चूड़ी कला से आजीविका की राह पर अग्रसर समूह की दीदियां - CGKIRAN

चूड़ी कला से आजीविका की राह पर अग्रसर समूह की दीदियां

प्रशासन द्वारा समूह की महिलाओं को आजीविका गतिविधियों से जोड़ते हुए नए कौशल से प्रशिक्षित करने की दिशा में अभिनव पहल की जा रही है। जिले में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और आजीविका संवर्धन के उद्देश्य से उन्हें कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है। इसी क्रम में विकासखंड सूरजपुर में सिलफिली के मदनपुर में चूड़ियों को आकार देते हाथ अब अपनी आजीविका की नई राह भी गढ़ रहे हैं। यहां समूह की 200 से अधिक महिलाएं कौशल प्रशिक्षण के तहत चूड़ी बनाना सीख रही हैं। जहां महिलाएं कांच, मेटल एवं लाख की चूड़ियां बनाने का प्रशिक्षण ले रही हैं।

कलेक्टर श्रीमती रेना जमील ने प्रशिक्षण स्थल पहुंचकर संचालित गतिविधियों की जानकारी ली। उन्होंने महिलाओं से बातचीत की और चूड़ी बनाने की प्रक्रिया को देखा और समझा। और उनसे इस काम को सीखने के अनुभव के बारे में पूछा। 

कलेक्टर श्रीमती रेना जमील ने प्रशिक्षण ले रही महिलाओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि आप सभी जिस लगन से चूड़ी बनाना सीख रही हैं, वही आपकी सबसे बड़ी ताकत है। अभ्यास के साथ आपका हुनर और निखरेगा। आपकी अपने हाथों से बनी चूड़ियां आपकी पहचान बनेंगी उन्होंने कहा कि लगन और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें। आपकी मेहनत अन्य महिलाओं को भी कुछ नया सीखने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करेगी।

इस दौरान कलेक्टर श्रीमती रेना जमील ने स्वयं चूड़ी बनाने की कला को आजमाया। उन्होंने प्रशिक्षण ले रही महिलाओं का उत्साह बढ़ाया, समूह की महिलाओं ने अपने हाथों से बनी चूड़ियां कलेक्टर को भेंट कीं।

सिलफिली के मदनपुर में जिले की 21 महिला समूहों की 200 से अधिक सदस्य चूड़ी निर्माण का प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। प्रशिक्षण के उपरांत इस कौशल को आय के स्रोत के रूप में विकसित करने की दिशा में भी प्रयास किया जा रहा है। महिलाओं को एक माह तक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य उन्हें ऐसा कौशल देना है, जिससे वे प्रशिक्षण के बाद चूड़ी निर्माण को आय के साधन के रूप में अपना सकें। जिससे समूह की  महिलाएं प्रतिदिन लगभग 300 से 400 रुपये तक की आय अर्जित कर सकती हैं।

प्रशिक्षण के साथ कच्चे माल की उपलब्धता पर भी काम किया जा रहा है। वर्तमान में चूड़ी निर्माण के लिए आवश्यक कच्चा माल फिरोजाबाद से मंगाया जा रहा है। आगामी समय में भविष्य में कांच प्लांट यूनिट स्थापित करने की योजना है, जिससे स्थानीय स्तर पर आवश्यक सामग्री तैयार करने के साथ वेस्टेज का भी बेहतर उपयोग किया जा सकेगा। ताकि चूड़ी निर्माण की गतिविधि को स्थानीय स्तर पर आगे बढ़ाया जा सके।

 प्रशिक्षण के प्रारंभिक चरण में महिलाओं को कांच, मेटल और लाख की चूड़ियां बनाने के साथ डिजाइनिंग एवं अन्य तकनीकी कौशल भी सिखाया जा रहा है। महिलाएं इस कला में दक्ष होकर बेहतर आय अर्जित करने में सक्षम हो सकती हैं। प्रशासन द्वारा प्रशिक्षण के साथ महिलाओं को आवश्यक कच्चा माल उपलब्ध कराने तथा उनके द्वारा तैयार उत्पादों के विपणन के लिए बाजार उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था की जाएगी।

चूड़ी निर्माण के लिए प्रसिद्ध उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद की तर्ज पर छत्तीसगढ़ राज्य के सूरजपुर जिले में इस कौशल को विकसित करने की पहल महिलाओं के लिए एक नया अवसर है। प्रशिक्षण ले रही महिलाओं के लिए यह केवल चूड़ी बनाने की कला सीखने का मौका नहीं, बल्कि अपनी मेहनत से परिवार की आय में योगदान देने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम है।

उल्लेखनीय है कि राज्य शासन महिलाओं को समूहों और कौशल प्रशिक्षण से जोड़कर स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए प्रयासरत है। और समूह की महिलाएं मदनपुर में अपने हुनर से आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रही हैं। स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण और काम के अवसर उपलब्ध हों, तो महिलाएं नए क्षेत्र में भी अपनी पहचान बना सकती हैं।

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