धमतरी मॉडल बना मिसाल : BaLA कॉन्सेप्ट अब पूरे प्रदेश में लागू - CGKIRAN

धमतरी मॉडल बना मिसाल : BaLA कॉन्सेप्ट अब पूरे प्रदेश में लागू


धमतरी की यह पहल अब पूरे छत्तीसगढ़ में लागू की जाएगी. यह न केवल प्रारंभिक बाल शिक्षा को मजबूत करेगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में शैक्षणिक ढांचे के रचनात्मक उपयोग का उत्कृष्ट उदाहरण भी पेश करेगी. धमतरी का यह नवाचार बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव साबित हो रहा है धमतरी कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि जिले में BaLA कॉन्सेप्ट के सकारात्मक परिणाम साफ दिखाई दे रहे हैं. बच्चों की उपस्थिति बढ़ी है. सीखने की गति में सुधार हुआ है. अभिभावकों की संतुष्टि भी बढ़ी है. उन्होंने बताया कि जिले में अब तक 112 मॉडल आंगनबाड़ी बन चुकी हैं और कुल 1200 आंगनबाड़ी केंद्रों को चरणबद्ध तरीके से इसी मॉडल पर विकसित किया जाएगा.धमतरी जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों को लेकर एक अनोखी पहल की गई है. यहां “BaLA कॉन्सेप्ट पर आधारित मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र तैयार किए गए हैं, जो अब पूरे प्रदेश के लिए मिसाल बन रहे हैं. आकर्षक रंग-रोगन, दीवारों पर शैक्षणिक चित्र और खेल-आधारित सीखने की सामग्री से ये केंद्र बच्चों के लिए जीवंत पाठशाला बन गए हैं.यहां बाथरूम और भोजन व्यवस्था की सुविधा है. बच्चे अब आने और खेलने में दिलचस्पी लेते हैं. खेल-खेल में ही बच्चे बहुत कुछ सीख लेते हैं. पहले से बहुत अच्छा बदला है, बच्चे खुद कहते हैं कि मां आंगनबाड़ी जाना है. चित्र देख के बहुत कुछ सीख लेते हैं-  अभिभावक 

बाल शिक्षा और सर्वांगीण विकास की दिशा में धमतरी जिले की अभिनव पहल अब पूरे प्रदेश के लिए मार्गदर्शक बन गई है। जिले में सफलतापूर्वक लागू किए गए “BaLA ” कॉन्सेप्ट को अब संपूर्ण छत्तीसगढ़ में लागू किया जाएगा। छत्तीसगढ़ शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा इस संबंध में निर्देश जारी करते हुए महात्मा गांधी नरेगा अंतर्गत ग्राम पंचायतों मं  निर्मित एवं निर्माणाधीन सभी आंगनबाड़ी भवनों में BaLA कॉन्सेप्ट को अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।

 महिला एवं बाल विकास विभाग के समन्वय से आंगनबाड़ी भवनों को इस प्रकार विकसित किया जाएगा कि भवन स्वयं बच्चों के लिए शिक्षण-सहायक सामग्री का कार्य करे। BaLA कॉन्सेप्ट के अंतर्गत दीवारों पर वर्णमाला, अंक, आकृतियां, स्थानीय चित्रकथाएं, फर्श पर खेल-आधारित शिक्षण सामग्री, खिड़की-दरवाजों के माध्यम से आकार और माप की समझ जैसे नवाचारी तत्वों को शामिल किया जाएगा। इससे बच्चों में सीखने की जिज्ञासा, रचनात्मकता और बौद्धिक क्षमता का स्वाभाविक विकास होगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी ग्राम पंचायतें स्वीकृत तकनीकी डिज़ाइन एवं निर्धारित वित्तीय प्रावधानों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण निर्माण सुनिश्चित करें। महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों तथा जनप्रतिनिधियों के समन्वय से इस पहल को प्रभावी रूप से लागू करने पर विशेष बल दिया गया है। साथ ही, प्रदेश में प्रचलित सभी आंगनबाड़ी भवन निर्माण कार्यों को प्राथमिकता के साथ 15 मार्च 2026 तक पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं।

कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि धमतरी जिले में BaLA कॉन्सेप्ट के सकारात्मक परिणाम स्पष्ट रूप से देखने को मिले हैं। आंगनबाड़ी केंद्र अब केवल भवन नहीं, बल्कि बच्चों के लिए जीवंत शिक्षण प्रयोगशाला के रूप में विकसित हुए हैं। बच्चों की उपस्थिति में वृद्धि, सीखने की गति में सुधार तथा अभिभावकों की संतुष्टि इस पहल की सफलता को दर्शाती है। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, सुरक्षा मानकों और समय-सीमा का विशेष ध्यान रखा जाए। साथ ही स्थानीय कलाकारों एवं समुदाय की सहभागिता से आंगनबाड़ी केंद्रों को आकर्षक, सुरक्षित एवं बाल-अनुकूल बनाया जाए। यह पहल न केवल प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा को सुदृढ़ करेगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में शैक्षणिक अधोसंरचना के सृजनात्मक उपयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी प्रस्तुत करेगी। धमतरी का यह नवाचार अब पूरे प्रदेश में बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की नींव को और मजबूत करेगा।



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