बस्तर में अब गोली वाली नहीं खेल वाली बोली, नक्सल खात्मे के बाद विश्वास की नई ऊर्जा- युवा जोश बदलेगा बस्तर - CGKIRAN

बस्तर में अब गोली वाली नहीं खेल वाली बोली, नक्सल खात्मे के बाद विश्वास की नई ऊर्जा- युवा जोश बदलेगा बस्तर

 


31 मार्च 2026 को नक्सल समाप्ति के बाद क्रिकेट के भगवान भारत रत्न सचिन तेंदुलकर का दंतेवाड़ा जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र छिंदनार गांव में आना इस बात को संबल देता है कि युवा अब बदलाव की नई राह को अपना रहा है. नक्सली कभी जिन हाथों में बंदूक देने के आतुर रहते थे युवा अब उससे बहुत दूर चला गया है. अब बस्तर में गोली वाली नहीं खेल वाली बोली लोग बोल रहे हैं जिसे सचिन तेंदुलकर एक नया आयाम और आधार देकर जा रहे हैं. छत्तीसगढ़ के बस्तर डिवीजन के दंतेवाड़ा पहुंचे क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर जिस तरीके से लोगों के बीच घुले मिले और जो कुछ इन्होंने बस्तर में किया वो बताता है कि बस्तर अब बदलाव के बड़े मुहाने पर खड़ा हो गया है. ये सिर्फ सचिन तेंदुलकर के आने और बस्तरिया लोगों के साथ मिलजुल कर खेलने की कहानी मात्र नहीं है बल्कि बस्तर आने के बाद सचिन तेंदुलकर ने जिस तरीके से वहां की संस्कृति, धरोहर और आम लोगों के उस परिपाटी को अपनाया जो बस्तर और वहां के लोगों की मूल आत्मा से जुड़ा है ये बस्तर के बदलाव की नई कहानी लिखेगा.

सचिन तेंदुलकर का जन्मदिन एक ऐसी शुरुआत है जो बस्तर में नक्सलवाद के खात्मे और बस्तर के विकास के नए आयाम को जन्म दे रहा है.यह बस्तर के लोगों के लिए भी बड़ी प्रेरणा की बात है. सचिन तेंदुलकर के साथ उन लोगों ने वैसे खेल खेले जो आमतौर पर बस्तर और दंतेवाड़ा में सबसे ज्यादा खेले जाते हैं. सचिन तेंदुलकर जैसी शख्सियत के साथ मिलकर खेलना, उन्हें देखना और उनका साथ होना बहुत सामान्य और सहज नहीं है. बस्तर अपने बदलाव की कहानी लिख रहा है तो संभव है भारत का हर प्रबुद्ध व्यक्ति जो भारत के विकास की कल्पना करता है वह बस्तर के विकास के बिना भारत की संरचना को पूरा नहीं मानता.सचिन तेंदुलकर ने जो किया है ये निश्चित तौर पर बस्तर की धरती में बदलाव का बड़ा पैमाना है.

मैं बहुत खुश हूं- सचिन तेंदुलकर

दंतेवाड़ा के छिंदनार गांव पहुंचने सचिन तेंदुलकर ने कहा कि मैं जितना खुश हूं शायद इतना उत्साह आपके भी भीतर न हो. मैं यहां आकर बहुत खुश हूं और जिस तरीके का बदलाव यहां देखने को मिल रहा है वह अपने आप में काफी अनोखा है. तेंदुलकर ने कहा कि भविष्य के चैंपियन तैयार करने के लिए केवल व्यक्तिगत प्रतिभा पर्याप्त नहीं होती, बल्कि मजबूत बुनियादी ढांचे और आधुनिक खेल सुविधाओं की आवश्यकता होती है.ग्रामीण क्षेत्रों में खेलों के प्रति बढ़ती जागरूकता एक सकारात्मक संकेत है, और ऐसे प्रयास देश के खेल भविष्य को नई दिशा देंगे.

राष्ट्रपति का सपना ''बदल रहा है बस्तर,सबसे बेहतर होगा बस्तर''

देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 28 जनवरी 2026 को कहा था कि माओवाद का खात्मा देश में बदलाव और नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास की नई किरण की सौगात लाएगी. 28 जनवरी 2026 को शुरू हुए लोकसभा बजट सत्र में बुलाए गए संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए देश की महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा था कि माओवाद से जुड़े इलाकों में तेजी से बदलाव आ रहा है. अगर बात छत्तीसगढ़ की करें 2000 से ज्यादा लोगों ने माओवाद का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण किया है. इसके बाद माओवाद प्रभावित इलाकों में तेजी से परिवर्तन हो रहा है जो लोगों के जीवन में नई आशा और विकास का किरण लेकर आई है.

संसद में महामहिम राष्ट्रपति ने इस संबोधन में बताया था कि सरकार की नीतियों के अनुरूप सुरक्षा बलों ने निर्णायक कार्रवाई की है. वर्षों तक देश के 126 जिलों में असुरक्षा और भय का वातावरण था. माओवादी विचारधारा ने कई पीढ़ियों के भविष्य को अंधकार में डाला. इसका सबसे ज्यादा नुकसान हमारे युवाओ, आदिवासी और दलित भाई बहनों को हुआ है. राष्ट्रपति ने कहा था जैसे-जैसे माओवाद खत्म हो रहा है, इससे लाखों नागरिकों की जीवन में शांति लौटी है. नक्सल से प्रभावित रहे इलाकों में परिवर्तन को आज पूरे देश में देखा जा रहा है. बीजापुर के एक गांव में 26 साल बाद बस पहुंची तो लोगों में उत्सव की तरह खुशी मनाया गया. बस्तर ओलंपिक में युवा बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया.

मोदी का सपना खेलेगा बस्तर,जीतेगा बस्तर, हारेगा नक्सल

30 दिसंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात में कहा था कि छत्तीसगढ़ में हुआ बस्तर ओलंपिक केवल खेल नहीं बल्कि खेल और विकास का अनोखा संगम है सात जिले के एक लाख से ज्यादा प्रतिभागियों ने इसमें हिस्सा लिया जो इसके सार्थक संदेश को बताता है. माओवाद की घनघोर चपेट में रहने वाला बस्तर इससे बाहर निकल रहा है. यह खेल युवाओं को नई सोच नई दिशा देने का अनोखा प्रयास रहा है. पीएम मोदी ने कहा था कि बस्तर ओलंपिक का शुभंकर पहाड़ी मैना रही है. बस्तर ओलंपिक बस्तर की समृद्ध संस्कृति की झलक को बताता है बस्तर खेल महोत्सव का मूल मंत्र बरसायता बस्तर -खेलेगा बस्तर जीतेगा बस्तर हारेगा नक्सल. पहली ही बार में बस्तर ओलंपिक में लाखों खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया है. यह सिर्फ आंकड़ा नहीं है यह हमारे युवाओं के संकल्प की गौरव गाथा है. एथलेटिक्स, तीरंदाजी, बैडमिंटन, फुटबॉल, हॉकी, वेट लिफ्टिंग, कबड्डी, खोखो, वॉलीबॉल हर खेल में लोगों ने प्रतिभा का परचम लहराया है. बस्तर ओलंपिक में खेल का मैदान नहीं जीवन में आगे बढ़ने का अवसर है.

सीएम साय ने कहा- ये है बदलते बस्तर की सशक्त पहचान

छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय ने कहा कि आज मां दंतेश्वरी की पावन धरा पर दंतेवाड़ा जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र छिंदनार ग्राम में भारत रत्न सचिन तेंदुलकर का आगमन बदलते हुए बस्तर की सशक्त पहचान है. यह उस नए बस्तर की तस्वीर है, जो अब भय और असुरक्षा की छाया से निकलकर विकास, अवसर और आत्मविश्वास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है.  सीएम साय ने विश्वास व्यक्त किया कि इस तरह की पहल बस्तर के युवाओं को नई दिशा देगी और उन्हें अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रेरित करेंगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि सचिन तेंदुलकर का बच्चों के बीच जाकर समय बिताना, उन्हें खेलों के प्रति प्रेरित करना और उनके भीतर आत्मविश्वास का संचार करना इस अभियान को और अधिक प्रभावशाली बनाता है. इससे न केवल खेल प्रतिभाओं को निखरने का अवसर मिलेगा, बल्कि युवाओं में अनुशासन, टीम भावना और सकारात्मक ऊर्जा का भी संचार होगा.

मुख्यमंत्री ने कहा कि सचिन तेंदुलकर फाउंडेशन एवं माणदेशी फाउंडेशन द्वारा संचालित ‘मैदान कप अभियान’ खेल अधोसंरचना के विकास की दिशा में एक दूरदर्शी पहल है.विशेष रूप से जनजातीय अंचलों में बच्चों को खेल मैदान और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने का यह प्रयास बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार खेल और युवा विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है तथा भविष्य में भी इस दिशा में निरंतर प्रयास जारी रहेंगे.

Previous article
Next article

Articles Ads

Articles Ads 1

Articles Ads 2

Advertisement Ads