छत्तीसगढ़
बीजापुर जिले में शिक्षा के क्षेत्र में एक अनूठी पहल की गई है. यहां बच्चों की केवल याददाश्त नहीं, बल्कि उनकी समझ, तर्कशक्ति और निर्णय क्षमता को परखने के लिए ‘दक्ष परीक्षा’ आयोजित की गई. जिला प्रशासन की इस पहल का मकसद बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं के पैटर्न से परिचित कराना और उनमें सोचने-समझने की क्षमता विकसित करना है.जिलेभर के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा 5वीं और 8वीं के करीब साढ़े 9 हजार विद्यार्थियों ने इस परीक्षा में हिस्सा लिया. तीन घंटे तक चली इस परीक्षा में मानसिक योग्यता, तार्किक प्रश्न और विषय आधारित प्रश्न शामिल थे. सवाल इस तरह तैयार किए गए थे कि बच्चे रटकर नहीं, बल्कि सोचकर जवाब दें.
तर्कशक्ति और मानसिक क्षमता को बढ़ाने के लिए बच्चों की ‘दिमाग वाली’ परीक्षा
Thursday, February 12, 2026
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बीजापुर जिले में शिक्षा के क्षेत्र में एक अनूठी पहल की गई है. यहां बच्चों की केवल याददाश्त नहीं, बल्कि उनकी समझ, तर्कशक्ति और निर्णय क्षमता को परखने के लिए ‘दक्ष परीक्षा’ आयोजित की गई. जिला प्रशासन की इस पहल का मकसद बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं के पैटर्न से परिचित कराना और उनमें सोचने-समझने की क्षमता विकसित करना है.जिलेभर के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा 5वीं और 8वीं के करीब साढ़े 9 हजार विद्यार्थियों ने इस परीक्षा में हिस्सा लिया. तीन घंटे तक चली इस परीक्षा में मानसिक योग्यता, तार्किक प्रश्न और विषय आधारित प्रश्न शामिल थे. सवाल इस तरह तैयार किए गए थे कि बच्चे रटकर नहीं, बल्कि सोचकर जवाब दें.
दक्ष परीक्षा का प्रश्नपत्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तर्ज पर तैयार किया गया था. इसमें बच्चों की समझ, विश्लेषण क्षमता और निर्णय लेने की योग्यता को जांचने पर जोर दिया गया. प्रशासन का मानना है कि अगर बच्चों को शुरुआती स्तर पर ही ऐसे पैटर्न से परिचित कराया जाए, तो आगे चलकर वे बड़ी परीक्षाओं के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकेंगे. इस तरह का प्रयोग करने वाला बीजापुर प्रदेश का पहला जिला बन गया है. एपीसी मो. जाकिर खान ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना और बच्चों को भविष्य के लिए तैयार करना है.
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