छत्तीसगढ़ के चंद्रखुरी में स्थित माता कौशल्या धाम पहुंची भगवान राम भव्य प्रतिमा,अब करेगी राम पथगमन के दर्शनार्थियों को मंत्रमुग्ध - CGKIRAN

छत्तीसगढ़ के चंद्रखुरी में स्थित माता कौशल्या धाम पहुंची भगवान राम भव्य प्रतिमा,अब करेगी राम पथगमन के दर्शनार्थियों को मंत्रमुग्ध


भगवान श्रीराम के ननिहाल के रूप में प्रसिद्ध छत्तीसगढ़ की पावन धरती चंद्रखुरी में स्थित माता कौशल्या धाम में जल्द ही 51 फीट ऊंची वनवासी स्वरूप की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी. यह विशाल प्रतिमा मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक शहर ग्वालियर से लाई गई है. छत्तीसगढ़ सरकार के निर्देश पर राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात मूर्तिकार दीपक विश्वकर्मा ने इस प्रतिमा का निर्माण किया है. ग्वालियर स्थित सेंड स्टोन आर्ट एंड क्राफ्ट सेंटर में महीनों की कठिन साधना और उत्कृष्ट शिल्प कौशल से तैयार यह प्रतिमा भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और कला का अद्भुत संगम प्रस्तुत करती है. भगवान श्रीराम की 14 वर्षों की वन यात्रा आज भी भारतीय सांस्कृतिक और धार्मिक चेतना का अहम हिस्सा है। श्रीराम ने अयोध्या से लेकर श्रीलंका तक का मार्ग जंगलों में व्यतीत किया, जिन स्थानों से वे गुज़रे वे आज राम वन गमन पथ के रूप में श्रद्धा का केंद्र हैं। भारत सरकार इस पथ पर पड़ने वाले धार्मिक स्थलों को विकसित करने का कार्य कर रही है, जिसमें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ सहित 10 राज्यों के 248 स्थलों को सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टिकोण से संवारा जा रहा है।

रायपुर में लगेगी ग्वालियर में बनी मूर्ति

अब इसी पथ पर ग्वालियर की भी महत्वपूर्ण भागीदारी दर्ज होने जा रही है। ग्वालियर के प्रसिद्ध मिंट स्टोन से बनी भगवान राम की 51 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा जल्द ही छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के निकट चंदखुरी में स्थापित की जाएगी। यह प्रतिमा वनवासी रूप में श्रीराम को दर्शाती है और इसे जाने-माने मूर्तिकार दीपक विश्वकर्मा और उनकी टीम ने तैयार किया है।

  7 महीने पहले मिला था काम

इस विशाल प्रतिमा को आकार देने का जिम्मा छत्तीसगढ़ सरकार ने करीब 7 महीने पहले दीपक विश्वकर्मा को सौंपा था। उनकी टीम के 25 कलाकारों ने दिन-रात मेहनत करके इसे मूर्त रूप दिया है। यह प्रतिमा पूरी तरह ग्वालियर मिंट स्टोन से बनी है। अलग-अलग खंडों को जोड़कर एक अद्भुत और सजीव आकृति तैयार की गई है।

वनवासी स्वरूप में है प्रतिमा

इस मूर्ति की विशेषता है कि यह भगवान राम को वनवासी स्वरूप में दर्शाती है। उनकी वेशभूषा, पुष्पहार, रुद्राक्ष की 108 माला, खड़ाऊ आदि सभी को अत्यंत सूक्ष्मता और सुंदरता से पत्थर में उकेरा गया है। मूर्तिकार ने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से डिजाइन पहले से तय थी और उसी के अनुसार इसे तैयार किया गया।

मूर्ति निर्माण में आईं चुनौती

 इस प्रतिमा का निर्माण अपने आप में एक बड़ी चुनौती थी। सबसे पहले विशाल पत्थर को काटकर ज़मीन पर बिछाया गया, फिर उसके ऊपर डिजाइन उकेरा गया। माप-तौल और ड्राइंग के बाद मूर्ति पर काम शुरू हुआ। इस प्रक्रिया में लगभग 60-70 टन मिंट स्टोन का उपयोग हुआ, लेकिन कटाई और तराशने के बाद प्रतिमा का कुल वजन लगभग 30-35 टन रह गया। इस भव्य प्रतिमा के निर्माण में लगभग 72 लाख रुपये की लागत आई है। इसे रायपुर ले जाकर स्थापित करने में अतिरिक्त 22-25 लाख रुपये का खर्च अनुमानित है। यानी कुल मिलाकर यह करीब 1 करोड़ रुपये की लागत से पूरी होगी।

इससे पहले भी बनाई हैं प्रतिमाएं

यह पहली बार नहीं है जब ग्वालियर में बनी राम प्रतिमा को राम वन गमन पथ पर स्थान मिला हो। इससे पहले भी दीपक विश्वकर्मा द्वारा बनाई गई 25-25 फीट ऊंची दो प्रतिमाएं छत्तीसगढ़ में स्थापित की जा चुकी हैं। इन्हीं की गुणवत्ता और कलात्मकता को देखते हुए उन्हें 51 फीट ऊंची इस नई प्रतिमा का कार्य सौंपा गया। यह प्रतिमा राम वन गमन पथ पर अब तक लगाई गई 7 मूर्तियों में सबसे ऊंची है और जल्द ही इसकी स्थापना चंदखुरी में की जाएगी। यह न सिर्फ ग्वालियर के लिए गर्व की बात है, बल्कि धार्मिक पर्यटन के लिए भी एक बड़ा आकर्षण बनने जा रही है।

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