कपास की खेती की ओर बढ़े जिले के किसान
कलेक्टर कुलदीप शर्मा के मार्गदर्शन में कृषि विभाग के अधिकारियो के द्वारा किसानों को धान के बदले अन्य फसल की खेती के लिये लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा जिसका सकारात्मक परिणाम आने लगा है। भाटापारा विकासखण्ड में कृषि विभाग के प्रयासों से अब किसान पारंपरिक धान की जगह नकदी फसल कपास की खेती की ओर बढ़ रहे हैं।
अब तक 25 हेक्टेयर से अधिक रकबे में कपास की बुवाई की गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार विकासखंड के ग्राम गुड़ेलिया, कोनी, बिटकुली, तुरमा तथा अवरेठी में ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों के प्रयास और प्रेरणा से किसानों द्वारा 25 हेक्टेयर से अधिक रकबे में कपास की उन्नत खेती की जा रही है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि भाटापारा विकासखण्ड में फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए ऐसे और गांवों में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है ताकि किसान कम पानी और कम लागत वाली फसलों को अपनाकर अपनी आमदनी बढ़ा सकें। बताया गया कि गिरते भूजल स्तर को सुधारने और मिट्टी के सेहत को बचाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित एवं वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है।
धान के मुकाबले कपास की फसल को लगभग 70 प्रतिशत तक कम पानी की आवश्यकता होती है। साथ ही लगातार एक ही फसल उगाने से मिट्टी के पोषक तत्व खत्म होते हैं जबकि कपास उगाने से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है तथा कीट एवं व्याधियों का प्रभाव भी कम होता है। कृषक उन्नति योजना के तहत शासन द्वारा किसानों को फसल विविधीकरण के लिए प्रोत्साहन के रूप में धान के स्थान पर अन्य फसल अपनाने वाले किसानों को प्रति एकड़ 15000 रुपये एवं धान के अलावा अन्य फसल लगाने पर 10000 रुपये की आदान सहायता प्रदान की जाएगी। इस राशि का उपयोग किसान भाई बीज, खाद और कीटनाशक जैसी जरूरी कृषि आदानों पर खर्च कर सकते हैं।
