पोषण पुनर्वास केंद्र बने कमजोर बच्चों के लिए उम्मीद का केंद्र - हर बच्चे को मिले स्वस्थ बचपन - CGKIRAN

पोषण पुनर्वास केंद्र बने कमजोर बच्चों के लिए उम्मीद का केंद्र - हर बच्चे को मिले स्वस्थ बचपन


किसी बच्चे के चेहरे पर मुस्कान लौटना, उसका वजन बढ़ना और फिर से सामान्य बचपन की ओर बढ़ना केवल स्वास्थ्य से जुड़ा आंकड़ा नहीं, बल्कि पूरे परिवार के लिए राहत और उम्मीद की बात होती है। रायगढ़ जिले में कुपोषण के खिलाफ चल रहे प्रयासों में पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) ऐसे ही बदलाव की कहानी लिख रहा हैं। जिला प्रशासन द्वारा स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के प्रयासों के बीच अगस्त 2026 तक जिले के एनआरसी में 603 बच्चों को भर्ती किया गया, जिनमें 512 बच्चे उपचार के बाद सुपोषित हुए। ये आंकड़े बताते हैं कि समय पर पहचान, उपचार, पोषण और निरंतर देखभाल से कुपोषित बच्चों को स्वस्थ जीवन की ओर वापस लाने का प्रयास प्रभावी रूप से आगे बढ़ रहा है।

घर-घर पहचान से शुरू होती है सेवा की कहानी

कुपोषण से जूझ रहे बच्चों तक पहुंचने का काम केवल अस्पताल पहुंचने के बाद शुरू नहीं होता। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मितानिनों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के माध्यम से बच्चों की पहचान की जाती है। गंभीर कुपोषित पाए जाने वाले बच्चों को आवश्यकता के अनुसार एनआरसी में भर्ती कराया जाता है, जहां उनकी स्वास्थ्य स्थिति के अनुरूप उपचार और पोषण प्रबंधन किया जाता है। एनआरसी में बच्चे की चिकित्सकीय स्थिति की निगरानी के साथ उसके पोषण पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इस दौरान माताओं और परिजनों को भी यह समझाया जाता है कि घर पर बच्चे को किस प्रकार का पौष्टिक भोजन दिया जाए, स्वच्छता का ध्यान कैसे रखा जाए और बच्चे के स्वास्थ्य में किसी बदलाव को किस तरह पहचाना जाए। यानी उपचार केवल बच्चे तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवार को भी बच्चे की बेहतर देखभाल के लिए तैयार किया जाता है।

14 दिन की विशेष देखभाल से स्वस्थ होकर घर वापसी

एनआरसी में भर्ती बच्चों को चिकित्सकीय निगरानी और विशेष पोषण देखभाल उपलब्ध कराई जाती है। उपचार की अवधि के दौरान बच्चे के स्वास्थ्य और वजन में होने वाले बदलाव पर नजर रखी जाती है। माताओं को पौष्टिक भोजन तैयार करने और बच्चे की नियमित देखभाल से जुड़ी व्यवहारिक जानकारी दी जाती है। उपचार पूरा होने के बाद बच्चे को घर भेजते समय भी जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती। छुट्टी के बाद नियमित निगरानी के जरिए बच्चे के स्वास्थ्य और पोषण की स्थिति पर नजर रखी जाती है, ताकि बच्चा दोबारा कुपोषण की स्थिति में न पहुंचे।

छह पोषण पुनर्वास केंद्रों में मिल रही उपचार और पोषण सेवाएं

जिले में छह पोषण पुनर्वास केंद्र बच्चों के उपचार और पोषण पुनर्वास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। जिला अस्पताल रायगढ़ में 113 बच्चे भर्ती हुए, जिनमें 102 सुपोषित हुए। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चपले (खरसिया) में 96 भर्ती बच्चों में 81 सुपोषित हुए। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लैलूंगा में 78 बच्चों को भर्ती किया गया, जिनमें 64 सुपोषित हुए। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तमनार में 97 भर्ती बच्चों में 80 सुपोषित हुए। इसी तरह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र विजय नगर में 114 बच्चों को भर्ती किया गया, जिनमें 108 बच्चे सुपोषित हुए। वहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कापू में 105 बच्चों को भर्ती किया गया, जिनमें 77 बच्चे सुपोषित हुए।

सेवा का लक्ष्य-हर बच्चे को मिले स्वस्थ बचपन

कुपोषण के खिलाफ लड़ाई केवल वजन बढ़ाने तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य बच्चे के स्वास्थ्य, पोषण और विकास को बेहतर बनाना है, ताकि वह सामान्य जीवन की ओर लौट सके। इसी सोच के साथ जिला प्रशासन द्वारा स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाओं को मजबूत करते हुए कुपोषित बच्चों की पहचान से लेकर उपचार और उपचार के बाद निगरानी तक की व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है।

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