सिम्स में जांच की रफ्तार हुई दोगुनी, अत्याधुनिक बायोकेमेस्ट्री मशीनों से अब बारकोड और QR कोड के साथ
सिम्स में मरीजों की बढ़ती संख्या और आधुनिक जांच की जरूरत को देखते हुए बायोकेमेस्ट्री विभाग में अत्याधुनिक मशीनें लगाई गई हैं। इन मशीनों को सीएसआर मद से कलेक्टर की ओर से लगवाया गया है। नई व्यवस्था से जांच प्रक्रिया अब पूरी तरह कंप्यूटरीकृत हो गई है और मरीजों को समय पर सटीक रिपोर्ट उपलब्ध कराई जा सकेगी। नई व्यवस्था के तहत जांच रिपोर्ट को पूर्णतः डिजिटल और सुरक्षित बनाया गया है। अब प्रत्येक रिपोर्ट में क्यूआर कोड और बारकोड की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। मरीज अपने मोबाइल फोन से क्यूआर कोड स्कैन कर कभी भी और कहीं भी अपनी जांच रिपोर्ट देख सकेंगे। छह लाख रुपये की लागत से फुल आटोमैटिक बायोकेमेस्ट्री एनालाइजर तथा हाई परफारमेंस लिक्विड क्रोमेटोग्राफी एनालाइजर स्थापित किए गए हैं। नई मशीनों के माध्यम से जांच की गुणवत्ता और गति दोनों में उल्लेखनीय सुधार होगा। इससे मरीजों को कम समय में अधिक सटीक और विश्वसनीय रिपोर्ट मिल सकेगी। इस सुविधा से अस्पताल में रिपोर्ट लेने के लिए अनावश्यक भीड़ भी कम होगी। साथ ही रिकार्ड सुरक्षित और व्यवस्थित रूप से संग्रहित रहेंगे। अस्पताल प्रबंधन का मानना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और मरीजों को बेहतर अनुभव मिलेगा।
सिम्स में सिकल सेल से संबंधित जांच भी नियमित रूप से की जा रही है। डाक्टरों का कहना है कि समय पर सटीक जांच से सिकल सेल जैसे गंभीर रोगों की पहचान और उपचार में काफी मदद मिलेगी। इससे मरीजों और उनके परिजनों को राहत मिलेगी।नई एचपीएलसी मशीन की स्थापना से अब प्रतिदिन बड़ी संख्या में सिकल सेल मरीजों की जांच सिम्स में ही संभव हो रही है। पहले कई बार मरीजों को अन्य केंद्रों पर रेफर करना पड़ता था, लेकिन अब अधिकांश जांच संस्थान में ही की जा सकेगी। सिम्स में प्रतिदिन औसतन करीब दो हजार ओपीडी और 800 आइपीडी मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में जांच सुविधाओं पर लगातार दबाव बना रहता है। बायोकेमेस्ट्री विभागाध्यक्ष ने बताया कि विभाग में प्रतिदिन लगभग 400 मरीजों के रक्त नमूनों की जांच की जाती है। इन नमूनों से करीब तीन हजार 500 अलग-अलग प्रकार के जांच किए जाते हैं।
