सरगुजा की स्वच्छता दीदी.. समाज सेवा के साथ खेती में बनाई पहचान - CGKIRAN

सरगुजा की स्वच्छता दीदी.. समाज सेवा के साथ खेती में बनाई पहचान


छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं. स्वच्छता अभियान से जुड़ी किरण यादव ने पहले स्वच्छता दीदी के रूप में पहचान बनाई और अब स्वच्छता अभियान की बचत से खेती कर रही हैं. उन्होंने अपने दो एकड़ खेत में आलू की खेती की है. किरण यादव ने 12वीं की पढ़ाई के बाद स्वच्छता अभियान में काम किया और समाज सेवा से भी जुड़ी रहीं. अब वह खेती के माध्यम से एक नई पहचान बना रही हैं. उनका उद्देश्य सिर्फ पैसे कमाना नहीं, बल्कि खेती सीखने का जज्बा भी है.

किरण यादव ने बताया कि वह उन्नति स्वयं सहायता समूह के साथ स्वच्छता अभियान में काम करती हैं. समूह से होने वाली बचत की रकम को उन्होंने उपयोगी काम में लगाने का फैसला किया. समाजसेवा और एनजीओ से जुड़कर काम करने वाली किरण ने खेती सीखने के उद्देश्य से पहली बार आलू की खेती शुरू की.

उन्होंने इस साल पहली बार लगभग दो एकड़ जमीन में आलू की खेती की है. इस खेती में करीब 50 से 60 हजार रुपये की लागत आई है. हालांकि, फसल तैयार होने में अभी समय है और कीट प्रकोप के कारण कुछ पौधों को नुकसान भी हो रहा है, जिससे फिलहाल मुनाफे का अनुमान लगाना मुश्किल है.

आलू की फसल में कीटों का प्रकोप दिखने के बाद किरण की चिंता बढ़ गई है. उनका कहना है कि फसल को बचाने के लिए वह जीवामृत का इस्तेमाल करने की तैयारी कर रही हैं. इससे पहले उन्होंने मिर्च की खेती में जीवामृत का उपयोग किया था, जहां उन्हें बेहतर परिणाम मिले थे.

किरण ने बताया कि उन्होंने एनजीओ के माध्यम से जीवामृत बनाने की ट्रेनिंग ली है. वह इसे घर पर ही तैयार करती हैं. इसमें गोबर, गोमूत्र, गुड़ और बेसन जैसी सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है. उनका मानना है कि पहले मिर्च की फसल में इसके इस्तेमाल से पौधों को कीटों से कुछ हद तक बचाने में मदद मिली थी, इसलिए अब आलू की खेती में भी इसका उपयोग करने की योजना है.

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