अब हथियार नहीं, हुनर से बदल रही पुनर्वासितों की जिंदगी
छत्तीसगढ़ सरकार पुनर्वासित माओवादियों को दंतेवाड़ा लाइवलीहुड कॉलेज में फील्ड टेक्नीशियन के तहत होम अप्लायंस और इलेक्ट्रीशियन की ट्रेनिंग दे रही है. ये माओवादी कभी जंगलों में माओवादी संगठन की जनताना सरकार के लिए काम करते थे और हथियार लेकर जंगलों में घूमते थे लेकिन अब वे शांति की राह पर लौट चुके हैं. बस्तर में जिन माओवादियों का पुनर्वास किया गया है, उन्हें सिलाई, राजमिस्त्री समेत कई तरह की ट्रेनिंग दी जा रही है ताकि वे यहां से जाने के बाद अपने जीवन-यापन के लिए रोजगार कर सकें. साथ ही मुख्यधारा में जुड़कर समाज के साथ अच्छे से रह सकें. माओवादियों को हर जिले में ट्रेनिंग दी जा रही है.
लाइवलीहुड कॉलेज में ट्रेनिंग ले रहे पुनर्वासित माओवादियों से बातचीत की. बुधरा राम मंडावी ने कहा, ‘मैंने 2019 में माओवादी संगठन जॉइन किया था. मेरे पास 315 बोर की बंदूक रहती थी और 15 गोलियां रखता था. संगठन के लोग हमें समझाते थे कि आप जैसे पढ़े-लिखे लोग पार्टी में नहीं आएंगे, तो जल, जंगल और जमीन को कैसे बचाएंगे. संगठन में मुझे डॉक्टर की जिम्मेदारी दी गई थी. जो बीमार रहते थे, उनका इलाज करता था. मैंने 11 मार्च 2026 को आत्मसमर्पण किया. यहां मैं फील्ड टेक्नीशियन का काम सीख रहा हूं. ट्रेनिंग पूरी होने के बाद गांव जाकर लोगों के घरों में बिजली से जुड़े काम करेंगे और खेती भी करेंगे.’
कौशल विकास विभाग के सहायक संचालक हरीश सिन्हा का कहना है कि वर्तमान समय में लाइवलीहुड कॉलेज में फील्ड टेक्नीशियन और होम अप्लायंस ट्रेनिंग के तहत घरों के छोटे-मोटे इलेक्ट्रिकल काम जैसे- प्रेस, हीटर, कूलर और अन्य उपकरणों की मरम्मत सिखाई जा रही है. ट्रेनर पुनर्वासित माओवादियों को अच्छी तरह से प्रशिक्षण दे रहे हैं ताकि वे अपने गांव लौटने के बाद रोजगार से जुड़ सकें. यही इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य है.
