पलाश के फूलों में हैं कई औषधीय गुण,सेहत के लिए भी हैं फायदेमंद
पलाश का लेटिन भाषा में नाम ब्यूटिया मोनोस्पर्मा है. इसे पैपिलिओनेसी फैमिली का बताया जाता है.होली आने वाली है और इन दिनों पलाश के फूलों की बहार है. एक जमाने में इसे होली के रंग बनाने में प्रयोग किया जाता था. लाल रंग के इस खूबसूरत फूल को लोग होली के कई दिनों पहले से ही पानी में भिगो कर रख देते थे और फिर उबालकर इससे रंग बनाते थे. इस रंग से होली खेली जाती थी और इसकी खुश्बू से सारा वातावरण महक उठता था. आज भी इसे मथुरा, वंदावन और शांति निकेतन आदि जगहों पर होली में प्रयोग किया जाता है. पलाश को कई जगहों पर टेसू के नाम से भी जाना जाता है. पलाश के फूल में कई औषधीय गुण भी होते हैं. पलाश के पेड़ के फूल, बीज और जड़ों की औषधियां बनाई जाती हैं पौराणिक काल से ही आयुर्वेद में इसका प्रयोग किया जाता रहा है. पलाश के फूलों से शर्बत भी बनाते हैं. ग्रामीण इलाकों में इसका घरो में मंडप और औषधियों के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. पलाश को उगाना नहीं पड़ता, यह अपने आप उगता है. ग्रामीण इलाकों में यह बहुतायत पाया जाता है. खास कर छत्तीसगढ़ के गावों में यह ज्यादा देखने को मिलता है.
डीवर्मिंग के लिए
पलाश के बीज में एंटी वर्म गुण पाया जाता है. आयुर्वेद में इसका प्रयोग इसके बीज को पीस कर पेट के कीड़ों को नष्ट करने में किया जाता रहा है. अगर पलाश के बीज के पाउडर को रेग्युलर खाया जाए तो पेट के कीड़े नष्ट हो जाते हैं. इसे आप एक चम्मच शहद के साथ सुबह खाली पेट खा सकते हैं.
पेट की समस्या में
डायबिटीज में
अगर आप डायबिटीज से परेशान हैं और हाई ब्लड प्रेशर से जूझ रहे हैं तो आयुर्वेद में पलाश के पत्तों से इसका इलाज संभव है. पलाश के पत्तों में टिक्टा गुण होता है जो कफ और पित्त को भी कम करता है.
स्किन प्रॉब्लम में
पलाश के बीज का पेस्ट बनाकर अगर स्किन पर लगाया जाए तो इससे एक्जिमा और अन्य स्किन डिजीज ठीक हो जाती हैं. यह पेस्ट खुजली और रूखेपन की समस्या को भी ठीक करने में कारगर है. इसमें मौजूद एसट्रिनजेंट गुण त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद हैं.
सलाह सहित यह केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें.
