समूह की दीदियों ने बदल दिया गांव का दैनिक व्यवहार, स्वच्छता के लिए मिसाल बना बुड़ार - CGKIRAN

समूह की दीदियों ने बदल दिया गांव का दैनिक व्यवहार, स्वच्छता के लिए मिसाल बना बुड़ार


नारी शक्ति चाह ले तो कुछ भी ऐसा नहीं जो संभव ना हो। कोरिया जिले के एक बड़े ग्राम पंचायत बुड़ार में स्वच्छता को लेकर अब पूरा परिदृष्य बदल चुका है और इस बदलाव के पीछे स्व सहायता समूह से जुड़ी हुई चार सखियों का सामूहिक प्रयास है। बैकुण्ठपुर जनपद पंचायत की कुछ बड़ी ग्राम पंचायतों में शामिल बुड़ार में स्वच्छता के लिए चार महिलाओं के समर्पण, निरंतरता और अनुषासन ने एक नई राह बना दी है। अब गांव में स्वच्छता को लेकर हर कोई अनुशासित है और पूरे गांव का सूखा और गीला कचरा व्यवस्थित तरीके से निष्पादित किया जा रहा है। चार महिलाओं के अथक प्रयास से स्वच्छता के लिए आरंभ किया गया ठोस एवं तरल अपषिष्ट प्रबंधन केंद्र सुचारू ढंग से चल रहा है।

महिला समूहों की संगठित पहल

ग्राम पंचायत बुड़ार में स्वच्छता के मानकों में आगे बढ़ते हुए गांव में कचरा संग्रहण का विषय आया। ऐसे में जब कोई अन्य व्यक्ति इस कार्य की जिम्मेदारी उठाने को तैयार नहीं था तब ग्राम पंचायत में गठित दो महिला समूहों ने आगे बढ़कर इसका नेतृत्व सम्हाला। ग्राम पंचायत के जागृति महिला समूह की लीलावती और अंजनी तथा सहारा महिला स्व सहायता समूह की हीराननी और मीनल बाई ने इस महत्वपूर्ण कार्य को अपने हाथों में लिया। जून 2024 से इन महिलाओं ने यह कार्य आरंभ किया और अब तक निरंतर कार्य करते हुए पूरे गांव में स्वच्छता की अलग जगा रही हैं।

बुधवार और शनिवार को संग्रहण

ग्राम पंचायत में स्वच्छता का कार्य कर रही इन दीदियों ने बताया कि गांव में सप्ताह में दो बार कचरा संग्रहण का कार्य किया जाता है। सूखा और गीला कचरा अलग अलग तरीके से एकत्र किया जाता है और फिर उसे ग्राम पंचायत में निर्मित ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र ले जाकर मानकों के अनुसार पृथक्करण किया जाता है। महिलाओ के सतत जागरूकता का यह सफल परिणाम है कि अब गांव मे सूखे और गीले कचरे का वैज्ञानिक निष्पादन संभव हो पा रहा है और गांव में स्वच्छता के प्रति सजगता बढ़ गई है।

निरंतरता से बनी बात

गांव की इन महिलाओं को आरंभिक दिनों में इस कार्य को लेकर कई नकारात्मक संदेश सुनने को मिले लेकिन स्वच्छता के प्रति समर्पित होकर यह दीदियां निरंतर अपने कार्य में संलग्न रहीं और हर दिन उनका प्रयास जारी रहा। इनके समर्पण के साथ निरंतरता से स्वच्छता के प्रति घर घर जाकर आम नागरिकों को गीले और सूखे कचरे का अंतर समझाना और उसे पृथक रखने के बारे में बताना धीरे धीरे रंग लाया और अब गांव के हर घर से इन्हे अलग अलग कचरा मिलता है जिससे गांव में स्वच्छता का अलग ही वातावरण बन गया है।

कचरे से आय के स्रोत

ग्राम पंचायत में बीते दो वर्षों से कचरे का संग्रहण और पृथक्करण कर रही इन महिलाओं को कचरे से भी आय प्राप्त हुई है। अब तक इन्होने 1 क्विंटल से अधिक प्लास्टिक और लोहे के कचरे को कबाड़ में विक्रय किया है। साथ ही ग्राम पंचायत द्वारा इनके कार्यों के लिए एक नियत मानदेय प्रदान किया जाता है। ऐसे में बीते दो वर्षों में महिलाओं को समेकित रूप से 2 लाख 64 हजार रूपए से अधिक की आय भी हो चुकी है।

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