजस्व मंत्री ने कहा कि डिजिटल किसान किताब के माध्यम से किसानों को भूमि स्वामित्व और ऋण से जुड़ी जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध हो रही है। साथ ही, दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत भूमिहीन मजदूरों और पारंपरिक ग्रामीण व्यवसाय से जुड़े परिवारों को 10.000 की आर्थिक सहायता दी जा रही है। 2025-26 में 4.96 लाख हितग्राहियों के लिए 496 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई थी और 2026-27 में इसके लिए 605 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
तकनीकी उन्नति और आपदा प्रबंधन
राज्य सरकार कृषि क्षेत्र की निगरानी के लिए ड्रोन, सैटेलाइट इमेजरी और रिमोट सेंसिंग तकनीक का उपयोग करेगी, जिसके लिए 25 करोड़ रुपए का प्रावधान रखा गया है। इसके अलावा, स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीणों को भूमि अधिकार दिए जा रहे हैं। अब तक 1.60 लाख लोगों को अधिकार पत्र मिल चुके हैं और लक्ष्य 10.5 लाख है।
ड्रोन और सैटेलाइट से होगी कृषि निगरानी
सरकार ने UPHAR योजना के जरिए कृषि क्षेत्र की निगरानी के लिए सैटेलाइट इमेजरी, रिमोट सेंसिंग और ड्रोन तकनीक का उपयोग करने का फैसला लिया है.इससे फसल क्षेत्र, उत्पादन अनुमान और प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान का आकलन किया जाएगा,इसके लिए 25 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है.
