माओवाद प्रभावित कोनगुड़ में अब कौशल से रोजगार और आत्मनिर्भरता की राह
जिले के सुदूरवर्ती ग्राम कोनगुड़ में गार्मेंट फैक्ट्री का शुभारंभ किया गया है. इस गारमेंट फैक्ट्री की खास बात है कि यहां स्थानीय महिलाओं, युवाओं के साथ साथ आत्मसमर्पित नक्सलियों को रोजगार का अवसर मिल रहा है. नीति आयोग से मिले करीब 5 करोड़ रुपये की राशि से गार्मेंट फैक्ट्री तैयार की गई है. रविवार को कांकेर सांसद भोजराज नाग, केशकाल विधायक नीलकंठ टेकाम, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक सहित जिला प्रशासन की टीम की मौजूदगी में फैक्टी का शुभारंभ किया गया. फैक्ट्री में काम करने वाले कुछ आत्मसमर्पित नक्सली कभी इसी इलाके में हथियार उठाकर नक्सली गतिविधियों से जुड़े हुए थे, लेकिन अब उन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़कर रोजगार को अपना भविष्य बनाया है.
नक्सलवाद मुक्त होने के बाद पहली बार कोनगुड़ में जिला स्तरीय समाधान शिविर का आय़ोजन किया गया. गारमेंट फैक्ट्री में सरेंडर नक्सली और अन्य युवक युवती सिलाई का कम सीख रहे हैं. आने वाले समय में ये युवा आत्मनिर्भर होकर भारत देश को विकसित राष्ट्र बनाने के पीएम मोदी के सपने को पूरा करेंगे -भोजराज नाग, सांसद कांकेर लोकसभा
नक्सली कमांडर रजनु कोर्राम और कुलसाय कावड़े ने बताया कि साल 2013 में उन्होंने नक्सल संगठन ज्वाइन किया. साल 2025 तक नक्सल संगठन से जुड़े रहे. बस्तर के सभी जिलों में सक्रिय रहे. कई नक्सली घटनाओं में भी शामिल रहे. साल 2025 में सरकार की पुर्नवास नीति से प्रभावित होकर आत्मसमर्पण किया था. अब अपने गांव में ही गारमेंट्स फैक्ट्री में सिलाई सीखने का मौका मिल रहा है. सरेंडर नक्सलियों ने सरकार को धन्यवाद दिया है.
सांसद भोजराज नाग ने कहा- गार्मेंट फैक्ट्री के संचालन से क्षेत्र के स्थानीय लोगों को अपने ही गांव और क्षेत्र में रोजगार का अवसर मिल रहा है. इससे महिलाएं और युवा आत्मनिर्भर बनेंगे, साथ ही आत्मसमर्पित नक्सलियों को भी रोजगार के माध्यम से समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का अवसर मिलेगा. प्रशासन का उद्देश्य सुदूर क्षेत्रों में रोजगार के साधन विकसित कर लोगों को स्थायी रूप से विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है.
विधायक नीलकंठ टेकाम ने कहा- जब मैं कोंडागांव में कलेक्टर के रूप में पदस्थ था, उस दौरान नीति आयोग की ओर से जिले को 10 करोड़ रुपये की राशि मिली थी. उसी समय इस गार्मेंट फैक्ट्री की नींव रखी गई थी और अब इसका विधिवत संचालन शुरू हो गया है. आने वाले समय में कोनगुड़ और आसपास के लोगों को इसका व्यापक लाभ मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के और अधिक अवसर पैदा होंगे. यह पहल सुदूर क्षेत्र के लोगों को आत्मनिर्भर बनाने और आत्मसमर्पित नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण साबित होगी.
कोंडागांव कलेक्टर नूपुर राशि पन्ना ने कहा कि गारमेंट फैक्ट्री अंडर ट्रेनिंग है. कुछ दिनों बाद इसमें प्रोडेक्शन शुरू होगा. सरेंडर नक्सली पुरुषों को भी इस गारमेंट फैक्ट्री में ट्रेनिंग दी जा रही है. इस गारमेंट फैक्ट्री में 340 लोगों को रोजगार की व्यवस्था है. गांव में ही ग्रामीणों को रोजगार मिलेगा.
