छत्तीसगढ़ सरकार ने सैटलाइट डेटा से बदली शासन की सूरत,मिनटों में हो रहे महीनों के काम - CGKIRAN

छत्तीसगढ़ सरकार ने सैटलाइट डेटा से बदली शासन की सूरत,मिनटों में हो रहे महीनों के काम


छत्तीसगढ़ ने शासन और प्रशासन के क्षेत्र में एक ऐसी तकनीकी क्रांति की शुरुआत की है, जो न केवल फाइलों के बोझ को कम कर रही है, बल्कि अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ भी पहुंचा रही है. ‘जियोस्पेशियल इंटेलिजेंस’यानी भौगोलिक सूचना तंत्र का उपयोग करके राज्य सरकार अब नीतियों को कागजों से उतारकर सीधे जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू कर रही है. प्रधानमंत्री गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान की ताकत से लैस होकर छत्तीसगढ़ अब बुनियादी ढांचे की योजना बनाने, खर्च को नियंत्रित करने और दुर्गम क्षेत्रों तक अपनी पहुंच बनाने के लिए स्मार्ट डेटा का उपयोग कर रहा है. यहां उन 5 तरीकों के बारे में बताया गया है, जिनसे यह बदलाव जमीन पर दिखाई दे रहा है.

1. भूमि आवंटन की प्रक्रिया हुई तेज

पारंपरिक रूप से किसी उद्योग या बुनियादी ढांचे के लिए उपयुक्त भूमि की पहचान करना एक थकाऊ प्रक्रिया थी, जिसमें महीनों का समय, दर्जनों फाइलें और कई विभागों के चक्कर काटने पड़ते थे. लेकिन छत्तीसगढ़ ने ‘गति शक्ति’ प्लेटफॉर्म पर ‘लैंड पैच एनालिसिस’ टूल के माध्यम से इसे पूरी तरह बदल दिया है. अब सरकारी स्वामित्व वाली भूमि के टुकड़ों को उनके आकार, स्वामित्व, सड़कों और रेलवे से निकटता के आधार पर तुरंत फिल्टर किया जा सकता है. सैटलाइट इमेजरी के माध्यम से यह भी जांचा जा सकता है कि वह भूमि किसी पर्यावरणीय क्षेत्र या बस्ती के पास तो नहीं है. उदाहरण के लिए रायपुर के एक विश्लेषण में योजनाकारों ने 150 किमी के दायरे में निवेश के लिए तैयार 70 भूखंडों की पहचान महज एक सिंगल प्लानिंग सेशन में कर ली.

2. बैंकिंग और वित्तीय समावेशन: नक्शों के जरिए ग्रामीण विस्तार

छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में बैंकिंग सेवाओं की पहुंचे आज भी एक बड़ी चुनौती है. इसे दूर करने के लिए राज्य सरकार अब केवल प्रशासनिक अनुमानों पर निर्भर नहीं है, बल्कि ‘स्पेशियल गैप एनालिसिस’ का सहारा ले रही है. बैंक शाखाओं, इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक के केंद्रों और बस्तियों के डेटा को सड़क नेटवर्क के साथ मैप पर रखकर यह देखा जा रहा है कि कौन से गांव औपचारिक बैंकिंग सेवाओं के दायरे से बाहर हैं. इसका परिणाम जिला-वार कवरेज मैप्स के रूप में सामने आया है, जो यह बताते हैं कि नए बैंकिंग बुनियादी ढांचे की सबसे अधिक आवश्यकता कहां है. यह डेटा-आधारित दृष्टिकोण सुनिश्चित करता है कि सरकारी योजनाओं का पैसा सीधे और सुरक्षित रूप से नागरिकों तक पहुंचे और वित्तीय समावेशन का लक्ष्य केवल कागजों तक सीमित न रहे.

3. आंगनवाड़ी केंद्रों का वैज्ञानिक नियोजन: बच्चों और माताओं के करीब सेवा

आंगनवाड़ी केंद्र पोषण, प्रारंभिक शिक्षा और मातृ स्वास्थ्य के लिए रीढ़ की हड्डी हैं, लेकिन भौगोलिक कठिनाइयां अक्सर इनकी पहुंच को सीमित कर देती हैं. कांकेर जिले के एक ब्लॉक में 2 किमी के ‘सर्विस बफर एनालिसिस’ के माध्यम से उन बस्तियों की पहचान की गई, जो किसी भी आंगनवाड़ी के दायरे में नहीं थीं. इसके आधार पर नई आंगनवाड़ियों के लिए स्थान प्राथमिकता से तय किए गए. इसी तरह एक अन्य जिले में उन केंद्रों की मैपिंग की गई जो मुख्य सड़कों से 500 मीटर से अधिक दूर थे, जिससे ग्रामीण सड़क विस्तार योजनाओं को दिशा मिली. जियोस्पेशियल टूल्स के जरिए इस तरह का सूक्ष्म नियोजन सुनिश्चित कर रहा है कि सरकारी पोषण योजनाएं उन बच्चों तक पहुंचे, जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है.

4. संजीवनी मार्ट: सामरिक स्थान नियोजन से बढ़ेगी आदिवासियों की आमदनी

छत्तीसगढ़ की ‘संजीवनी मार्ट’ पहल, जो किफायती दवाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ आदिवासी समुदायों द्वारा एकत्र किए गए वनोपज के लिए बाजार भी प्रदान करती है, अब जियोस्पेशियल इंटेलिजेंस द्वारा निर्देशित है. इसके तहत संभावित स्थानों को बस्ती के घनत्व, सड़क पहुंच, नजदीकी बुनियादी ढांचे और यहां तक कि पर्यटकों की आवाजाही के आधार पर रैंक किया जाता है. यह सुनिश्चित करता है कि मार्ट केवल वहीं न बनें, जहां दवाओं की जरूरत है, बल्कि वहां भी बनें जहां स्थानीय समुदाय पर्यटकों को अपने स्वदेशी उत्पाद बेचकर टिकाऊ आय अर्जित कर सकें. हर प्रस्तावित साइट के पीछे एक डेटा रिपोर्ट होती है, जो फैसले को और उद्देश्यपूर्ण बनाती है.

5. PVTG बस्तियों के लिए जीवन रेखा: दुर्गम क्षेत्रों में सड़क और स्वास्थ्य का संगम

जियोस्पेशियल इंटेलिजेंस का सबसे शक्तिशाली इस्तेमाल राज्य के सबसे दूरस्थ क्षेत्रों में दिख रहा है. नारायणपुर जिले की ओरछा तहसील, जो अबूझमाड़िया और हिल मारिया जैसे विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTG) का घर है, वहां ‘गति शक्ति’ प्लेटफॉर्म बस्तियों के डेटा को स्वास्थ्य केंद्रों और सड़क नेटवर्क के साथ एकीकृत कर रहा है. इससे उन बस्तियों की स्पष्ट पहचान हो रही है जहां न तो सड़क है और न ही पास में कोई स्वास्थ्य केंद्र.

‘डायनेमिक एलाइनमेंट टूल’ का उपयोग करके योजनाकार सबसे छोटे और व्यावहारिक नए सड़क मार्गों का मॉडल तैयार कर रहे हैं, जो इन अलग-थलग पड़ी बस्तियों को स्वास्थ्य केंद्रों से जोड़ सकें. ये डिजिटल नक्शे अब उन समुदायों के लिए वास्तविक जीवन रेखा साबित हो रहे हैं जो लंबे समय से पारंपरिक नियोजन की पहुंच से बाहर थे.

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